कवर्धा का महाघोटाला: 218 करोड़ रुपए ट्रेजरी से निकाले और गायब, न बिल न वाउचर, फाइलें भी डकार गए बीईओ

कवर्धा का महाघोटाला: 218 करोड़ रुपए ट्रेजरी से निकाले और गायब, न बिल न वाउचर, फाइलें भी डकार गए बीईओ

कवर्धा: छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले में शिक्षा व्यवस्था सुधारने के नाम पर ऐसा भारी भ्रष्टाचार हुआ है जिसे सुनकर किसी के भी होश फाख्ता हो जाएंगे। शिक्षा विभाग के एक अधिकारी ने सरकारी खजाने से एक-दो नहीं, बल्कि पूरे 218 करोड़ रुपए की विशाल रकम निकाल ली, लेकिन यह अथाह पैसा कहां गया, इसका किसी के पास कोई हिसाब नहीं है। घोटाले की असली हद तो यह है कि इस पूरी राशि के खर्च का विभाग में न कोई बिल है, न वाउचर और न ही कोई कैशबुक। यानी साहब पूरे 218 करोड़ रुपए बिना किसी सबूत के सीधे हजम कर गए। इस बड़े खुलासे के बाद शासन और प्रशासन में भारी हड़कंप मच गया है।

कागजों से गायब करोड़ों का रहस्य

यह हैरान करने वाला मामला कवर्धा के ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (बीईओ) कार्यालय का है। पिछले चार सालों के दौरान इस सरकारी कार्यालय से 218 करोड़ 4 लाख 87 हजार 344 रुपए ट्रेजरी (ई-कोष) के माध्यम से धड़ल्ले से आहरित किए गए। अमूमन इतने बड़े बजट के इस्तेमाल के लिए फाइलों का अंबार लग जाता है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि कार्यालय में भुगतान रजिस्टर, उपयोगिता प्रमाण पत्र और यहां तक कि मूल वित्तीय दस्तावेज तक पूरी तरह गायब हैं। यह महज एक लापरवाही नहीं, बल्कि सुनियोजित भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा सबूत माना जा रहा है।

ऑडिट टीम के भी उड़ गए होश

इस जादुई वित्तीय खेल का पर्दाफाश तब हुआ जब 24 और 25 नवंबर 2025 को पांच सदस्यीय विशेष ऑडिट टीम ने बीईओ कार्यालय कवर्धा की सूक्ष्म जांच की। टीम जब वहां पहुंची तो उन्हें एक भी मूल दस्तावेज नहीं मिला। इसके बाद जब ऑनलाइन ट्रेजरी सिस्टम से डाटा खंगाला गया, तब जाकर 218 करोड़ की निकासी का खौफनाक सच सामने आया। टीम यह देखकर पूरी तरह सन्न रह गई कि बिना किसी रिकॉर्ड के ही करोड़ों रुपए निकाल लिए गए।

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तत्कालीन प्रभारी बीईओ संजय जायसवाल निलंबित

इस महाघोटाले की पुष्टि होते ही राज्य शासन ने कड़ा एक्शन लिया है। मामले में तत्कालीन प्रभारी बीईओ संजय जायसवाल पर गाज गिरी है। वह मूलतः व्याख्याता एलबी के पद पर हैं और वर्तमान में शासकीय हाईस्कूल बैरख बोड़ला में पदस्थ थे। उन्हें छत्तीसगढ़ सिविल सेवा वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील नियम 1966 के कड़े प्रावधानों के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। अब सवाल यह है कि क्या यह भ्रष्टाचार अकेले बीईओ ने किया है?

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