‘लाल आतंक’ पर करारा प्रहार: बीजापुर में डीवीसीएम-एसीएम समेत 12 नक्सलियों ने हथियार डालकर किए आत्मसमर्पण
बीजापुर। छत्तीसगढ़ में नक्सल विरोधी अभियान को एक और बड़ी कामयाबी मिली है। सुरक्षाबलों की लगातार कार्रवाई और सरकार की पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर डीवीसीएम और एसीएम स्तर के कमांडरों सहित कुल 12 नक्सलियों ने हथियारों के साथ आत्मसमर्पण किया है। यह आत्मसमर्पण 5 फरवरी को बीजापुर में किया गया, जिसे ‘लाल आतंक’ के खिलाफ बड़ी रणनीतिक सफलता माना जा रहा है।
जवानों के साथ दो गाड़ियों में पहुंचे नक्सली
आत्मसमर्पण करने वाले सभी 12 नक्सली सुरक्षाबलों के जवानों के साथ दो वाहनों में सवार होकर बीजापुर एसपी कार्यालय पहुंचे, जहां उन्होंने औपचारिक रूप से हथियार और गोला-बारूद सौंपा। इस दौरान पुलिस और केंद्रीय बलों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
कई कुख्यात नक्सली भी शामिल
सरेंडर करने वालों में संगठन के सक्रिय और प्रभावशाली चेहरे भी शामिल हैं
- सोमडु मड़काम (डीवीसीएम) — एके-47 राइफल के साथ
- चमन लाल उर्फ छोटू (एसीएम) — एसएलआर राइफल के साथ
- सन्ना माड़वी (पार्टी सदस्य) — एसएलआर राइफल के साथ
इनके अलावा अन्य नक्सलियों ने भी हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का संकल्प लिया है।
सुकमा में नक्सलियों की बड़ी साजिश नाकाम
इसी बीच सुकमा जिले में भी सुरक्षाबलों को अहम सफलता मिली है। सीआरपीएफ 74वीं बटालियन और कोबरा 201 की संयुक्त टीम ने नक्सलगढ़ गोगुंडा क्षेत्र में एरिया डोमिनेशन के दौरान नक्सलियों का हथियार और विस्फोटक डंप बरामद किया। गोगुंडा पहाड़ियों के दूसरे छोर पर करीब 5 किलोग्राम वजनी शक्तिशाली बम मिला, जिसे बम निरोधक दस्ते ने मौके पर ही सुरक्षित तरीके से निष्क्रिय कर दिया।
बढ़ता दबाव, टूटता नक्सली नेटवर्क
गौरतलब है कि एक दिन पहले ही सुरक्षाबलों ने माओवादी लीडर रमन्ना के स्मारक को ध्वस्त किया था। लगातार हो रही इन कार्रवाइयों से नक्सली संगठनों में घबराहट साफ देखी जा रही है और उनका नेटवर्क कमजोर पड़ता जा रहा है।
‘इलाके को भयमुक्त बनाना लक्ष्य’, सीआरपीएफ
इस कार्रवाई पर सीआरपीएफ कमांडेंट हिमांशु पांडे ने कहा कि सुरक्षाबलों का उद्देश्य केवल नक्सलियों पर कार्रवाई करना नहीं, बल्कि इलाके को स्थायी रूप से भयमुक्त बनाना है। उन्होंने कहा कि वर्षों से खौफ में जी रहे ग्रामीणों में अब भरोसा लौट रहा है और गोगुंडा की पहाड़ियों में शांति और विकास की नई उम्मीद जगी है।
