मुंगेली में पुलिस व्यवस्था ‘हाफ स्ट्रेंथ’ पर: वीआईपी जिला, मगर डीएसपी से आरक्षक तक भारी कमी

मुंगेली। प्रदेश के सबसे संवेदनशील और राजनीतिक रूप से अहम जिलों में गिने जाने वाले मुंगेली में पुलिस बल की गंभीर कमी अब कानून-व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है। वीआईपी और वीवीआईपी दौरों के दबाव से जूझ रहे जिले में स्थिति यह है कि स्वीकृत पदों के मुकाबले लगभग आधा पुलिस अमला ही जमीनी स्तर पर मौजूद है।

डीएसपी स्तर पर प्रशासनिक नियंत्रण कमजोर
जिले में उप पुलिस अधीक्षक (DSP) के 5 स्वीकृत पद हैं, लेकिन वर्तमान में केवल दो डीएसपी पदस्थ हैं, जिनमें से एक मेटरनिटी लीव पर हैं। ऐसे में व्यवहारिक रूप से पूरा जिला एक ही डीएसपी के भरोसे चल रहा है, जिससे पर्यवेक्षण और निर्णय प्रक्रिया पर सीधा असर पड़ रहा है।

निरीक्षक स्तर पर भी आधे पद खाली
थानों की कमान संभालने वाले निरीक्षक (टीआई) स्तर पर हालात सबसे ज्यादा चिंताजनक बने हुए हैं। जिले में जहां 12 निरीक्षकों के पद स्वीकृत हैं, वहीं केवल 6 ही वर्तमान में पदस्थ हैं, जबकि 6 पद लंबे समय से रिक्त पड़े हैं। इसका सीधा असर यह है कि जिले के आधे से अधिक थानों और पुलिस इकाइयों में स्थायी नेतृत्व का अभाव है। नतीजतन थाना संचालन कमजोर पड़ रहा है, अपराधों की प्रभावी रोकथाम में बाधा आ रही है और विवेचना की गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं, जिससे कानून-व्यवस्था की पूरी श्रृंखला प्रभावित हो रही है।

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उप निरीक्षक और एएसआई की भारी कमी
उप निरीक्षक स्तर पर भी तस्वीर उतनी ही निराशाजनक है। जिले में 30 उप निरीक्षक पद स्वीकृत हैं, लेकिन केवल 15 ही वर्तमान में तैनात हैं, जबकि आधे पद खाली पड़े हुए हैं। यही नहीं, सहायक उप निरीक्षक (एएसआई) के 45 स्वीकृत पदों में से 9 पद रिक्त होने के कारण जमीनी स्तर पर निगरानी और फील्ड सुपरविजन प्रभावित हो रहा है। इसका सीधा असर बीट व्यवस्था, गश्त, प्राथमिक जांच और त्वरित कार्रवाई पर पड़ रहा है, जिससे अपराध नियंत्रण की पूरी व्यवस्था दबाव में नजर आ रही है।

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आरक्षक स्तर पर भी हालात संतोषजनक नहीं हैं। जिले में 442 आरक्षक पद स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में सिर्फ 390 ही तैनात हैं, जबकि 52 पद रिक्त पड़े हुए हैं। यही आरक्षक जमीनी पुलिसिंग की असली ताकत माने जाते हैं, ऐसे में इस कमी का सीधा असर ग्रामीण क्षेत्रों, नियमित पेट्रोलिंग, रात्रि गश्त और त्वरित रिस्पॉन्स पर दिखाई दे रहा है। सीमित बल के सहारे कानून-व्यवस्था बनाए रखना पुलिस के लिए दिन-प्रतिदिन बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।

वीआईपी मूवमेंट से और बढ़ता दबाव
मुंगेली का राजनीतिक महत्व इसलिए भी अधिक है, क्योंकि लोरमी विधायक अरुण साव राज्य के उपमुख्यमंत्री हैं, जबकि केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू भी इसी जिले से आते हैं। लगातार वीआईपी दौरों के कारण बड़ी संख्या में पुलिस बल सुरक्षा ड्यूटी में लग जाता है, जिससे थानों और ग्रामीण क्षेत्रों में पुलिस उपस्थिति घट जाती है।

आईजी का आश्वासन, लेकिन चिंता बरकरार
हाल ही में मुंगेली दौरे पर पहुंचे बिलासपुर रेंज के आईजी रामगोपाल गर्ग ने मीडिया से बातचीत में पुलिस बल और संसाधनों की कमी स्वीकार करते हुए रिक्त पदों को जल्द भरने का आश्वासन दिया है। हालांकि सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते स्वीकृत पदों के अनुरूप तैनाती नहीं हुई, तो आने वाले चुनावी माहौल, राजनीतिक गतिविधियों और बढ़ते वीआईपी मूवमेंट के बीच कानून-व्यवस्था संभालना बेहद चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

लेखक के विषय में

मनीशंकर पांडेय Picture

मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।

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