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सुकमा में नक्सल संगठन को बड़ा झटका, महिला सहित 22 माओवादियों ने छोड़ा हथियार और थामा मुख्यधारा का रास्ता
सुकमा। छत्तीसगढ़ में नक्सल विरोधी अभियानों के बीच सुकमा जिले से एक बड़ी सफलता सामने आई है। महिला समेत 22 माओवादियों ने मंगलवार को पुलिस अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। इनमें 21 पुरुष और एक महिला शामिल हैं। इसे सुरक्षा एजेंसियों के बढ़ते दबाव और पुनर्वास नीति के प्रभाव का परिणाम माना जा रहा है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली जगरगुंडा, पेद्दाबोडकेल और मोरपल्ली क्षेत्रों में सक्रिय थे। ये विभिन्न मिलिशिया, आरपीसी और जनताना सरकार से जुड़े पदों पर कार्यरत रहे हैं। हाल के महीनों में सुरक्षाबलों की सतत कार्रवाई और गांवों में बढ़ती विकास गतिविधियों के चलते संगठन की पकड़ कमजोर पड़ रही है।
इस अभियान में जिला रिजर्व गार्ड (डीआरजी) सुकमा, जिला बल, रेंज फील्ड टीम जगदलपुर और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की विभिन्न वाहिनियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। खुफिया तंत्र की सटीक सूचना और लगातार संवाद प्रयासों ने आत्मसमर्पण की प्रक्रिया को गति दी।
आत्मसमर्पित माओवादियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर संविधान में विश्वास जताया है। राज्य सरकार की पुनर्वास नीति के तहत प्रत्येक को 50-50 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई है। इसके अतिरिक्त उन्हें कौशल विकास, रोजगार और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, ताकि वे समाज की मुख्यधारा में सम्मानजनक जीवन जी सकें।
सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि क्षेत्र में शांति और विकास सुनिश्चित करने के लिए अभियान आगे भी जारी रहेंगे। लगातार हो रहे आत्मसमर्पण इस बात का संकेत हैं कि नक्सली संगठन की जमीनी पकड़ कमजोर हो रही है और स्थानीय युवा हिंसा छोड़कर बेहतर भविष्य की ओर कदम बढ़ा रहे हैं।
लेखक के विषय में
मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।
