छत्तीसगढ़ में एसपी धर्मेंद्र सिंह ने खोला मोर्चा, बोले बार-बार प्रमोशन रोककर किया जा रहा मानसिक परेशान
रायपुर। छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले में तैनात आईपीएस अधिकारी धर्मेंद्र सिंह छवई ने अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। 2012 बैच के आईपीएस धर्मेंद्र सिंह ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को पत्र लिखकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि सीनियर होने और बेदाग सेवा रिकॉर्ड के बावजूद उन्हें बार-बार प्रमोशन से वंचित रखा जा रहा है। उन्होंने इसे अपने संवैधानिक अधिकारों का हनन बताया है। अधिकारी ने सीधे तौर पर प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा है कि उन्हें जानबूझकर किनारे किया जा रहा है, जिससे वे मानसिक रूप से काफी परेशान हैं।
बेदाग रिकॉर्ड के बाद भी सूची से नाम गायब
धर्मेंद्र सिंह छवई ने पत्र में अपना दर्द बयां करते हुए लिखा कि अक्टूबर 2024 से लेकर जुलाई 2025 तक विभाग में कई प्रमोशन लिस्ट जारी हुई। इन सूचियों में उनसे जूनियर अधिकारियों को डीआईजी बना दिया गया, लेकिन उनकी योग्यता को नजरअंदाज कर दिया गया। उन्होंने मुख्यमंत्री को बताया कि उनकी सर्विस में कोई दाग नहीं है, फिर भी हर बार उन्हें सूची से बाहर रखा जा रहा है।


जांच का बहाना और दोहरे मापदंड
श्री सिंह को बताया गया है कि भोपाल में उनके खिलाफ एक लोकायुक्त जांच लंबित है, इसलिए उन्हें डीआईजी पद पर प्रमोशन नहीं दिया जा सकता। इस पर अधिकारी ने कड़ा ऐतराज जताते हुए गृह मंत्रालय के नियमों का हवाला दिया है। उनका कहना है कि नियम के मुताबिक प्रमोशन तभी रोका जा सकता है जब अधिकारी सस्पेंड हो या उस पर कोर्ट में मुकदमा चल रहा हो। उन्होंने आरोप लगाया कि एक तरफ जांच के नाम पर उन्हें रोका जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों में घिरे दूसरे अफसरों को प्रमोशन की सौगात दी जा रही है।
अधिकारी का दर्द: क्या बोले धर्मेंद्र सिंह छवई
आईपीएस धर्मेंद्र सिंह छवई ने बताया कि यह उनके साथ भेदभाव और चयनात्मक न्याय का मामला है। प्रशासन मनमाने फैसले ले रहा है। संविधान का अनुच्छेद 16 हर किसी को बराबरी का अधिकार देता है, लेकिन यहां नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। उन्होंने पत्र में लिखा कि इस भेदभाव से उनके पेशेवर करियर और मानसिक सेहत पर बुरा असर पड़ रहा है।
हाइलाइट्स.....
2012 बैच के अधिकारी हैं धर्मेंद्र सिंह छवई।
09 महीने के भीतर कई बार जारी हुई प्रमोशन लिस्ट लेकिन अधिकारी का नाम शामिल नहीं किया गया।
15 जनवरी 1999 के गृह मंत्रालय के नियमों के अनुसार केवल जांच के आधार पर पदोन्नति नहीं रोकी जा सकती।
इस खबर के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। अब सबकी नजरें मुख्यमंत्री सचिवालय पर हैं कि इस शिकायत पर क्या कदम उठाया जाता है।
