पटरी पहुंची, सड़क नहीं! जोबट के तड़वी फलिये में एक किलोमीटर रास्ते के लिए तरस रहे ग्रामीण, बारिश में खटिया ही बनती है एंबुलेंस

पटरी पहुंची, सड़क नहीं! जोबट के तड़वी फलिये में एक किलोमीटर रास्ते के लिए तरस रहे ग्रामीण, बारिश में खटिया ही बनती है एंबुलेंस

आलीराजपुर। विकास की रफ्तार और जमीनी हकीकत के बीच का फर्क देखना हो तो मध्य प्रदेश के आलीराजपुर जिले के जोबट जनपद पंचायत के तड़वी फलिये की तस्वीर काफी कुछ बयां करती है। गांव के पास रेलवे ट्रैक पहुंच चुका है और ट्रेन की आवाजाही भी शुरू हो गई है, लेकिन ग्रामीणों के लिए अपने ही घर तक पहुंचने वाली करीब एक किलोमीटर पक्की सड़क आज भी सपना बनी हुई है। बारिश शुरू होते ही यही कच्चा रास्ता ग्रामीणों के लिए मुसीबत बन जाता है। कीचड़ और फिसलन के बीच रोजमर्रा की आवाजाही से लेकर इलाज तक हर जरूरत मुश्किल हो जाती है।

बारिश में सड़क नहीं, दलदल बन जाता है रास्ता
तड़वी फलिये को मुख्य सड़क से जोड़ने वाला रास्ता कच्चा है। बारिश के दौरान हालात और खराब हो जाते हैं। जगह-जगह कीचड़ और पानी भरने के कारण पैदल चलना भी चुनौती बन जाता है। सबसे ज्यादा परेशानी स्कूल जाने वाले बच्चों को होती है। भारी बस्ते लेकर बच्चे इसी रास्ते से गुजरते हैं और कई बार फिसलकर गिरने का खतरा बना रहता है।

मरीज को खटिया पर ले जाने की मजबूरी
सड़क की बदहाली का सबसे गंभीर असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक, बारिश के दिनों में एम्बुलेंस फलिये तक नहीं पहुंच पाती। ऐसे में किसी व्यक्ति की तबीयत बिगड़ने पर परिजनों को मरीज को खटिया पर लिटाकर कीचड़ भरे रास्ते से मुख्य मार्ग तक ले जाना पड़ता है। वहां पहुंचने के बाद ही वाहन से अस्पताल ले जाने की व्यवस्था हो पाती है। यानी जिस एंबुलेंस का काम मरीज तक पहुंचना है, वहां मरीज को ही एंबुलेंस तक पहुंचाना पड़ रहा है।

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रेलवे ट्रैक आया, लेकिन सड़क का इंतजार खत्म नहीं हुआ
ग्रामीणों की सबसे बड़ी नाराजगी इसी बात को लेकर है कि उनके इलाके तक रेलवे की सुविधा पहुंच गई, लेकिन बुनियादी सड़क सुविधा अब भी अधूरी है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें बड़े-बड़े विकास कार्यों से ज्यादा अपने फलिये तक एक पक्की सड़क चाहिए, ताकि बारिश में बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों को परेशानी न उठानी पड़े।

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सालों से मांग, अब भी सिर्फ इंतजार
स्थानीय ग्रामीण धनसिंह बघेल का कहना है कि ग्रामीण लंबे समय से सड़क निर्माण की मांग करते आ रहे हैं। उनका कहना है कि वे चाहते हैं कि बच्चों को स्कूल आने-जाने में परेशानी न हो और बीमारी की स्थिति में मरीज को समय पर अस्पताल पहुंचाया जा सके। ग्रामीणों के मुताबिक, जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के सामने कई बार समस्या रखी गई, लेकिन अब तक ठोस समाधान नहीं निकल पाया है।

अब सड़क बनने की उम्मीद
तड़वी फलिये की समस्या सिर्फ सड़क की नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षित आवागमन से जुड़ी हुई है। बारिश के मौसम में यह परेशानी और गंभीर हो जाती है।

ग्रामीणों की मांग साफ है,उन्हें आश्वासन नहीं, सड़क चाहिए।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस समस्या को कितनी गंभीरता से लेता है और तड़वी फलिये के लोगों को कब तक वह पक्की सड़क मिलती है, जिसका इंतजार वे वर्षों से कर रहे हैं।

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