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रायपुर के आउटर में छाया अंधेरा सत्रह सौ लाइटें बंद होने से बढ़ा दुर्घटना और अपराध का खतरा
रायपुर नगर निगम सीमा क्षेत्र में शाम ढलते ही कई इलाके अंधेरे में डूब जाते हैं। सड़कों और सार्वजनिक स्थानों को रोशन करने के लिए निगम प्रशासन ने छप्पन हजार से ज्यादा स्ट्रीट लाइटें लगाई हैं मगर इनमें से सत्रह सौ से ज्यादा लाइटें बंद पड़ी हैं। सबसे बुरा हाल शहर के आउटर इलाकों का है जहां लाइट न होने से सड़कों पर अंधेरा पसरा रहता है और हर पल दुर्घटना का डर बना रहता है। शहर के बाहरी हिस्सों में अंधेरे का फायदा उठाकर अपराधी भी सक्रिय हो जाते हैं जिससे चोरी और लूट जैसी घटनाओं का खतरा बढ़ गया है। मिडिया की टीम ने जब शहर में लगे स्ट्रीट लाइटों की पड़ताल की तो हालात चौंकाने वाले मिले। संतोषी नगर से लेकर भाठागांव रोड और देवपुरी के आगे कमल विहार तक कई लाइटें बंद मिली हैं। इसके अलावा अटारी और जरवाय इलाके में भी दर्जनों लाइटें खराब पड़ी हैं। रात के वक्त इन सड़कों पर चलना किसी जोखिम से कम नहीं है। स्थानीय लोगों और राहगीरों का कहना है कि शिकायत करने के बाद भी सुनवाई नहीं होती है। पार्षदों की शिकायत के बाद भी मेंटेनेंस का काम समय पर नहीं हो पा रहा है। प्रशासनिक स्तर पर लापरवाही का आलम यह है कि करीब पचास वार्डों से स्ट्रीट लाइट बंद होने की लगातार शिकायतें आ रही हैं। पार्षदों का कहना है कि कई जगहों पर नई लाइटें लगाने और खंभों का विस्तार करने की मांग की गई है लेकिन समय पर इसकी सुनवाई नहीं हो रही है। अधिकारियों का रवैया बेहद सुस्त है जिसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। वहीं स्ट्रीट लाइटों की वजह से बिजली बिल की खपत भी होती है यही वजह है कि कई बार जानबूझकर भी लाइटों को बंद कर दिया जाता है। इस पूरे मामले पर नगर निगम के अपर आयुक्त विनोद पाण्डेय ने बताया कि हम मानते हैं कि चार से पांच प्रतिशत स्ट्रीट लाइटें बंद चालू होती रहती हैं। उन्होंने जानकारी दी कि शहर में लगभग पचपन से साठ हजार स्ट्रीट लाइटें हैं। विनोद पाण्डेय ने बताया कि जिस वार्ड में भी इस तरह की समस्या है वहां टोल फ्री नंबर और जोन कार्यालय में इसकी जानकारी दी जा सकती है। उनका दावा है कि मेंटेनेंस का काम लगातार चलता रहता है और जहां मांग है वहां नए खंभों की व्यवस्था भी की जा रही है। सड़क दुर्घटनाओं के आंकड़ों पर गौर करें तो स्ट्रीट लाइटें बंद होने की वजह से हादसों में भी इजाफा हो रहा है। कमल विहार इलाके भाठागांव और अटारी टाटीबंध क्षेत्र में इसकी ज्यादा शिकायतें मिल रही हैं। अंधेरे रास्तों से गुजरना विशेषकर महिलाओं और बुजुर्गों के लिए असुरक्षा का माहौल पैदा करता है। शिकायत के बाद लाइटों का तुरंत मेंटेनेंस न होना निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी अगर शहर की सड़कों पर अंधेरा है तो यह प्रशासनिक व्यवस्था की बड़ी खामी है। जनता को उम्मीद है कि जल्द ही इन खराब लाइटों को सुधारा जाएगा ताकि वे बेखौफ होकर सड़कों पर निकल सकें।
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मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।
