हाईकोर्ट बार चुनाव: अब महिलाओं का होगा 33 फीसदी कब्जा, सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर बदली चुनाव की तस्वीर

रोटेशन पॉलिसी से सबसे पावरफुल पद पर काबिज हो सकेगीं महिलाएं

images (1) राष्ट्रीय जगत विजन। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की राजनीति अब पूरी तरह बदलने वाली है। हाईकोर्ट बार के आगामी चुनावों में अब महिला वकीलों का दबदबा देखने को मिलेगा। सुप्रीम कोर्ट के सख्त आदेश के बाद बार एसोसिएशन की कार्यकारिणी में महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण लागू कर दिया गया है। वरिष्ठ अधिवक्ता सतीश चंद्र वर्मा की ओर से रजिस्ट्रार जनरल को लिखे पत्र के बाद हाईकोर्ट प्रशासन ने नई अधिसूचना जारी की है, जिसमें उपाध्यक्ष और सचिव जैसे महत्वपूर्ण पदों समेत कार्यकारिणी की सीटों को महिलाओं के लिए आरक्षित कर दिया गया है।

दिल्ली से आया फरमान महिलाओं की भागीदारी बढ़ानी होगी

 सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल योगमाया एम.जी. बनाम भारत संघ और सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन से जुड़े मामलों में साफ कहा था कि बार की लीडरशिप में महिलाओं की भागीदारी बढ़ानी होगी। वरिष्ठ अधिवक्ता सतीश चंद्र वर्मा ने इन्हीं आदेशों का हवाला देते हुए मांग की थी कि छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट बार में केवल पुरुषों का राज नहीं होना चाहिए। उन्होंने तर्क दिया था कि प्रतिनिधित्व न मिलने से महिला वकीलों की समस्याएं अनसुनी रह जाती हैं। इसके बाद 27 जनवरी को जारी संशोधित अधिसूचना में कई पदों पर महिलाओं के लिए रिजर्व का ठप्पा लगा दिया गया है।

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उपाध्यक्ष, सह-सचिव सहित कई पद महिलाओं के लिए आरक्षित

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जारी अधिसूचना के अनुसार, इस बार का चुनाव दिलचस्प होगा क्योंकि मुकाबला अब बराबरी का है।

उपाध्यक्ष (महिला): 15 साल की वकालत का अनुभव रखने वाली महिला वकील ही इस पर लड़ सकेंगी।

 सह-सचिव (महिला): इसके लिए 10 साल का वकालत अनुभव तय किया गया है।

 क्रीड़ा एवं सांस्कृतिक सचिव (महिला): इस पद पर भी केवल महिला उम्मीदवारों का कब्जा रहेगा।

 कार्यकारिणी सदस्य: कुल सदस्यों में से 2 पद विशेष रूप से महिलाओं के लिए सुरक्षित कर दिए गए हैं।

 

रोटेशन पॉलिसी से टूटेगा टोकनिज्म, हर पद पर मिलेगा मौका

वरिष्ठ वकील सतीश चंद्र वर्मा ने बताया कि यह केवल नाम के लिए आरक्षण नहीं है। सुप्रीम कोर्ट का निर्देश है कि आरक्षण रोटेशन के आधार पर हो। यानी आज जो पद आरक्षित है, अगली बार वह पद सामान्य होगा और कोई दूसरा पद महिलाओं के लिए सुरक्षित किया जाएगा। इससे यह फायदा होगा कि आने वाले समय में महिला वकील अध्यक्ष और सचिव जैसे सबसे पावरफुल पदों पर भी काबिज हो सकेंगी। वर्मा ने अपनी चि_ी में साफ कहा था कि यदि चुनाव में पर्याप्त महिलाएं नहीं आतीं, तो उन्हें मनोनीत (को-ऑप्शन) करने की व्यवस्था भी रखनी होगी ताकि कोटा खाली न रहे।

महिला वकीलों में उत्साह, वोट के साथ पद की भी होगी ताकत 

हाईकोर्ट में प्रैक्टिस करने वाली महिला अधिवक्ताओं ने इस फैसले का स्वागत किया है। उनका कहना है कि बार में महिलाओं की संख्या तो लगातार बढ़ रही थी, लेकिन फैसले लेने वाली कमेटियों में उन्हें जगह नहीं मिलती थी। अब जब उनके पास वोट और पद दोनों की ताकत होगी, तो बार रूम की सुविधाओं से लेकर वकालत में आने वाली दिक्कतों तक, हर मुद्दे पर प्रभावी ढंग से बात रखी जा सकेगी। कानूनी जानकारों का मानना है कि इस कदम से छत्तीसगढ़ का बार अब देश के सबसे प्रगतिशील संस्थानों में गिना जाएगा।

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