नकली टॉपर्स पर न्याय की मार: 2008 बोर्ड परीक्षा कांड में 5 दोषियों को जेल
रायपुर। छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल (CGBSE) की वर्ष 2008 की 12वीं बोर्ड परीक्षा से जुड़े बहुचर्चित नकल और फर्जीवाड़ा कांड में जिला अदालत ने कड़ा और मिसाल कायम करने वाला फैसला सुनाया है। अदालत ने कथित टॉपर पोरा बाई समेत पांच आरोपियों को दोषी ठहराते हुए सभी को पांच वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही प्रत्येक दोषी पर पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। जुर्माना अदा नहीं करने की स्थिति में तीन माह की अतिरिक्त सजा भुगतने के आदेश दिए गए हैं।
अदालत ने सभी आरोपियों को भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 420/120-बी, 467/120-बी, 468/120-बी और 471/120-बी के तहत दोषी ठहराया। फैसले में कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि यह अपराध व्यक्तिगत नहीं, बल्कि एक सुनियोजित और संगठित साजिश का परिणाम था, जिसका उद्देश्य परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को छलपूर्वक प्रभावित करना था। न्यायालय ने आदेश दिया कि सभी सजाएं एक साथ चलेंगी।
जेल में बिताई अवधि सजा में समायोजित
कोर्ट ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 428 के तहत विचारण अवधि के दौरान आरोपियों द्वारा जेल में बिताए गए समय को सजा में समायोजित करने के निर्देश भी दिए हैं। रिकॉर्ड के अनुसार, पोरा बाई ने 25 अगस्त 2008 से 7 फरवरी 2009 तक 167 दिन, फूलसाय ने 15 दिसंबर 2009 से 5 मार्च 2010 तक 81 दिन, शिवलाल जाटव ने 27 मार्च 2009 से 20 नवंबर 2009 तक 238 दिन और दीपक सिंह जाटव ने 27 मार्च 2009 से 26 सितंबर 2009 तक 184 दिन न्यायिक अभिरक्षा में बिताए थे। इन अवधियों के पृथक-पृथक प्रमाण पत्र तैयार करने के भी आदेश दिए गए हैं।
जब्त दस्तावेज सुरक्षित रखने के निर्देश
न्यायालय ने प्रकरण से संबंधित सभी जब्त सामग्री केंद्राध्यक्ष की नियुक्ति आदेश, सील, विभिन्न रजिस्टर, परीक्षा से जुड़े दस्तावेज, उत्तरपुस्तिकाएं, उपस्थिति पत्रक, बैठक व्यवस्था विवरण, स्टॉक रजिस्टर और अन्य महत्वपूर्ण अभिलेख को रिकॉर्ड के साथ सुरक्षित रखने का निर्देश दिया है। अपील की स्थिति में इन सामग्रियों का निपटारा माननीय अपीलीय न्यायालय के आदेशानुसार किया जाएगा। इस फैसले को शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और अनुशासन के लिहाज से एक महत्वपूर्ण नजीर माना जा रहा है।
