बस्तर में पीलिया से बढ़ी चिंता: अस्पताल खाली, झाड़-फूंक केंद्रों में उमड़ रही भीड़; देसी इलाज पर भरोसा बना खतरा

बस्तर में पीलिया से बढ़ी चिंता: अस्पताल खाली, झाड़-फूंक केंद्रों में उमड़ रही भीड़; देसी इलाज पर भरोसा बना खतरा

जगदलपुर। बस्तर संभाग में पीलिया के बढ़ते मामलों के बीच स्वास्थ्य व्यवस्था और लोगों की सोच को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। एक ओर स्वास्थ्य विभाग दूषित पानी और जलजनित बीमारियों से बचाव के लिए जागरूकता अभियान चलाने का दावा कर रहा है, वहीं दूसरी ओर बड़ी संख्या में लोग अब भी अस्पतालों की बजाय झाड़-फूंक और पारंपरिक देसी उपचार का सहारा ले रहे हैं। हालत यह है कि सरकारी अस्पतालों में पीलिया के मरीज बेहद कम पहुंच रहे हैं, जबकि शहर से लगे आड़ावाल क्षेत्र में देसी इलाज केंद्रों के बाहर लंबी कतारें दिखाई दे रही हैं।

महारानी जिला अस्पताल प्रबंधन के अनुसार रोजाना सिर्फ एक-दो मरीज ही पीलिया के इलाज के लिए अस्पताल पहुंच रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि बीमारी का सबसे बड़ा कारण दूषित पेयजल है और संक्रमित इलाकों की पहचान कर स्वास्थ्य जांच अभियान चलाया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने नगर निगम के साथ मिलकर उन क्षेत्रों को चिन्हित करना शुरू किया है, जहां पाइपलाइन और नालियों के संपर्क में आने से पानी प्रदूषित हो रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर इलाज और साफ पानी की उपलब्धता से इस बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है।

नगर निगम ने भी स्वीकार किया है कि शहर के कई इलाकों में दूषित पानी की शिकायतें सामने आई हैं। कई जगह पेयजल पाइपलाइनें गंदे नालों के बीच से गुजर रही हैं, जिससे संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ गया है। दलपत सागर और आसपास के इलाकों में टैंकरों से पानी सप्लाई किया जा रहा है और पाइपलाइन सुधार कार्य जारी होने का दावा किया गया है। लेकिन इन व्यवस्थाओं के बावजूद लोगों का भरोसा आधुनिक चिकित्सा व्यवस्था पर कमजोर पड़ता नजर आ रहा है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग देसी उपचार केंद्रों का रुख कर रहे हैं।

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स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि झाड़-फूंक और अंधविश्वास के कारण कई मरीज गंभीर स्थिति में अस्पताल पहुंचते हैं, जिससे इलाज मुश्किल हो जाता है। डॉक्टरों के मुताबिक, पीलिया जैसी बीमारी में देर से उपचार लेने पर लीवर और शरीर के अन्य अंगों पर गंभीर असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि बिना वैज्ञानिक इलाज के केवल देसी नुस्खों पर निर्भर रहना जानलेवा साबित हो सकता है।

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सिविल सर्जन डॉ. संजय प्रसाद ने लोगों से अपील की है कि पीलिया के शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर तुरंत नजदीकी अस्पताल में जांच कराएं। उन्होंने कहा कि गर्मी के मौसम में जलजनित रोग तेजी से फैलते हैं और दूषित पानी सबसे बड़ा कारण बनता है। डॉक्टरों ने साफ पानी पीने, बाहर के कटे फल और अस्वच्छ भोजन से बचने तथा समय पर इलाज लेने की सलाह दी है। स्वास्थ्य विभाग अब लोगों को अंधविश्वास से बाहर निकालकर वैज्ञानिक उपचार की ओर जागरूक करने के लिए विशेष अभियान चलाने की तैयारी में है।

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