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सात अरब डॉलर की चोट भारत का विदेशी मुद्रा भंडार लुढ़का और सोने की चमक भी हुई फीकी
नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से जारी ताजा आंकड़ों ने देश की तिजोरी की सेहत को लेकर थोड़ी चिंता बढ़ा दी है। 6 फरवरी 2026 को खत्म हुए हफ्ते में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार करीब 6.7 अरब डॉलर घटकर 717.06 बिलियन डॉलर पर आ गया है। इस भारी गिरावट की सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में आया बड़ा उतार चढ़ाव बताया जा रहा है। हालांकि डॉलर और अन्य विदेशी मुद्राओं की कमाई में बढ़ोतरी हुई है लेकिन सोने की वैल्यू कम होने से पूरे खजाने पर नकारात्मक असर पड़ा है।
रिजर्व बैंक से जारी रिपोर्ट के मुताबिक विदेशी मुद्रा भंडार के घटने के पीछे सबसे बड़ा हाथ गोल्ड रिजर्व की वैल्यू का गिरना है। पिछले हफ्ते जहां सोने का खजाना 137.6 बिलियन डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर था वहीं अब यह घटकर 123.47 बिलियन डॉलर रह गया है। यानी सिर्फ सात दिनों में सोने की कीमत कागज पर 14.2 बिलियन डॉलर कम हो गई है। इसका मतलब यह कतई नहीं है कि रिजर्व बैंक ने अपना सोना कहीं बेच दिया है बल्कि वैश्विक बाजार में सोने के दाम गिरने से उसकी कुल वैल्यू घट गई है जिसे तकनीकी भाषा में वैल्यूएशन इफेक्ट कहा जाता है।
एक तरफ सोना सस्ता होने से तिजोरी को झटका लगा तो दूसरी तरफ विदेशी मुद्रा संपत्ति यानी एफसीए में 7.66 बिलियन डॉलर का अच्छा सुधार देखने को मिला है। फिलहाल देश के पास 570.05 बिलियन डॉलर की विदेशी मुद्रा मौजूद है जो डॉलर और यूरो जैसी करेंसी में मजबूती को दर्शाती है। जानकारों का कहना है कि अगर विदेशी मुद्राओं में यह सुधार नहीं होता तो कुल गिरावट का आंकड़ा और भी बड़ा और डरावना हो सकता था। इसके अलावा एसडीआर और आईएमएफ के पास रखे रिजर्व में भी मामूली गिरावट दर्ज की गई है।
देश की अर्थव्यवस्था को लेकर गुलाबी सपने दिखाने वाले आंकड़ों के बीच यह गिरावट याद दिलाती है कि वैश्विक बाजार की हवा कब बदल जाए कुछ कहा नहीं जा सकता। कभी सोने की चमक खजाने को रिकॉर्ड ऊंचाई पर ले जाती है तो कभी वही सोना तिजोरी में सेंध लगा देता है। हालांकि राहत की बात यह है कि हमारे पास अब भी इतना मोटा पैसा जमा है कि अगले 11 महीनों तक का आयात बिल आराम से चुकाया जा सकता है। रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने पहले भी संकेत दिए हैं कि भारत का बाहरी आर्थिक क्षेत्र काफी मजबूत और सुरक्षित स्थिति में है।
आंकड़ों का विश्लेषण करें तो पता चलता है कि जनवरी के आखिरी हफ्ते में सोने ने जो लंबी छलांग लगाई थी वह फरवरी के पहले हफ्ते में ही हवा हो गई। इसे बाजार का एक बड़ा सुधार माना जा रहा है जिसे लेकर फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है क्योंकि भारत लगातार अपने भंडार को सुरक्षित करने के लिए विदेशों से सोना खरीद रहा है। वैश्विक अस्थिरता के इस दौर में उतार चढ़ाव होना एक सामान्य प्रक्रिया है लेकिन करोड़ों की इस गिरावट ने एक बार फिर दुनिया भर के निवेशकों का ध्यान भारत की ओर खींच लिया है।
लेखक के विषय में
मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।
