दुर्ग-भिलाई से चल रहा था साइबर ठगी का 'कमीशन कनेक्शन'! 15 म्यूल अकाउंट सप्लायर गिरफ्तार, करोड़ों के लेन-देन का खुलासा
दुर्ग। देशभर में साइबर ठगी से लोगों के खातों से उड़ाए गए करोड़ों रुपये आखिर जाते कहां थे? इस सवाल का जवाब दुर्ग पुलिस की बड़ी कार्रवाई में मिला है। पुलिस ने ऐसे 15 युवाओं को गिरफ्तार किया है, जो खुद ठगी नहीं करते थे, लेकिन साइबर अपराधियों की काली कमाई को अपने बैंक खातों के जरिए ठिकाने लगाने का काम करते थे। कुछ हजार रुपये के कमीशन के लालच में ये लोग ठगों के 'मनी म्यूल' बन गए थे। जांच में करोड़ों रुपये के संदिग्ध ट्रांजेक्शन का खुलासा हुआ है, जिसने साइबर अपराध के एक बड़े नेटवर्क की परतें खोल दी हैं।
जांच में सामने आया है कि ये आरोपी युवाओं, छात्रों और जरूरतमंद लोगों को कुछ हजार रुपये का लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाते थे। बाद में इन्हीं खातों का इस्तेमाल देशभर में हुई साइबर ठगी की रकम को ट्रांसफर करने के लिए किया जाता था। पुलिस की पड़ताल में करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेन-देन सामने आए हैं, जिसने पूरे नेटवर्क की गंभीरता को उजागर कर दिया है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि गिरफ्तार आरोपियों में कई पढ़े-लिखे युवा और युवतियां शामिल हैं। कुछ ने अपने खाते बेचे, तो कुछ ने दोस्तों और परिचितों के खाते खुलवाकर साइबर गिरोहों तक पहुंचाए। पुलिस के अनुसार, यह पूरा खेल म्यूल बैंक खातों के जरिए संचालित किया जा रहा था, जो साइबर अपराधियों के लिए 'मनी रूट' का काम कर रहे थे।
दुर्ग-भिलाई क्षेत्र पहले भी ऐसे मामलों को लेकर चर्चा में रहा है। पिछले वर्षों में भी करोड़ों रुपये के अवैध ट्रांजेक्शन और अंतरराष्ट्रीय साइबर नेटवर्क से जुड़े तार सामने आए थे। अब एक बार फिर हुई कार्रवाई ने यह संकेत दिया है कि साइबर अपराधियों का नेटवर्क लगातार नए चेहरे और नए तरीकों से फैल रहा है।
पुलिस का कहना है कि जांच अभी जारी है और इस नेटवर्क के पीछे बैठे बड़े संचालकों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है। सवाल यह भी है कि आखिर कुछ हजार रुपये के लालच में युवा किस तरह करोड़ों की साइबर ठगी की चेन का हिस्सा बनते जा रहे हैं।
