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UPDATE ...जीएसटी की दबिश के बाद 7 करोड़ सरेंडर अनिल सिंह GST छापे मामले में जांच जारी
बिलासपुर। राजनीति की आड़ में कोयले का अवैध कारोबार करने वाले रसूखदारों पर अब सरकार की नजरे तेज हो गई है। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष धरमलाल कौशिक के करीबी और पूर्व विधायक प्रतिनिधि अनिल सिंह इन दिनों जीएसटी विभाग के शिकंजे में हैं। बताया जा रहा है कि कोयले की हेराफेरी और करोड़ों की टैक्स चोरी के मामले में जीएसटी की टीम ने तीन दिन पहले उनके ठिकानों पर छापा मारा था। इस कठोर कार्रवाई के बाद 7 करोड रुपए सरेंडर करने की जानकारी मिली है। फिलहाल जीएसटी विभाग पूरे मामले की जांच कर रहा है जल्द ही मामला न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा
हाफा रोड के कोल डिपो में मिला बड़ा घालमेल
जीएसटी विभाग की टीम ने अनिल सिंह के हाफा रोड स्थित तिवारी पारा कोल डिपो सहित अन्य ठिकानों पर छापा मार कार्यवाही की थी। इस दौरान जीएसटी विभाग को कोयले के स्टॉक और कागजों के मिलान में करोड़ों का अंतर मिला है। विभाग ने कथित तौर पर 10 करोड़ रुपये सरेंडर करने को कहा है, लेकिन भाजपा नेता ने इसे देने से इनकार कर दिया था लेकिन विभाग की सख्ती के बाद 7करोड़ सरेंडर कर दिए यह पहली बार नहीं है, इससे पहले बिलासपुर के महावीर कोल वाशरी पर भी इसी तरह की बड़ी कार्रवाई हो चुकी है । रतनपुर में भी इसी तरह की कार्रवाई की गई है। वहीं कुछ कॉल डिपो को हटाने का भी फरमान सरकार ने जारी किया है।
नेताओं के फोन भी रहे बेअसर, विभाग ने नहीं दी ढील
जब भाजपा के मंडल कोषाध्यक्ष स्तर के नेता पर गाज गिरी, तो बचाने के लिए सफेदपोशों के फोन भी घनघनाने लगे। विश्वस्त सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कुछ नेताओं ने अधिकारियों को फोन कर मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की, लेकिन जीएसटी विभाग के अफसरों ने साफ कह दिया कि टैक्स चोरी के मामले में कोई समझौता नहीं होगा। कोयले के इस कारोबार में सालों से चल रही हेराफेरी की परतें अब एक-एक कर खुलने लगी हैं।
कोयले की दलाली में हाथ काले होना तय
बिलासपुर और आसपास के इलाकों में कोल वॉशरी और डिपो के नाम पर टैक्स चोरी का खेल पुराना है। रसूखदार नेता अक्सर अपनी पहुंच का फायदा उठाकर अधिकारियों को दबाने की कोशिश करते हैं, लेकिन इस बार मामला दिल्ली तक की रिपोर्ट से जुड़ा बताया जा रहा है।
डिस्क्लेमर: यह खबर सूत्रों से मिली जानकारी और शुरुआती जांच के तथ्यों पर आधारित है। विभाग की ओर से अभी अंतिम रिपोर्ट आना बाकी है। किसी भी व्यक्ति पर आरोप सिद्ध होना कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है।तथ्यों पर आधारित है। विभाग की ओर से अभी अंतिम रिपोर्ट आना बाकी है। किसी भी व्यक्ति पर आरोप सिद्ध होना कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है।
लेखक के विषय में
मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।
