दिल्ली की सड़कों पर फिर दौड़ सकती हैं पुरानी गाड़ियां? सुप्रीम कोर्ट में 28 जुलाई को होगी बड़ी सुनवाई

दिल्ली की सड़कों पर फिर दौड़ सकती हैं पुरानी गाड़ियां? सुप्रीम कोर्ट में 28 जुलाई को होगी बड़ी सुनवाई

दिल्ली की सड़कों पर फिर दौड़ सकती हैं पुरानी गाड़ियां? सुप्रीम कोर्ट में 28 जुलाई को होगी बड़ी सुनवाई

दिल्ली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर 10 साल पुराने डीजल और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों पर लगे प्रतिबंध को चुनौती दी है। 28 जुलाई को होगी सुनवाई, सरकार ने BS-6 वाहनों को छूट देने और वैज्ञानिक आधार पर नीति बनाने की मांग की है।

नई दिल्ली: दिल्ली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में 2018 के उस आदेश की समीक्षा के लिए याचिका दाखिल की है, जिसके तहत राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में 10 साल पुराने डीजल और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों के संचालन पर रोक लगाई गई थी। यह आदेश वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर लागू किया गया था। 1 जुलाई 2025 से इस नीति के तहत दिल्ली में ऐसे वाहनों को ईंधन देने और सड़कों पर चलाने पर रोक लगा दी गई, जिससे करीब 62 लाख वाहन प्रभावित हुए।

दिल्ली सरकार ने अपनी याचिका में दलील दी है कि वाहनों की उम्र के बजाय उनके प्रदूषण स्तर के आधार पर प्रतिबंध लागू किया जाना चाहिए। सरकार का कहना है कि BS-6 मानक के वाहन, पुराने BS-4 वाहनों की तुलना में कम प्रदूषण फैलाते हैं, इसलिए सिर्फ उम्र के आधार पर पाबंदी लगाना मध्यम वर्ग और छोटे कारोबारियों के साथ अन्याय है। सरकार ने यह भी मांग की है कि केंद्र और वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) द्वारा वैज्ञानिक अध्ययन कर यह तय किया जाए कि कौन से वाहन वास्तव में प्रदूषण फैला रहे हैं।

इस मामले की सुनवाई 28 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में होने जा रही है, जिसमें संभवतः तीन जजों की पीठ शामिल होगी। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि यह नियम दिल्ली के लिए अत्यधिक कठोर है और इससे आम जनता को भारी असुविधा हो रही है। पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने भी समर्थन करते हुए कहा कि कई पुराने वाहन तकनीकी रूप से फिट हैं और उन्हें केवल उम्र के आधार पर प्रतिबंधित करना अनुचित है।

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1 जुलाई से लागू इस नीति के चलते 62 लाख वाहन, जिनमें 41 लाख दोपहिया और 18 लाख चारपहिया शामिल हैं। ANPR कैमरों के जरिए पुराने वाहनों की पहचान की जा रही थी, लेकिन डेटा एकीकरण और सेंसर संबंधी तकनीकी खामियों के कारण नीति को सही ढंग से लागू नहीं किया जा सका, जिससे सरकार को इसे अस्थायी रूप से रोकना पड़ा।

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दिल्ली सरकार ने सुझाव दिया है कि वाहनों को उम्र के बजाय प्रदूषण स्तर के आधार पर वर्गीकृत किया जाए। पुराने स्कूटरों को इलेक्ट्रिक में परिवर्तित करने की योजना पर विचार किया जाए। NCR में एक समान नीति लागू की जाए। सरकार का मानना है कि दिल्ली की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था इतनी सक्षम नहीं है कि वह एक साथ इतने वाहनों के प्रतिबंध को संभाल सके। सुप्रीम कोर्ट में 28 जुलाई को होने वाली सुनवाई में दिल्ली सरकार, BS-6 वाहनों को छूट देने और विज्ञान आधारित नीति लागू करने की मांग रखेगी। यह मामला देशभर के उन लोगों को प्रभावित कर सकता है जो अपने पुराने वाहन चलाना जारी रखना चाहते हैं।

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