रतनपुर महामाया मंदिर कुंड में फिर हुई कछुओं की मौत प्रशासन की लापरवाही से बेजुबानों ने तोड़ा दम

रतनपुर महामाया मंदिर कुंड में फिर हुई कछुओं की मौत प्रशासन की लापरवाही से बेजुबानों ने तोड़ा दम

बिलासपुर। रतनपुर के मशहूर मां महामाया मंदिर के पवित्र कुंड में शुक्रवार शाम को एक बार फिर कछुओं की जान चली गई। आस्था के इस बड़े केंद्र में चार कछुए मृत अवस्था में मिले जिससे पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। हैरानी की बात यह है कि पिछले साल भी इसी कुंड में 30 कछुओं की मौत हुई थी लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने इससे कोई सबक नहीं सीखा। शुक्रवार शाम करीब 7 बजे जब श्रद्धालु मंदिर दर्शन के लिए पहुंचे तो उन्होंने कुंड के पानी में कछुओं को उतराते देखा और तुरंत मंदिर प्रबंधन को इसकी खबर दी।

सूचना मिलते ही रतनपुर वन परिक्षेत्राधिकारी अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और मृत कछुओं को पानी से बाहर निकाला। वन विभाग की टीम ने कछुओं के शवों को कब्जे में लेकर इसकी जानकारी अपने बड़े अधिकारियों को दी। जांच में सामने आया है कि मरने वाले कछुओं में एक की उम्र करीब 3 से 4 साल है जबकि बाकी तीन कछुए महज 1 से डेढ़ साल के थे। आस्था के नाम पर कछुओं को पालने वाले इस मंदिर में सुरक्षा के इंतजाम अब सवालों के घेरे में हैं।

कानन पेंडारी जू के वन्य प्राणी विशेषज्ञ डॉक्टर पीके चंदन ने मृत कछुओं का पोस्टमार्टम किया। डॉक्टर पीके चंदन ने बताया कि शुरुआती जांच में कछुओं के शरीर पर अंदरूनी चोटें मिली हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक कछुओं के निचले हिस्से पर 8 से 10 दिन पुराने जख्म के निशान हैं जो बताते हैं कि वे पिछले कई दिनों से दर्द में थे। वन विभाग ने फिलहाल बिसरा सुरक्षित रख लिया है जिसे गहन जांच के लिए लैब भेजा जा रहा है।

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ठीक एक साल पहले इसी कुंड में जाल बिछाने की वजह से 30 कछुओं की तड़पकर मौत हो गई थी। उस वक्त वन विभाग और मंदिर प्रबंधन ने सुरक्षा के बड़े-बड़े दावे किए थे लेकिन वे सारे वादे अब खोखले नजर आ रहे हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि मंदिर का यह पवित्र कुंड अब धीरे-धीरे बेजुबानों के लिए कब्रगाह बनता जा रहा है और प्रशासन सिर्फ पोस्टमार्टम की कागजी कार्रवाई तक सीमित है। स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर काफी नाराजगी है कि आखिर बार-बार ऐसी घटनाएं क्यों हो रही हैं और असली गुनहगारों पर कार्रवाई कब होगी।

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