ईडी की रेड के बाद भारतमाला घोटाले में बड़ा पर्दाफाश: खुद की जमीन को 4 टुकड़ों में बांटकर खुद को ही बेचा, 3.70 लाख की जमीन पर डकार गए 62 लाख का मुआवजा
रायपुर। छत्तीसगढ़ में भारतमाला परियोजना के तहत हुए भूमि अधिग्रहण में एक के बाद एक कई बड़े फर्जीवाड़े सामने आ रहे हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) और ईओडब्ल्यू (EOW) की ताबड़तोड़ कार्रवाई के बाद अब दस्तावेजों की परतों से ऐसे चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं, जो सीधे तौर पर सिस्टम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। राजनांदगांव जिले में घोटालेबाजों ने राजस्व और पंजीयन विभाग के अधिकारियों के साथ मिलकर ऐसा 'खेला' किया है, जिसमें एक व्यक्ति ने अपनी ही जमीन को चार टुकड़ों में बांटकर खुद के ही नाम पर दोबारा रजिस्ट्री करवा ली।
इस फर्जीवाड़े का इकलौता मकसद भारतमाला प्रोजेक्ट के तहत बंटने वाले भारी-भरकम मुआवजे को लूटना था। हैरानी की बात यह है कि जिस जमीन की असल खरीदी कीमत मात्र 3 लाख 70 हजार रुपए थी, उसके एवज में शासन से 62 लाख 69 हजार 749 रुपए का सरकारी मुआवजा ऐंठ लिया गया।
खरीदी-बिक्री पर रोक, फिर भी धड़ल्ले से हुई रजिस्ट्री
यह पूरा मामला राजनांदगांव जिले के देवादा गांव का है। दस्तावेजों की पड़ताल में यह साफ हुआ है कि जिस दौरान शासन ने इस इलाके में जमीन की खरीदी-बिक्री पर रोक लगा रखी थी, ठीक उसी दौरान उप पंजीयक कार्यालय में मिलीभगत से रजिस्ट्रियां की गईं। 12 फरवरी 2018 को 0.184 हेक्टेयर जमीन की जो रजिस्ट्री हुई (पंजीयन आईडी CG6409712022018021), उसके कागजों में विक्रेता का नाम बसंत कुमार जैन है और क्रेता (प्रस्तुतकर्ता) भी बसंत कुमार जैन ही है। यानी स्वयं की जमीन स्वयं को ही बेच दी गई। शासन को इस पूरी प्रक्रिया में महज 23,125 रुपए का पंजीयन शुल्क मिला। उप पंजीयक स्तर पर इस खुली धांधली पर कोई आपत्ति तक दर्ज नहीं की गई।
मुआवजे का खुला बंदरबांट
शातिर तरीके से एक ही जमीन को टुकड़ों में बांटकर लाखों का खेल किया गया:
- खसरा 142/1 (0.048 हेक्टेयर):** 19,29,153 रुपए का मुआवजा।
- खसरा 142/2 (0.040 हेक्टेयर शामिल) 19,29,153 रुपए का मुआवजा।
- खसरा 128/8 (0.048 हेक्टेयर) 16,07,628 रुपए का भुगतान।
- खसरा 140/1 व 162/4 (0.048 हेक्टेयर):** 8,03,814 रुपए ऐंठे गए।
मुआवजे के लिए किया गया फर्जी बंटाकन
जांच में यह बात भी सामने आई है कि खसरा नंबर 127/43 (रकबा 0.028) के लिए 11 लाख 25 हजार 339 रुपए का मुआवजा लिया गया, जबकि इसकी कोई अलग से रजिस्ट्री मौजूद नहीं है। आरोप है कि ज्यादा पैसा ऐंठने के लिए अधिकारियों की शह पर जाली बंटाकन (बंटवारा) कर दिया गया और बिना जांच-पड़ताल के ही अधिकारियों ने मुआवजे की मोटी रकम जारी कर दी।
परिवार और करीबियों के नाम पर भी सौदे
मुआवजे की रकम को अधिकतम करने के लिए भूमि के कई हिस्से परिवार और परिचितों के नाम पर बेचे गए। इस पूरे गोलमाल में अभिलेष कुमार जैन, श्रेयांश कटारिया, योगेश कुमार जैन, ऋषभ कटारिया, बसंत कुमार जैन, विजय जैन, शकुन जैन सहित भूपेन्द्र चंद्राकर, दीप्ति चंद्राकर, रोशन चंद्राकर और सीमा चंद्राकर के नाम शामिल हैं। इन सभी के खिलाफ अब ईओडब्ल्यू और ईडी में अहम शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं और मामले की परतें खुलने के बाद जांच एजेंसियों का शिकंजा और कसता जा रहा है।
