फर्जी जाति प्रमाण पत्र: चीफ इंजीनियर कटारे को हाईकोर्ट से स्टे, विधानसभा में बघेल ने पूछा- सरकार क्यों मेहरबान?

फर्जी जाति प्रमाण पत्र: चीफ इंजीनियर कटारे को हाईकोर्ट से स्टे, विधानसभा में बघेल ने पूछा- सरकार क्यों मेहरबान?

रायपुर। प्रधानमंत्री सड़क योजना के चीफ इंजीनियर केके कटारे को हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिल गई है। उनके जाति प्रमाण पत्र को निरस्त करने वाले आदेश पर कोर्ट ने स्टे (स्थगन) लगा दिया है। इस मामले में कोर्ट के सामने शासन का पक्ष बेहद कमजोर रहा, जिसे सरकार की एक बड़ी चूक माना जा रहा है। दूसरी तरफ, इसी मुद्दे पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने विधानसभा में सरकार को जमकर घेरा है। उन्होंने अफसरों के संरक्षण और सरकार की नीयत पर सीधे सवाल उठाए हैं।

कोर्ट में सरकार फेल, सिस्टम पर उठे सवाल

हाल ही में उच्च स्तरीय प्रमाणीकरण छानबीन समिति ने कटारे के जाति प्रमाण पत्र को फर्जी मानते हुए उसे पूरी तरह रद्द कर दिया था। इसके बाद तय था कि वे कोर्ट जाएंगे। कटारे ने अपील की और उन्हें हाईकोर्ट से स्टे मिल गया।

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इस स्टे से विवादों में रहने वाले अफसरों को फिलहाल सांस लेने का मौका मिल गया है। लेकिन यहां सबसे बड़ा सवाल शासन की पैरवी पर है। विभाग से लेकर सरकारी वकीलों तक, किसी ने भी इस मामले में गंभीरता नहीं दिखाई। सिस्टम की इस ढिलाई को देखकर लगता है जैसे पूरी व्यवस्था ही उन्हें बचाने में लगी है। स्टे मिलने के बाद अफसर का सीना चौड़ा होना स्वाभाविक है, लेकिन क्या राज्य सरकार के पास अब कटारे को रोकने की कोई ठोस कानूनी रणनीति है?

विधानसभा में गूंजा मुद्दा, बघेल ने दागे सवाल

यह मामला अब प्रशासनिक से ज्यादा राजनीतिक हो गया है। पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने 10 मार्च 2026 को विधानसभा में ध्यानाकर्षण सूचना के तहत इस मुद्दे को उठाया। उन्होंने पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के डिप्टी सीएम को घेरते हुए कहा कि जब छानबीन समिति ने प्रमाण पत्र निरस्त कर दिया है, तो कटारे अब तक कुर्सी पर कैसे बैठे हैं?

बघेल ने आरोप लगाया कि उच्च अधिकारियों के संरक्षण के कारण ही कटारे पर कार्रवाई नहीं हो रही है। नियम के मुताबिक, जाति प्रमाण पत्र रद्द होते ही उस आधार पर मिली नौकरी और प्रमोशन तुरंत खत्म हो जाने चाहिए। सरकार की इस संदिग्ध चुप्पी से असली हकदारों का नुकसान हो रहा है और जनता के बीच गलत संदेश जा रहा है।

क्या है पूरा मामला?

केके कटारे फिलहाल चीफ इंजीनियर हैं और विकास आयुक्त कार्यालय में प्रमुख अभियंता के अहम प्रभार पर भी जमे हुए हैं। 7 सदस्यों वाली राज्य स्तरीय छानबीन समिति ने 26 फरवरी 2026 को आदेश जारी कर उनका SC (अनुसूचित जाति) प्रमाण पत्र खारिज कर दिया था।

जांच में साफ हुआ कि 1950 के पहले कटारे के पूर्वज मूल रूप से महाराष्ट्र के भंडारा जिले (ग्राम- तुमसर) के रहने वाले थे। ऐसे में उन्हें छत्तीसगढ़ में अनुसूचित जाति के आरक्षण का कोई अधिकार ही नहीं था। इसके बावजूद उन्होंने 1994 में पीएससी (PSC) की 'बैकलॉग विशेष भर्ती' का फायदा उठाया, नौकरी पाई और मजे से प्रमोशन लेते रहे।

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