प्रमोशन पर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: अब सिर्फ सीनियर होना काफी नहीं, अच्छा रिकॉर्ड भी जरूरी

प्रमोशन पर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: अब सिर्फ सीनियर होना काफी नहीं, अच्छा रिकॉर्ड भी जरूरी

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों की पदोन्नति को लेकर एक महत्वपूर्ण व्यवस्था दी है। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि प्रमोशन के लिए केवल वरिष्ठ होना ही काफी नहीं है, बल्कि विभाग की चयन समिति यानी डीपीसी को अधिकारी के कामकाज और पिछले रिकॉर्ड के आधार पर न्यूनतम मानक तय करने का पूरा अधिकार है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस प्रार्थ प्रतीम साहू की डिवीजन बेंच ने यह फैसला उद्यानिकी विभाग के एक अधिकारी की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुनाया। इस फैसले के बाद अब सरकारी विभागों में पदोन्नति के लिए कर्मचारियों को अपनी गोपनीय चरित्रावली यानी एसीआर ग्रेडिंग को बेहतर बनाए रखना अनिवार्य होगा।

क्या है पूरा मामला: सीनियर रह गया पीछे, जूनियर को मिली कुर्सी

उद्यानिकी विभाग में पदस्थ हुकम सिंह तोमर ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर अपने विभाग के इस फैसले को चुनौती दी थी। तोमर ने बताया कि उनसे जूनियर अधिकारी को प्रमोशन दे दिया गया, लेकिन सीनियर होने के बाद भी उन्हें पदोन्नति नहीं मिली जबकि उनका हक था। उन्होंने ये भी कहा कि उनके खिलाफ कोई विभागीय जांच या गंभीर शिकायत विचाराधीन नहीं है, इसलिए उन्हें प्रमोशन का लाभ मिलना चाहिए था। इधर राज्य सरकार ने कोर्ट में अपना जवाब प्रस्तुत कर बताया कि डीपीसी ने प्रमोशन के लिए पिछले 5 साल के रिकॉर्ड का एक मापदंड तय किया था। मगर तोमर उस मापदंड पर खरे नहीं उतरे, जबकि उनके जूनियर का रिकॉर्ड ज्यादा अच्छा पाया गया।

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दो फैसलों में फंसा पेच : डिवीजन बेंच ने दूर किया भ्रम

इस मामले में कानूनी पेच तब फंस गया जब हाई कोर्ट की दो अलग-अलग सिंगल बेंचों के फैसलों में विरोधाभास दिखा। एक फैसले में कहा गया था कि प्रमोशन के लिए केवल वरिष्ठता ही मुख्य आधार होनी चाहिए, जबकि दूसरे फैसले में समिति को मानक तय करने की छूट दी गई थी। इसी उलझन को सुलझाने के लिए मामला डिवीजन बेंच के पास भेजा गया। बेंच ने पदोन्नति नियमों का बारीकी से अध्ययन किया और व्यवस्था दी कि वरिष्ठता के साथ-साथ उपयुक्तता यानी अधिकारी की योग्यता की जांच करना भी विभाग की जिम्मेदारी है।।

डीपीसी को मिला अधिकार: 5 साल का रिकॉर्ड होगा आधार

हाई कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि चयन समिति द्वारा तय किया गया यह नियम पूरी तरह सही है कि कर्मचारी का पिछला 5 साल का रिकॉर्ड अच्छा होना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि डीपीसी को यह अधिकार है कि वह एसीआर ग्रेडिंग के आधार पर न्यूनतम अंक तय करे। अगर कोई कर्मचारी उस मानक को पूरा नहीं करता, तो उसे प्रमोशन से वंचित किया जा सकता है, भले ही वह सीनियर क्यों न हो।

चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस प्रार्थ प्रतीम साहू ने कहा कि नियमों के तहत चयन समिति को अधिकारी के रिकॉर्ड के आधार पर उसकी उपयुक्तता जांचने का अधिकार है। अब इस व्यवस्था के तय होने के बाद डिवीजन बेंच ने मामले को अंतिम फैसले के लिए वापस सिंगल बेंच को भेज दिया है।

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