CM के पैतृक गांव में बदहाल स्वास्थ्य सेवा, धक्का मारकर चली 108 एम्बुलेंस, रास्ते में महिला की मौत

CM के पैतृक गांव में बदहाल स्वास्थ्य सेवा, धक्का मारकर चली 108 एम्बुलेंस, रास्ते में महिला की मौत

रामगढ़/बरलंगा। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के पैतृक गांव नेमरा (बरलंगा थाना क्षेत्र) में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी हकीकत चौंकाने वाली तस्वीर पेश कर रही है। गांव में तैनात 108 एम्बुलेंस पिछले लगभग एक महीने से तकनीकी खराबी के बावजूद संचालन में बताई जा रही है। स्थानीय ग्रामीणों का दावा है कि वाहन को स्टार्ट करने के लिए हर बार धक्का लगाना पड़ता है, यह स्थिति तब है जब इसे गंभीर मरीजों और सड़क हादसों जैसी आपात स्थितियों के लिए जीवनरेखा माना जाता है।

ग्रामीणों का आरोप है कि संबंधित विभाग को कई बार शिकायतें दी गईं, लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकाला गया। सवाल यह है कि जब प्रदेश की इमरजेंसी हेल्थ सर्विस का प्रचार-प्रसार बड़े स्तर पर किया जाता है, तो मुख्यमंत्री के पैतृक गांव में ही एम्बुलेंस महीनों से खराब हालत में कैसे चल रही थी? क्या नियमित मेंटेनेंस और निगरानी की कोई व्यवस्था है, या फिर कागजों में ही सब दुरुस्त दिखाया जा रहा है? यह मामला सिर्फ एक खराब वाहन का नहीं, बल्कि ग्रामीण स्वास्थ्य तंत्र की जवाबदेही और निगरानी प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।

दरअसल, आज सुबह एक सड़क दुर्घटना के बाद यह समस्या फिर सामने आई। जानकारी के मुताबिक, रजरप्पा मंदिर से पूजा कर लौट रही अर्टिगा कार गोला–मुरी मार्ग पर सिल्ली मोड़ के पास पेड़ से टकरा गई। हादसे में एक महिला समेत चार लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।

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15–20 मिनट धक्का लगाने के बाद चली एम्बुलेंस
घटना की सूचना मिलने पर डायल 108 सेवा को कॉल किया गया। आरोप है कि बरलंगा थाने के पास खड़ी एम्बुलेंस को चालू करने के लिए 15–20 मिनट तक स्थानीय लोगों को धक्का लगाना पड़ा। इसके बाद वाहन किसी तरह घटनास्थल तक पहुंचा, जो लगभग चार किलोमीटर दूर था। स्थानीय लोगों के अनुसार, घायल करीब 40 मिनट तक मौके पर तड़पते रहे। बाद में पुलिस और ग्रामीणों की मदद से घायलों को गोला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। हालांकि, रास्ते में एक महिला की मौत हो गई।

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स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि एम्बुलेंस की खराब स्थिति की जानकारी संबंधित विभाग को पहले भी दी गई थी, लेकिन समय पर सुधार नहीं किया गया। इस घटना के बाद क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और निगरानी को लेकर सवाल तेज हो गए हैं। स्थानीय प्रशासन की ओर से फिलहाल मामले में आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। यह घटना ग्रामीण इलाकों में आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं की उपलब्धता और तत्परता को लेकर गंभीर चिंता का विषय बन गई है।

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