दोनों पैर गंवाए, हौसला नहीं… कटनी के शुभम ने मास्को में रचा इतिहास, तिरंगा लहराकर जीता गोल्ड
कटनी। जिंदगी ने जब शुभम चक्रवर्ती से उनके दोनों पैर छीन लिए, तब शायद उनके सामने आगे का रास्ता बेहद मुश्किल नजर आया होगा। लेकिन शुभम ने अपनी दिव्यांगता को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। उन्होंने संघर्ष को ताकत बनाया, खेल को अपना जुनून बनाया और अब रूस की राजधानी मास्को में भारत का तिरंगा लहराकर इतिहास रच दिया है।
मध्य प्रदेश के कटनी के रहने वाले पैरा पावरलिफ्टर शुभम चक्रवर्ती ने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतकर देश और प्रदेश का नाम रोशन किया है। 6 से 10 अगस्त तक रूस में आयोजित मिलिट्री वेटर इंटरनेशनल पैरा पावरलिफ्टिंग प्रतियोगिता में शुभम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पहला स्थान हासिल किया।
मास्को में छाया भारत का तिरंगा
रूस में आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में कई देशों के पैरा पावरलिफ्टिंग खिलाड़ी शामिल हुए। कड़े मुकाबले के बीच शुभम ने अपनी ताकत, तकनीक और आत्मविश्वास का शानदार प्रदर्शन किया और गोल्ड मेडल अपने नाम कर लिया। जीत के बाद जब मास्को में शुभम ने तिरंगा अपने हाथों में थामा, तो वह पल उनके लिए ही नहीं बल्कि उनके परिवार, कोच और पूरे मध्य प्रदेश के लिए गर्व का बन गया।
हादसे ने छीने दोनों पैर, लेकिन सपने नहीं
शुभम की सफलता इसलिए भी खास है, क्योंकि उन्होंने जिंदगी की सबसे बड़ी चुनौती का सामना करने के बाद खेल की दुनिया में अपनी पहचान बनाई। एक गंभीर हादसे में शुभम ने अपने दोनों पैर गंवा दिए थे। इसके बाद भी उन्होंने खुद को परिस्थितियों के हवाले नहीं किया। उन्होंने खेल को अपनी ताकत बनाया और लगातार मेहनत करते हुए पैरा पावरलिफ्टिंग में आगे बढ़ते गए। उनका शुरुआती प्रशिक्षण कोच नेपेंद्र चौरे के मार्गदर्शन में हुआ। वर्तमान में शुभम लखनऊ स्थित SAI में अंतरराष्ट्रीय कोच राहुल शर्मा के निर्देशन में प्रशिक्षण ले रहे हैं।
परिवार और गुरुओं को दिया सफलता का श्रेय
मास्को में स्वर्ण पदक जीतने के बाद शुभम ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता और गुरुओं को दिया। उन्होंने कहा कि मुश्किल समय में परिवार ने उनका साथ नहीं छोड़ा और लगातार आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। शुभम ने अपने मार्गदर्शकों अनुराग तीर्थानी और परमजीत सर के योगदान को भी याद किया। उनके मुताबिक, परिवार का भरोसा और गुरुओं का मार्गदर्शन उनकी यात्रा में बेहद महत्वपूर्ण रहा।
पैरा स्पोर्ट्स एसोसिएशन ने दी बधाई
शुभम की अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि पर पैरा स्पोर्ट्स एसोसिएशन ऑफ मध्य प्रदेश ने भी खुशी जताई। एसोसिएशन के CEO डॉ. बी.के. डबास और चेयरमैन अश्विन शर्मा ने शुभम और उनके कोच को बधाई दी। एसोसिएशन की ओर से शुभम को भविष्य की प्रतियोगिताओं के लिए आवश्यक सहयोग और सुविधाएं उपलब्ध कराने का भरोसा भी दिया गया है।
शुभम की जीत सिर्फ गोल्ड मेडल नहीं, एक संदेश है
शुभम चक्रवर्ती की कहानी सिर्फ एक खिलाड़ी की जीत की कहानी नहीं है। यह उस जज्बे की कहानी है, जिसमें मुश्किलें शरीर को रोक सकती हैं, लेकिन इरादों को नहीं। जिस हादसे के बाद जिंदगी बदल गई, उसी के बाद शुभम ने अपने लिए एक नई पहचान बनाई। आज मास्को में उनके हाथों में लहराता तिरंगा उनकी मेहनत, संघर्ष और अटूट हौसले की कहानी कह रहा है। कटनी के शुभम ने गोल्ड मेडल जीतकर सिर्फ पोडियम पर जगह नहीं बनाई, बल्कि उन हजारों लोगों के लिए उम्मीद की मिसाल कायम की है, जो मुश्किल परिस्थितियों के बावजूद अपने सपनों को पूरा करना चाहते हैं।
