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परमाणु ऊर्जा में आत्मनिर्भरता की छलांग: भारत ने एशिया में बनाया रिकॉर्ड, जाने....
मुंबई। भारत ने अपने परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम में एक अहम मील का पत्थर हासिल किया है। महाराष्ट्र के पालघर जिले स्थित तारापुर परमाणु ऊर्जा संयंत्र (TAPS) की यूनिट-1 व्यापक जीर्णोद्धार और आधुनिकीकरण के बाद दोबारा 160 मेगावाट क्षमता के साथ राष्ट्रीय ग्रिड से जुड़ गई है। इस उपलब्धि के साथ भारत एशिया का पहला देश बन गया है जिसने किसी पुराने परमाणु रिएक्टर को पूर्णतः स्वदेशी तकनीक से जीवनकाल विस्तार देकर पुनः संचालित किया है।
57 साल बाद नया जीवन
1969 में वाणिज्यिक संचालन शुरू करने वाली टीएपीएस-1 और टीएपीएस-2 ने पांच दशकों से अधिक समय तक देश को बिजली उपलब्ध कराई। सामान्यतः 40–50 वर्ष बाद अधिकांश देश परमाणु संयंत्रों को डीकमीशन कर देते हैं, लेकिन भारतीय वैज्ञानिकों और इंजीनियरों ने इन्हें आधुनिक तकनीक से उन्नत कर अगले 15–20 वर्षों तक संचालन योग्य बना दिया है। टीएपीएस-2 का नवीनीकरण कार्य भी अंतिम चरण में है और उसे जल्द ही ग्रिड से जोड़ा जाएगा।
छह वर्षों का व्यापक आधुनिकीकरण
न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL) के अनुसार, 2020 में दोनों इकाइयों को नवीनीकरण और वृद्धावस्था प्रबंधन कार्यों के लिए बंद किया गया था। कड़े नियामकीय मानकों के तहत छह वर्षों तक चले इस प्रोजेक्ट में रिएक्टर की पुनर्संचरण पाइपिंग को उन्नत संक्षारण-रोधी सामग्री से बदला गया, 3डी लेजर स्कैनिंग तकनीक अपनाई गई, टरबाइन-जनरेटर प्रणाली का आधुनिकीकरण किया गया और विद्युत प्रणालियों को अपग्रेड किया गया।
स्वच्छ ऊर्जा में बड़ा योगदान
अपने संचालन काल में टीएपीएस-1 और 2 ने मिलकर 1,00,000 मिलियन यूनिट से अधिक स्वच्छ बिजली का उत्पादन किया है। इससे अनुमानित 86 मिलियन टन से अधिक कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन को रोका जा सका। यह उपलब्धि भारत की स्वच्छ ऊर्जा प्रतिबद्धता को भी मजबूत करती है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
टीएपीएस-1 और 2 पहली पीढ़ी के बॉयलिंग वाटर रिएक्टर (BWR) हैं, जिन्हें 1968 में पूर्णता मिली और 1969 में ग्रिड से जोड़ा गया। प्रारंभिक क्षमता 210 मेगावाट प्रति यूनिट थी, जिसे बाद में तकनीकी कारणों से 160 मेगावाट कर दिया गया। इन संयंत्रों ने भारत को परमाणु ऊर्जा अपनाने वाले शुरुआती देशों में स्थापित किया और स्वदेशी रिएक्टर विकास की मजबूत नींव रखी। इस पुनरुद्धार के साथ भारत ने न केवल तकनीकी आत्मनिर्भरता का प्रदर्शन किया है, बल्कि यह भी साबित किया है कि जटिल परमाणु अवसंरचना का सुरक्षित और दीर्घकालिक प्रबंधन स्वदेशी विशेषज्ञता के दम पर संभव है।
लेखक के विषय में
मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।
