- Hindi News
- छत्तीसगढ़
- शिक्षा विभाग में खेला: दो बहनों में बांट दी दो अनुकंपा नियुक्तियां, अधिकारियों पर महीना वसूली का आरो...
शिक्षा विभाग में खेला: दो बहनों में बांट दी दो अनुकंपा नियुक्तियां, अधिकारियों पर महीना वसूली का आरोप
बिलासपुर। जिले में शिक्षा विभाग में अनुकंपा नियुक्ति के नाम पर बड़ा फर्जीवाड़ा देखने को मिला है विभाग द्वारा नियमों को ताक पर रखकर एक ही परिवार की दो बहनों को नौकरी दे दी गई। कांग्रेस और पूर्व जिला पंचायत सदस्य अंकित गौराहा ने इस पूरे मामले को संगठित भ्रष्टाचार बताते हुए कमिश्नर से लिखित शिकायत की है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) विजय टांडे और बाबू सुनील यादव की मिलीभगत से विभाग में अवैध नियुक्तियों और तबादलों का काला खेल चल रहा है। गौराहा ने चेतावनी दी है कि यदि इस मामले की जांच निष्पक्ष नहीं हुई तो वे सीधे सचिव स्तर पर शिकायत करेंगे और सड़क पर उतरकर उग्र आंदोलन करेंगे।
नियमों की धज्जियां: एक मौत पर दो नौकरियां
अंकित गौराहा ने बताया कि विभाग में पदस्थ एक मृत कर्मचारी के परिवार में नियमों के विरुद्ध जाकर दो लोगों को अनुकंपा नियुक्ति दी गई। सरकारी नियम के मुताबिक परिवार के केवल एक सदस्य को ही यह पात्रता होती है। शिकायत में दावा किया गया है कि पहले मृत कर्मचारी की पहली पत्नी के बेटे यश साहू को नियुक्ति दी गई और फिर मोटी रकम के लेनदेन के बाद दूसरी पत्नी के बेटे को भी नौकरी पर रख लिया गया। इस पूरे खेल में बाबू सुनील यादव का नाम प्रमुखता से सामने आ रहा है जो स्थापना शाखा में सालों से जमे हुए हैं।
महीने की बंधी है वसूली: टीचर से 10 हजार तो चपरासी से 2 हजार
प्रेस कॉन्फ्रेंस में लगाए गए आरोप विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हैं। गौराहा ने दावा किया कि दफ्तर में पदस्थ कर्मचारियों से हर महीने अवैध वसूली की जाती है।
शिक्षकों से 10 हजार रुपए लिए जाते हैं।
बाबूओं से 5 हजार रुपए की मांग होती है।
चपरासियों से भी 2 हजार रुपए हर महीने वसूले जाते हैं।
यह पैसा मनचाही पोस्टिंग, संलग्नीकरण और प्रमोशन के नाम पर लिया जा रहा है। आलम यह है कि शहर के स्कूलों में शिक्षकों की कमी है लेकिन रसूख और पैसे के दम पर कई कर्मचारी दफ्तरों में वीआईपी ड्यूटी कर रहे हैं।
जांच का नाटक: आरोपी अफसर ही कर रहे हैं फैसला
शिकायतकर्ता का कहना है कि जब जिला शिक्षा अधिकारी विजय टांडे खुद इस पूरे मामले में संदेह के घेरे में हैं, तो उनके ही अधीन काम करने वाले दो खंड शिक्षा अधिकारियों (BEO) से जांच कराना केवल खानापूर्ति है। लोक शिक्षण संचालनालय की पिछली जांच में भी सुनील यादव को दोषी पाया गया था, लेकिन राजनीतिक रसूख और अफसरों के संरक्षण के चलते उन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। गौराहा ने मांग की है कि जांच ज्वाइंट डायरेक्टर या कमिश्नर स्तर के अधिकारियों से कराई जाए ताकि सच सामने आ सके।
अंकित गौराहा ने कहा कि शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार की अंदर तक हैं। यदि प्रशासन ने जल्द इन भ्रष्ट चेहरों पर नकेल नहीं कसेगा तो प्रदेश स्तर पर आंदोलन किया जाएगा
लेखक के विषय में
मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।
