जल संसाधन विभाग में महाघोटाला दागी ईएनसी इंद्रजीत उइके के पुराने काले कारनामे आए सामने अब सीबीआई जांच की उठी मांग

जल संसाधन विभाग में महाघोटाला दागी ईएनसी इंद्रजीत उइके के पुराने काले कारनामे आए सामने अब सीबीआई जांच की उठी मांग

रायपुर छत्तीसगढ़ के जल संसाधन विभाग में हुए करोड़ों के पुराने घोटाले अब ईएनसी इंद्रजीत उइके के गले की फांस बनते जा रहे हैं। विभाग में बिना जमीन पर गए घर बैठे गूगल मैप से सर्वे कर 15 करोड़ निकालने की तैयारी हो या फिर स्टेशनरी और फर्जी भू अर्जन के नाम पर करोड़ों की लूट इन सभी पुराने मामलों में अब केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई से जांच कराने की मांग तेज हो गई है। अफसरशाही पूरी तरह बेलगाम है और सरकारी खजाने को लूटने के लिए नियमों की धज्जियां उड़ाई गई हैं। प्रमुख अभियंता ईएनसी इंद्रजीत उइके की संदिग्ध भूमिका और उनकी नियम विरुद्ध संविदा नियुक्ति सबसे बड़े सवालों के घेरे में है। विभाग के गलियारों में यह चर्चा आम है कि सत्ताधारी नेताओं का सीधा संरक्षण पाकर दागी अफसरों ने यह खेल खेला और अब इस पूरे सिंडिकेट को तोड़ने के लिए सीबीआई जांच ही एकमात्र विकल्प है।

गूगल मैप से फर्जी सर्वे का पुराना खेल

यह मामला भले ही पुराना हो लेकिन इसकी आंच अब फिर से तेज हो गई है। राजधानी रायपुर और अन्य जिलों में सिंचाई का रकबा बढ़ाने के लिए करोड़ों के प्रोजेक्ट बने थे। जशपुर जिले के पत्थलगांव की मैनी नदी पर शेखरपुर और डांडपानी परियोजना के लिए करोड़ों की प्रशासकीय स्वीकृति मिली थी। योजना शुरू होने से पहले जमीन पर भौगोलिक सर्वे होना था लेकिन स्थानीय विरोध के कारण अफसर वहां पहुंच नहीं पाए। इसके बाद अफसरों ने बड़ा फर्जीवाड़ा किया। भारी भरकम प्रोजेक्ट बचाने के लिए घर बैठे गूगल मैप की मदद ली और पूरा सर्वे कागजों पर तैयार कर लिया। इसी फर्जी रिपोर्ट पर 15 करोड़ रुपये के भुगतान की नोटशीट चला दी गई। तत्कालीन मुख्य अभियंता इंद्रजीत उइके ने पहले भुगतान रोकने को कहा था लेकिन बाद में पूरी कहानी बदल गई और केंद्रीय जल आयोग के कड़े निर्देश रद्दी में डाल दिए गए। अब इसी अनदेखी की सीबीआई जांच मांगी जा रही है।

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योर सेल्फ चेक से करोड़ों का पुराना गबन

विभाग का एक और पुराना और बड़ा घोटाला रामानुजगंज और बलरामपुर इलाके का है। जल संसाधन संभाग क्रमांक दो के कार्यपालन यंत्री संजय ग्रायेकर ने भू अर्जन के नाम पर आठ करोड़ 67 लाख रुपये का सीधा गबन किया। इस अफसर ने योर सेल्फ चेक काटे और पैसा व्यक्तिगत फर्मों और चहेते कर्मचारियों के खातों में डाल दिया। जिन 10 योजनाओं के नाम पर पैसा निकला उनका जमीन पर कोई काम ही नहीं हुआ था। इसके अलावा मात्र तीन महीने में स्टेशनरी के नाम पर साढ़े तीन करोड़ और मुरूम भराई के नाम पर साढ़े चार करोड़ ठिकाने लगा दिए गए। मीडिया के तीखे सवालों पर ईएनसी उइके भागते नजर आए थे। इसी खामोशी और मिलीभगत का सच उगलवाने के लिए सीबीआई जांच की मांग उठ रही है।

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नियम विरुद्ध नियुक्ति और नेताओं का संरक्षण

 

ईएनसी इंद्रजीत उइके 30 जून 2025 को रिटायर हुए थे लेकिन नियमों को तोड़कर सरकार ने उन्हें उसी पद पर फिर से संविदा पर बैठा दिया। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के इतिहास में किसी रिटायर अधिकारी को इतने बड़े पद पर बिठाने का यह पहला मामला था। संविदा अधिकारी को वित्तीय अधिकार नहीं दिए जा सकते लेकिन उइके को पूरी ताकत सौंप दी गई। सूत्र बताते हैं कि यह सब विभागीय मंत्री और बड़े नेताओं की मिलीभगत से हुआ। इसी राजनीतिक संरक्षण के कारण वरिष्ठ अभियंताओं का हक मारा गया और भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिला।

 

ईएनसी इंद्रजीत उइके के वे पुराने मामले जिनकी अब सीबीआई जांच की मांग हो रही है

 

  • 1 रिटायरमेंट के बाद असंवैधानिक नियुक्ति 30 जून 2025 को रिटायर होने के बाद नियमों को ताक पर रखकर दोबारा प्रमुख अभियंता के पद पर संविदा नियुक्ति हासिल करना।
  • 2 संविदा पद पर वित्तीय अधिकारों का दुरुपयोग सरकारी आदेशों का उल्लंघन कर एक संविदा अधिकारी के तौर पर करोड़ों रुपये की फाइलों और वित्तीय ताकत का मनमाना इस्तेमाल।
  • 3 गूगल सर्वे घोटाले में संदिग्ध चुप्पी 15 करोड़ के फर्जी गूगल सर्वे घोटाले में शुरुआत में पत्र लिखना लेकिन बाद में ठोस कार्रवाई न कर मामले को दबाना।
  • 4 भू अर्जन फर्जीवाड़े में जवाबदेही से भागना 8 करोड़ 67 लाख के भू अर्जन और स्टेशनरी घोटाले में विभाग प्रमुख के तौर पर चुप्पी साधना और दोषियों को बचाना।
  • 5 वरिष्ठ अधिकारियों का हक मारना राजनीतिक रसूख का फायदा उठाकर संविदा नियुक्ति पाना जिससे योग्य और वरिष्ठ इंजीनियरों का प्रमोशन रुका।
  • 6 सत्ताधारी नेताओं का सीधा संरक्षण बिना शीर्ष नेताओं की मिलीभगत के इतनी बड़ी संविदा नियुक्ति और पावर मिलना संभव नहीं है जो सीधे तौर पर भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है।

इन सभी पुराने और संगीन मामलों के सामने आने के बाद अब साफ हो गया है कि बिना सीबीआई जांच के सच्चाई सामने नहीं आएगी। लोग और नेता अब लामबंद हो रहे हैं और उनका साफ कहना है कि नेताओं का संरक्षण हटाकर दागी अफसरों पर सख्त कार्रवाई और सीबीआई जांच के बिना विभाग में जारी करोड़ों की लूट का यह काला सच कभी बेनकाब नहीं होगा।

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