डीएमएफ घोटाला: पूर्व आईएएस अनिल टुटेजा को सुप्रीम कोर्ट से जमानत, लेकिन छत्तीसगढ़ में 'नो एंट्री'

डीएमएफ घोटाला: पूर्व आईएएस अनिल टुटेजा को सुप्रीम कोर्ट से जमानत, लेकिन छत्तीसगढ़ में 'नो एंट्री'

रायपुर। नई दिल्ली छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित डिस्ट्रिक्ट मिनरल फंड यानी डीएमएफ घोटाले में घिरे राज्य कैडर के पूर्व आईएएस अफसर अनिल टुटेजा को आखिरकार सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिल गई है। लंबे समय से सलाखों के पीछे दिन काट रहे टुटेजा को देश की सबसे बड़ी अदालत ने सोमवार को जमानत दे दी है। हालांकि पूर्व नौकरशाह को यह जमानत एक बेहद सख्त और बड़ी शर्त के साथ मिली है। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने साफ निर्देश दिया है कि जमानत पर रिहा होने के बाद अनिल टुटेजा को छत्तीसगढ़ राज्य की सीमा से बाहर ही रहना होगा। इसका सीधा अर्थ यह है कि उन्हें अपने ही प्रदेश में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी। जेल से बाहर आने के बावजूद उनका यह वनवास राज्य के प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में चर्चा का मुख्य विषय बन गया है।

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने इस महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई की। अदालत कक्ष में बचाव पक्ष और छत्तीसगढ़ सरकार के वकीलों के बीच तीखी बहस देखने को मिली। राज्य सरकार की तरफ से पेश हुए एडिशनल एडवोकेट जनरल रवि शर्मा ने जमानत याचिका का पुरजोर विरोध किया। उन्होंने साल दो हजार उन्नीस के कुछ कथित व्हाट्सएप चैट का हवाला देते हुए अदालत के सामने दावा किया कि अनिल टुटेजा राज्य में हुए कई बड़े घोटालों के मुख्य साजिशकर्ता रहे हैं। राज्य सरकार का स्पष्ट तर्क था कि टुटेजा का रसूख ऐसा है कि जमानत मिलने पर वे जांच और गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं।

दूसरी तरफ अनिल टुटेजा की ओर से अदालत में पेश हुए वरिष्ठ वकील शोएब आलम ने इन दलीलों का मजबूती से काउण्टर किया। उन्होंने बेंच को बताया कि उनके मुवक्किल भ्रष्टाचार के छह अन्य मामलों में पहले ही जमानत पा चुके हैं और डीएमएफ घोटाला ही वह इकलौता और आखिरी मामला बचा था जिसके कारण वे अभी तक जेल की चारदीवारी में कैद थे। बचाव पक्ष के वकील ने यह भी तर्क दिया कि टुटेजा अब सरकारी सेवा से रिटायर हो चुके हैं इसलिए उनके द्वारा गवाहों को डराने या ट्रायल को प्रभावित करने की कोई गुंजाइश नहीं बचती। उन्होंने याद दिलाया कि इस मामले के अन्य सह आरोपी पहले ही जमानत पर रिहा होकर बाहर आ चुके हैं।

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दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने न्यायिक प्रक्रिया के व्यावहारिक पहलुओं पर गौर किया। अदालत ने पाया कि इस पूरे मामले में अभियोजन पक्ष के करीब पच्चासी गवाहों से पूछताछ की जानी बाकी है। जाहिर है कि ट्रायल खत्म होने में अभी काफी लंबा समय लगने वाला है। बेंच ने इस तथ्य पर भी ध्यान दिया कि पूर्व आईएएस अधिकारी चौबीस जनवरी दो हजार चौबीस से ही भ्रष्टाचार के अलग अलग मामलों में हिरासत में हैं जबकि मौजूदा डीएमएफ मामले में उनकी गिरफ्तारी तेईस फरवरी दो हजार छब्बीस को दिखाई गई थी।

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सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में यह स्पष्ट किया कि यद्यपि पूर्व अधिकारी पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप बेहद गंभीर प्रकृति के हैं और उन पर पूरी कानूनी प्रक्रिया के तहत ट्रायल चलेगा लेकिन एक व्यक्ति द्वारा हिरासत में बिताए गए लंबे समय और ट्रायल में लगने वाले संभावित वक्त को देखते हुए उन्हें जेल में रखना उचित नहीं है। इन्ही आधारों पर अदालत ने उन्हें जमानत देने का फैसला सुनाया। गौरतलब है कि टुटेजा पर आरोप है कि उन्होंने राज्य के उद्योग विभाग में पदस्थ रहते हुए डीएमएफ के तहत ठेके दिलाने के एवज में भारी रिश्वत ली थी। इस अदालती फैसले के बाद टुटेजा खुली हवा में सांस तो ले सकेंगे लेकिन उन्हें छत्तीसगढ़ से दूर रहकर ही अपना समय गुजारना होगा।

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