अब खराब सड़क बनाकर नहीं बच पाएंगे ठेकेदार, बिहार में आएगा कड़ा कानून

अब खराब सड़क बनाकर नहीं बच पाएंगे ठेकेदार, बिहार में आएगा कड़ा कानून

पटना: बिहार में खराब सड़कों और घटिया निर्माण को लेकर बढ़ते जनाक्रोश के बीच नीतीश कुमार सरकार अब ठेकेदारों पर सख्ती की तैयारी में है। पथ निर्माण विभाग एक नई नियमावली ला रहा है, जिसके जरिए सड़क निर्माण में लापरवाही बरतने वाली कंपनियों पर स्पष्ट और कड़े दंडात्मक प्रावधान लागू किए जाएंगे। सरकार का दावा है कि इससे गुणवत्ता पर सीधा नियंत्रण स्थापित होगा, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह सख्ती जमीन पर भी उतरेगी।

अब तक संवेदकों का पंजीकरण बिहार ठेकेदारी निबंधन नियमावली 2007 के तहत होता रहा है, जिसमें दंड और ब्लैकलिस्टिंग को लेकर कई प्रावधान अस्पष्ट बताए जाते रहे हैं। इन्हीं खामियों के कारण खराब निर्माण के बावजूद कई कंपनियां दोबारा टेंडर हासिल करती रहीं। नई प्रस्तावित बिहार संवेदक निबंधन नियमावली 2026 में इन कमियों को दूर करने का दावा किया जा रहा है। विभागीय सूत्रों के अनुसार ड्राफ्ट प्रक्रिया अंतिम चरण में है और इसे नए वित्तीय वर्ष में लागू करने की तैयारी है।

नई नियमावली में पहली बार ‘श्रेणी-1’ की व्यवस्था जोड़ी जा रही है। इस श्रेणी में पंजीकृत संवेदक ही 50 करोड़ रुपये या उससे अधिक की बड़ी परियोजनाओं में भाग ले सकेंगे। अब तक इतनी बड़ी परियोजनाओं के लिए अलग वर्गीकरण नहीं था, जिससे निगरानी और जवाबदेही को लेकर सवाल उठते रहे हैं। सरकार का मानना है कि श्रेणीकरण से तकनीकी क्षमता और वित्तीय योग्यता के आधार पर ही बड़ी कंपनियों को काम मिलेगा।

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नियमावली में यह भी स्पष्ट किया जाएगा कि निर्माण में किस प्रकार की लापरवाही पर कितना आर्थिक दंड लगाया जाएगा और दोषी कंपनी को कितने समय के लिए काली सूची में रखा जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि अब दंड प्रक्रिया को पारदर्शी और बाध्यकारी बनाया जाएगा ताकि कोई भी कंपनी नियमों की अनदेखी न कर सके।

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इसी के साथ पथ निर्माण विभाग मॉडल बिडिंग डॉक्यूमेंट में हाईब्रिड एन्यूटी मॉडल को भी शामिल कर रहा है, जिसे अक्टूबर 2025 में कैबिनेट की मंजूरी मिल चुकी है। इस मॉडल के तहत परियोजना लागत का बड़ा हिस्सा निर्माण कंपनी लगाएगी और शेष राशि सरकार देगी। विभाग का दावा है कि इससे गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित होगी क्योंकि कंपनी की वित्तीय भागीदारी अधिक रहेगी। हालांकि विपक्ष और विशेषज्ञों का मानना है कि नियम बनाना आसान है, लेकिन असली चुनौती उनका निष्पक्ष क्रियान्वयन है। बिहार में वर्षों से सड़क निर्माण की गुणवत्ता को लेकर उठते रहे सवालों के बीच यह नई नियमावली सरकार की साख के लिए भी एक बड़ी परीक्षा साबित हो सकती है।

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