रायपुर में मुर्दे को जिंदा बताकर बेची जमीन जिसे पूर्व तहसीलदार ने नकारा उसे नए ने दी मंजूरी

रायपुर में मुर्दे को जिंदा बताकर बेची जमीन जिसे पूर्व तहसीलदार ने नकारा उसे नए ने दी मंजूरी

रायपुर l राजधानी से लगे अभनपुर तहसील के टेकारी गांव में जमीन के खेल का एक बड़ा मामला सामने आया है। यहां भूमाफिया और अफसरों की मिलीभगत से एक मृत व्यक्ति को जिंदा बताकर उसकी जमीन की रजिस्ट्री करवा दी गई। जिस जमीन के नामांतरण को पूर्व तहसीलदार ने दो बार नियमों का हवाला देकर खारिज कर दिया था उसी मामले को नए तहसीलदार ने मंजूरी दे दी। राजस्व विभाग के ऑनलाइन और ऑफलाइन रिकॉर्ड में एक ही जमीन के अलग अलग मालिक दिख रहे हैं जिससे पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

वसीयत पाने वाले की मौत फिर भी चढ़ गया नाम

टेकारी की खसरा नंबर 223 बटा 1 और 645 बटा 1 जमीन का यह पूरा विवाद है। यह जमीन शारदा वर्मा और बोधनी वर्मा के नाम पर दर्ज थी। शारदा वर्मा ने अपने बेटे गुलाब वर्मा के नाम वसीयत लिखी थी। शारदा वर्मा की मौत 2021 में और बेटे गुलाब की मौत 2024 में हो गई। कानून के जानकारों के मुताबिक वसीयत जिसके नाम पर थी अगर उसकी मौत वसीयत करने वाले के बाद हो जाए तो वसीयत का असर खत्म हो जाता है। पूर्व तहसीलदार सत्येंद्र शुक्ला ने इसी आधार पर दो बार आवेदन खारिज किया था। इसके बावजूद मौजूदा तहसीलदार सृजन सोनकर ने इसी त्रुटिपूर्ण आवेदन को स्वीकार कर जमीन वारिसों के नाम चढ़ा दी।

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मुर्दे ने 2025 में आकर कर दी रजिस्ट्री

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इस मामले में फर्जीवाड़े की हद तब पार हो गई जब मृत व्यक्ति को रजिस्ट्रार ऑफिस में खड़ा कर दिया गया। दस्तावेजों के अनुसार शारदा वर्मा की मौत 2021 में हो चुकी है लेकिन रिकॉर्ड बताते हैं कि उन्होंने जून 2025 में यह जमीन अन्नू तारक नाम के व्यक्ति को बेच दी। यानी जो व्यक्ति चार साल पहले मर चुका है उसने जमीन की रजिस्ट्री कर दी। इसके महज दो हफ्ते बाद अन्नू तारक ने यह जमीन आगे कौशल और कपिल को बेच दी। अब हालत यह है कि ऑनलाइन रिकॉर्ड में जमीन खरीददारों के नाम पर है और पटवारी के रजिस्टर में पुराने मालिकों के नाम पर।

अधिकारी बोले होगी जांच

मामले के तूल पकड़ने पर अधिकारियों ने अपनी सफाई दी है। तत्कालीन तहसीलदार सत्येंद्र शुक्ला ने बताया कि मामला पुराना है इसलिए उन्हें अब ज्यादा याद नहीं है। वहीं आरोपों से घिरे वर्तमान तहसीलदार सृजन सोनकर ने बताया कि उनका कोई निजी लाभ नहीं था और आवेदकों ने तथ्य छिपाकर पेश किए थे इसलिए अब दोबारा सुनवाई होगी। अभनपुर एसडीएम रवि सिंह ने बताया कि मामले की शुरुआती रिपोर्ट कलेक्टर को भेज रहे हैं और कमेटी बनाकर इसकी गहरी जांच की जाएगी। रायपुर कलेक्टर गौरव सिंह ने बताया कि मामला उनके संज्ञान में आया है और दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई होगी।

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