रायगढ़ जेल में फिर कैदी की मौत: तीन दिन पहले आबकारी मामले में गया था जेल, पिता का आरोप पैसे लेकर दूसरे को छोड़ा मेरे बेटे को मार डाला

रायगढ़ जेल में फिर कैदी की मौत: तीन दिन पहले आबकारी मामले में गया था जेल, पिता का आरोप पैसे लेकर दूसरे को छोड़ा मेरे बेटे को मार डाला

रायगढ़। रायगढ़ जिला जेल एक बार फिर विवादों में है। शराब तस्करी के आरोप में जेल भेजे गए एक विचाराधीन बंदी संजय बघेल की मेडिकल कॉलेज अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। इस घटना के बाद अस्पताल परिसर में परिजनों और ग्रामीणों ने जमकर हंगामा किया। परिजनों का सीधा आरोप है कि जेल के भीतर संजय के साथ बर्बरतापूर्वक मारपीट की गई है जिससे उसकी जान गई। पुलिस ने सुरक्षा के लिहाज से अस्पताल में भारी बल तैनात कर दिया है। यह एक महीने के भीतर रायगढ़ जेल में किसी बंदी की मौत का दूसरा मामला है। लगातार हो रही इन घटनाओं ने जेल प्रशासन की सुरक्षा और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

परिजनों का आरोप: पैसे लेकर एक को छोड़ा, हमारे बेटे को फंसाया
मृतक संजय बघेल के पिता ने पुलिस और आबकारी विभाग की कार्रवाई पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। पिता का कहना है कि जिस दिन पुलिस ने उनके बेटे को पकड़ा था, उसी दिन एक अन्य युवक को भी हिरासत में लिया गया था। आरोप है कि पुलिस ने उस युवक से सांठगांठ की और पैसे लेकर उसे छोड़ दिया, जबकि उनके बेटे संजय पर केस दर्ज कर उसे जेल भेज दिया।

परिजनों ने पुलिस की इस कार्रवाई को धारा 420 यानी धोखाधड़ी और पक्षपात का मामला बताते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि संजय पूरी तरह स्वस्थ था। जेल जाने के महज तीन दिन के भीतर उसकी मौत होना साफ इशारा करता है कि सच को छुपाया जा रहा है।

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शव देखने के लिए घंटों करना पड़ा इंतजार
मौत की खबर मिलने के बाद अस्पताल पहुंचे परिजनों का गुस्सा तब और भड़क गया जब उन्हें कई घंटों तक संजय का शव नहीं दिखाया गया। परिवार वालों का कहना है कि जेल प्रबंधन और अस्पताल प्रशासन मामले को दबाने की कोशिश कर रहे हैं। ग्रामीणों के बढ़ते आक्रोश और तनावपूर्ण माहौल को देखते हुए अस्पताल परिसर में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करना पड़ा।

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बीमार बेटी के इलाज के लिए जुटा रहा था पैसे
इस पूरी घटना का सबसे दुखद पहलू यह है कि संजय बघेल अपने घर का इकलौता कमाने वाला सदस्य था। उस पर अपनी दो छोटी बेटियों और बुजुर्ग माता पिता की जिम्मेदारी थी। परिजनों ने बताया कि संजय की एक छोटी बेटी के दिल में छेद है। वह दिन रात मेहनत करके अपनी बेटी के इलाज के लिए पैसे जुटाने की कोशिश में लगा हुआ था। संजय की मौत के बाद अब इस गरीब परिवार के सामने भरण पोषण और बीमार बच्ची के इलाज का बड़ा संकट खड़ा हो गया है।

न्यायिक जांच की मांग
पिछले महीने भी रायगढ़ जेल के एक बंदी की अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हुई थी। उस वक्त भी परिजनों ने जेल प्रताड़ना और लापरवाही के आरोप लगाए थे। लगातार दूसरे मामले ने प्रशासन को बैकफुट पर ला दिया है। पीड़ित परिवार अब पूरे मामले की न्यायिक जांच और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग कर रहा है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद आगे की कार्रवाई की बात कही है।

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