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एम्स बना 'रेफर सेंटर': रोज एक दर्जन वेंटिलेटर मरीज मेकाहारा भेजे, 80% की हो रही मौत
रायपुर। राजधानी रायपुर का अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) इन दिनों 'रेफर सेंटर' बनकर रह गया है। एम्स से रोजाना कम से कम एक दर्जन वेंटिलेटर पर रखे गए गंभीर मरीजों को सरकारी मेकाहारा अस्पताल भेजा जा रहा है। ये ऐसे मरीज होते हैं जिन्हें तत्काल आईसीयू और क्रिटिकल केयर की जरूरत होती है। लेकिन एम्स के इमरजेंसी वार्ड से उन्हें भर्ती करने के बजाय सीधे एंबुलेंस से मेकाहारा भेज दिया जाता है। इस अमानवीय रवैये पर मेकाहारा प्रबंधन भी खुलकर नाराजगी जता चुका है, लेकिन एम्स के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही है।
इलाज के अभाव में दम तोड़ रहे 80% मरीज
एम्स की इस लापरवाही का सीधा खामियाजा गरीब और गंभीर मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। पिछले कई महीनों के आंकड़ों के मुताबिक, एम्स से रेफर होकर मेकाहारा लाए गए 80 फीसदी मरीजों की जान बचाई नहीं जा सकी है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि वेंटिलेटर पर रहने वाले मरीजों को रेफर करना उनकी जान को जोखिम में डालना है। मेकाहारा में 1240 बेड की सुविधा है, लेकिन लगातार इमरजेंसी मरीज आने से सबको पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिल पातीं हैं, जिसका फायदा एम्स उठा रहा है।
ओपीडी पर्ची कटाने भी लंबी लाइन
एम्स की सुविधाओं को लेकर पहले से ही शिकायतें आ रही हैं। यहाँ ओपीडी की पर्ची कटाने के लिए भी मेकाहारा से ज्यादा लंबी लाइनें लगती हैं। छत्तीसगढ़ के साथ-साथ पड़ोसी राज्यों से भी बड़ी संख्या में मरीज एम्स पहुंचते हैं, लेकिन उन्हें निराशा ही हाथ लगती है। जानकारी के अनुसार, रायपुर एम्स में 1098 मरीजों के इलाज की सुविधा है, लेकिन मरीजों की बढ़ती संख्या के सामने यह सुविधा कम पड़ रही है। हालांकि, गंभीर मरीजों को रेफर करना लापरवाही की इंतहा मानी जा रही है।
अधिकारियों के बेतुके तर्क
इस मामले पर जब मेकाहारा और एम्स के अधिकारियों से बात की गई तो उनके बयान सामने आए।
मेकाहारा के अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर ने बताया, "मेकाहारा में जो मरीज रेफर होकर आते हैं, उन्हें पूर्ण रूप से सुविधाएं दी जाती हैं। हम यहां से किसी को रेफर नहीं कर सकते।"
वहीं, एम्स रायपुर के पीआरओ लक्ष्मीकांत चौधरी ने बताया, "ऐसे मरीज जिन्हें क्रिटिकल केयर की जरूरत होती है, उन्हें रिफर नहीं किया जाता है। जो क्रिटिकल नहीं होते हैं, उन्हें रेफर किया जाता है। बेड लिमिटेड हैं, इसलिए जिन्हें ज्यादा जरूरत होती है, उनको प्राथमिकता देते हैं।"
हालांकि, वेंटिलेटर पर आए मरीजों को 'क्रिटिकल नहीं' मानना, एम्स प्रशासन की संवेदनहीनता को दर्शाता है। सवाल यह है कि अगर मेकाहारा में सुविधाएं पूरी दी जाती हैं, तो एम्स से आए 80 फीसदी मरीज क्यों दम तोड़ रहे हैं? क्या देश के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान को अब सिर्फ पर्ची कटाने और रेफर करने के लिए बनाया गया है? यह प्रशासनिक लापरवाही स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करती है।
लेखक के विषय में
मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।
