मनरेगा पर सियासी संग्राम: दिल्ली में कांग्रेस का विरोध, गांधी स्मृति मार्च से रोके गए कार्यकर्ता

मनरेगा पर सियासी संग्राम: दिल्ली में कांग्रेस का विरोध, गांधी स्मृति मार्च से रोके गए कार्यकर्ता

नई दिल्ली। केंद्र सरकार द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) को बदलकर लागू किए गए विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) एक्ट, 2025 यानी VB-G RAM G Act के विरोध में कांग्रेस ने दिल्ली में बड़ा प्रदर्शन किया। महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर आयोजित इस विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को गांधी स्मृति की ओर मार्च करने से रोक दिया और कई नेताओं को हिरासत में लिया।

अकबर रोड स्थित एआईसीसी मुख्यालय से निकली ‘मनरेगा बचाओ संग्राम यात्रा’ को 30 जनवरी रोड पर ही रोक दिया गया। इस दौरान दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र यादव सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद थे। पुलिस की भारी तैनाती के बीच प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी गई।

प्रदर्शन में कांग्रेस के मीडिया एवं पब्लिसिटी विभाग के चेयरमैन पवन खेड़ा, सांसद जयराम रमेश और दिल्ली प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र यादव शामिल हुए। पवन खेड़ा ने केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए कहा, “जो सरकार मजदूर और किसान का अपमान करती है, वह ज्यादा दिन नहीं टिकती। मनरेगा बचाना यानी मजदूर की आवाज बचाना।”

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उन्होंने बताया कि देशभर की सभी राज्य राजधानियों में इसी तरह के शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं। दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि शांतिपूर्ण आंदोलन को जानबूझकर दबाने की कोशिश की गई। “हम लोकतांत्रिक तरीके से अपना विरोध दर्ज करा रहे थे, लेकिन हजारों पुलिसकर्मियों के जरिए हमें रोका गया। मोदी सरकार हमारे संकल्प को कमजोर नहीं कर सकती।”fgfgg-1769762855139_v

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वहीं केरल में एआईसीसी महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने केंद्र सरकार पर नागरिक अधिकारों को कमजोर करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पहले रोजगार के अधिकार को कमजोर किया गया और अब सूचना के अधिकार को भी निष्प्रभावी बताने की कोशिश हो रही है। “सरकार का रवैया साफ है, सामान्य नागरिकों के अधिकार छीनना। कांग्रेस इसे किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं करेगी।”

कांग्रेस का मुख्य विरोध नए कानून में महात्मा गांधी का नाम हटाने, केंद्र-राज्य फंड शेयरिंग को 100% से घटाकर 60:40 करने, और योजना को पूरी तरह केंद्र के नियंत्रण में लाने को लेकर है। पार्टी का आरोप है कि इससे राज्यों की भूमिका कमजोर होगी और ग्रामीण मजदूरों के अधिकार प्रभावित होंगे।

हालांकि, नए कानून में रोजगार की अवधि 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन किए जाने का प्रावधान किया गया है, लेकिन कांग्रेस का कहना है कि यह बदलाव मूल भावना को खत्म करने की भरपाई नहीं कर सकता। गौरतलब है कि ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ अभियान 10 जनवरी से शुरू होकर 25 फरवरी तक चलेगा। कांग्रेस ने MGNREGA को उसके मूल स्वरूप में बहाल करने और VB-G RAM G Act को वापस लेने की मांग दोहराई है। पार्टी का कहना है कि यह कानून ग्रामीण मजदूरों के संवैधानिक अधिकारों पर सीधा हमला है।

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