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बायोमेट्रिक लेकर राशन गायब! आरंग की उचित मूल्य दुकान में 500 क्विंटल से ज्यादा अनाज का खेल उजागर
आरंग। सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत गरीब परिवारों तक राशन पहुंचाने की जिम्मेदारी जहां भरोसे का आधार होती है, वहीं ग्राम पंचायत नारा की शासकीय उचित मूल्य दुकान में कथित गड़बड़ी ने इस भरोसे को गहरा झटका दिया है। ग्रामीणों के आरोप हैं कि दुकान के सेल्समैन रामलाल रात्रे ने करीब 300 हितग्राहियों का बायोमेट्रिक सत्यापन तो कराया, लेकिन उन्हें राशन नहीं दिया। मामला सामने आने के बाद खाद्य विभाग की जांच में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं के संकेत मिले हैं।
‘अंगूठा लगाओ, राशन बाद में’, तीन महीनों से चलता रहा खेल
ग्रामीणों के अनुसार, पिछले तीन महीनों से सेल्समैन हितग्राहियों का अंगूठा मशीन पर लगवाकर रिकॉर्ड में वितरण “पूर्ण” दिखाता रहा। जब राशन की मांग की जाती, तो यह कहकर टाल दिया जाता कि ऊपर से आपूर्ति नहीं आई है। महीना दर महीना बीतता गया, लेकिन लाभार्थियों को खाली हाथ लौटना पड़ा। ग्रामीणों का दावा है कि इस प्रक्रिया से रिकॉर्ड में वितरण दर्शाकर वास्तविक स्टॉक का गबन किया गया।
औचक निरीक्षण में खुली परतें, सेल्समैन फरार
लगातार शिकायतों के बाद खाद्य निरीक्षक पुष्पा चौधरी ने दुकान का औचक निरीक्षण और स्टॉक ऑडिट किया। निरीक्षण के दौरान सेल्समैन मौके पर नहीं मिला। दुकान बंद होने के कारण ताला कटर मशीन से काटकर जांच शुरू की गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, दिसंबर और जनवरी माह के लिए नागरिक आपूर्ति निगम से प्राप्त आवंटन कागजों में वितरित दर्शाया गया है, जबकि भौतिक स्टॉक में भारी कमी पाई गई। दुकान क्रमांक 442003103 के लिए 495.94 क्विंटल चावल, 16.39 क्विंटल शक्कर और 16.22 क्विंटल नमक का आवंटन दर्ज है। निरीक्षण के समय चावल का स्टॉक नगण्य या अनुपस्थित बताया गया।
प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि इतनी बड़ी मात्रा में राशन की कथित हेराफेरी बिना उच्चस्तरीय निगरानी की कमी के संभव नहीं। कई महीनों से शिकायतों के बावजूद कार्रवाई में देरी ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न खड़े किए हैं। खाद्य विभाग के सूत्रों के मुताबिक, मामले में आवश्यक वस्तु अधिनियम सहित गबन से संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। जांच रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को सौंपी जाएगी, जिसके बाद निलंबन और आपराधिक कार्रवाई पर निर्णय लिया जाएगा।
हितग्राहियों की मांग, राशन और न्याय दोनों
पीड़ित परिवारों का कहना है कि उन्हें तत्काल बकाया राशन दिया जाए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को बाध्य होंगे। फिलहाल, जांच जारी है और प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी, ताकि सार्वजनिक वितरण प्रणाली में पारदर्शिता और विश्वास बहाल किया जा सके।
लेखक के विषय में
मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।
