सिरगिट्टी में बच्चियों से शोषण थानेदार पर समझौते का दबाव बनाने का आरोप एसएसपी के दखल के बाद अलग अलग एफआईआर दर्ज
बिलासपुर शहर का सिरगिट्टी इलाका इन दिनों अपराध का बड़ा गढ़ बनता जा रहा है। यहां अपराधियों के हौसले बुलंद हैं। कुछ ही दिन पहले एक फल कारोबारी की हत्या हुई थी। उसके बाद एक स्कूली छात्रा का चाकू की नोक पर अपहरण और अनाचार हुआ। अब इसी इलाके से दो मासूम नाबालिग बच्चियों के दैहिक शोषण का एक और सनसनीखेज मामला सामने आया है। लेकिन इस घटना से भी ज्यादा डराने वाली बात सिरगिट्टी पुलिस का रवैया है।
जब कोई गरीब न्याय मांगने थाने जाता है तो उसे पुलिस का असली चेहरा देखने को मिलता है। ऐसा ही कुछ पीड़ित बच्चियों की मां के साथ हुआ। अपनी बच्चियों के साथ हुई दरिंदगी की शिकायत लेकर एक बेबस मां सिरगिट्टी थाने पहुंची थी। उसे उम्मीद थी कि खाकी वर्दी वाले अपराधियों को सलाखों के पीछे डालेंगे। लेकिन थानेदार साहब का इंसाफ करने का तरीका कुछ अलग ही था।
पीड़िता की मां ने जो आरोप लगाए हैं वह पूरी पुलिस व्यवस्था पर सीधा तमाचा हैं। थानेदार और दो पुलिसकर्मियों ने न्याय करने की जगह मां पर ही समझौते का भारी दबाव डालना शुरू कर दिया। इतना ही नहीं जब मां ने समझौता करने से मना किया तो उसे धक्के मारकर थाने से बाहर कर दिया गया। वहीं दूसरी तरफ आरोपी की मां को थाने में पूरा सम्मान दिया जा रहा था। उसे पुलिसकर्मियों ने बाइज्जत कुर्सी पर बिठा रखा था।
सिरगिट्टी के थानेदार का यह अंदाज कई सवाल खड़े करता है। क्या न्याय अब सांठगांठ से तय होगा। क्या थानेदार अब यह तय करेंगे कि किसका मुकदमा दर्ज होगा और किसे थाने से बाहर खदेड़ा जाएगा। एक बेबस मां को डराकर भगाना पुलिस की कौन सी बहादुरी है। रक्षक जब खुद इस तरह का व्यवहार करने लगें तो आम जनता सुरक्षा के लिए कहां जाएगी।
आखिरकार जब थाने से न्याय नहीं मिला तो वह मां सीधे पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंच गई। वहां उसने मीडिया के सामने थानेदार की सारी पोल खोल दी। उसने साफ बताया कि कैसे सिरगिट्टी पुलिस ने उसे प्रताड़ित किया और आरोपियों को बचाने का प्रयास किया।
मामला बिलासपुर के एसएसपी और डीआईजी रजनेश सिंह तक पहुंचा। उन्होंने तुरंत एडिशनल एसपी पंकज पटेल को अपने पास बुलाया। उन्हें निर्देश दिया कि पीड़ित महिला और उसकी बच्चियों से पूरी जानकारी ली जाए। करीब पौन घंटे तक एडिशनल एसपी ने उनकी पीड़ा सुनी और बयान दर्ज किया।
इसके बाद एसएसपी रजनेश सिंह का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने तुरंत सिरगिट्टी थानेदार को फोन घुमाया और उनकी जमकर क्लास लगाई। सिरगिट्टी पुलिस की एक और बड़ी लापरवाही सामने आई थी। बच्चियां दो थीं और दोनों के साथ अलग अलग घटनाएं हुई थीं। इसके बावजूद थानेदार ने काम निपटाने के लिए दोनों मामलों की सिर्फ एक ही एफआईआर दर्ज कर ली थी।
एसएसपी ने थानेदार से सीधा जवाब मांगा कि जब घटनाएं दो हैं तो एफआईआर एक क्यों की गई। थानेदार साहब के पास आला अधिकारी के इस सवाल का कोई जवाब नहीं था। एसएसपी ने तत्काल प्रभाव से दोनों घटनाओं की अलग अलग एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया। साथ ही दोनों पीड़ित बच्चियों का फिर से मेडिकल परीक्षण कराने का सख्त निर्देश भी दिया गया। यह परीक्षण दो महिला विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम करेगी ताकि जांच में कोई कमी न रह जाए।
इस मामले में बताया जा रहा है कि आरोपी भी नाबालिग है जिसे अब पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। सबसे अहम बात यह है कि एसएसपी ने थानेदार और दोनों पुलिसकर्मियों पर लगे संगीन आरोपों की जांच के आदेश दे दिए हैं।
सिरगिट्टी थानेदार साहब को अब शायद यह समझ आ गया होगा कि खाकी का रौब गरीब जनता पर तो चल सकता है लेकिन जब आला अधिकारी हकीकत देखते हैं तो सारी हेकड़ी निकल जाती है। अब पूरे शहर की नजर इस बात पर है कि एक न्याय मांगने आई बेबस मां को जलील करने वाले इन वर्दी वालों पर आगे क्या ठोस कार्रवाई होती है। एसएसपी के दखल के बाद पीड़ित परिवार को न्याय मिलने की कुछ उम्मीद जरूर जगी है।
