NJV EXCLUSIVE: पूर्व ACB/EOW चीफ शेख आरिफ पर लटकी जांच की तलवार, सौम्या और टुटेजा की शिकायतें दबाने व फाइलें गायब करने का सनसनीखेज आरोप

NJV EXCLUSIVE: पूर्व ACB/EOW चीफ शेख आरिफ पर लटकी जांच की तलवार, सौम्या और टुटेजा की शिकायतें दबाने व फाइलें गायब करने का सनसनीखेज आरोप

रायपुर: छत्तीसगढ़ की ब्यूरोक्रेसी और सत्ता के गलियारों में एक बार फिर बड़ा हड़कंप मचने के आसार हैं। पूर्ववर्ती सरकार में ताकतवर रहे 2005 बैच के आईपीएस अधिकारी और तत्कालीन ईओडब्ल्यू/एसीबी (EOW/ACB) चीफ शेख हुसैन आरिफ के खिलाफ एक बेहद गंभीर शिकायत राज्य के मुख्य सचिव विकास शील को सौंपी गई है।

महानदी भवन पहुंची इस शिकायत में सनसनीखेज आरोप लगाया गया है कि आरिफ ने अपने कार्यकाल के दौरान शराब घोटाले के कथित सूत्रधार अनिल टुटेजा और कोयला लेवी घोटाले में फंसी तत्कालीन उप सचिव सौम्या चौरसिया को बचाने के लिए न सिर्फ भ्रष्टाचार की अहम शिकायतों को दबाया, बल्कि सरकारी फाइलों और रिकॉर्ड्स को ही नष्ट करवा दिया। एक जागरूक नागरिक और अधिवक्ता नरेश चंद्र गुप्ता ने मुख्य सचिव को विस्तृत याचिका सौंपते हुए इस पूरे मामले की स्वतंत्र एजेंसी से निष्पक्ष जांच की मांग की है।

 

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रसूखदारों को संरक्षण देने का गंभीर आरोप

 

याचिका में आरोप लगाया गया है कि आईपीएस शेख हुसैन आरिफ जब एसीबी/ईओडब्ल्यू के निदेशक और रायपुर के एसएसपी/आईजी का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे थे, तब एजेंसी अपने मूल उद्देश्य (भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने) से पूरी तरह भटक गई थी। अधिवक्ता का दावा है कि इस दौरान संस्था की कार्यप्रणाली का उपयोग महादेव सट्टा ऐप, कोयला और शराब घोटाले के प्रभावशाली आरोपियों को संरक्षण देने के लिए किया गया।

यह बात सार्वजनिक है कि आरिफ महादेव ऐप घोटाले के संदर्भ में केंद्रीय जांच एजेंसियों (विशेषकर सीबीआई) के राडार पर हैं। याचिका में अनिल टुटेजा और सौम्या चौरसिया जैसे प्रमुख आरोपियों से उनके कथित करीबी संबंधों का हवाला देते हुए उनके नेतृत्व में हुई जांच की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं।

 

साल 2020 की इन अहम शिकायतों की फाइलें गायब!

 

मुख्य सचिव को दी गई शिकायत में स्पष्ट उल्लेख है कि साल 2020 में इन रसूखदारों के खिलाफ पुख्ता शिकायतें एसीबी में दर्ज कराई गई थीं। कार्रवाई करना तो दूर, जानबूझकर इन फाइलों को ही कथित रूप से अवैध तरीके से नष्ट कर दिया गया। जिन शिकायतों को दबाने का आरोप है, वे इस प्रकार हैं:

 सौम्या चौरसिया (तत्कालीन उप सचिव) 4 जुलाई 2020 को भूमि विचलन (लैंड डायवर्सन) से जुड़े प्रशासनिक निर्णयों में भारी भ्रष्टाचार की शिकायत की गई थी।

 अनिल टुटेजा (तत्कालीन संयुक्त सचिव, उद्योग)11 मई 2020 को वीज़ा प्राप्ति के लिए कथित रूप से गलत घोषणाएं और भ्रामक जानकारी देने के मामले में शिकायत दर्ज कराई गई थी।

 पुलिस कर्मियों पर आरोप 29 मई 2020 को महादेव सट्टा ऐप घोटाले से जुड़े संदिग्धों के साथ मनी लॉन्ड्रिंग (धन शोधन) में संलिप्तता की शिकायत की गई थी।

शिकायतकर्ता ने स्पष्ट किया है कि सरकारी अभिलेखों का विनाश और दमन केवल कदाचार नहीं है, बल्कि यह पद का घोर दुरुपयोग और न्याय प्रक्रिया में सीधे तौर पर बाधा डालने वाला गंभीर आपराधिक कृत्य है।

मुख्य सचिव से की गई ये प्रमुख मांगें:

 

अधिवक्ता गुप्ता ने मुख्य सचिव से इस मामले में त्वरित और सख्त कार्रवाई की अपील करते हुए निम्नलिखित मांगें रखी हैं:

 1.स्वतंत्र जांच: तत्कालीन एसीबी चीफ शेख हुसैन आरिफ की कार्यप्रणाली, शिकायतों को दबाने और भ्रष्टाचार के आरोपियों को संरक्षण देने में उनकी भूमिका की किसी स्वतंत्र एजेंसी या विशेष समिति से जांच कराई जाए।

 

 2.दोषियों पर FIR: जिन अधिकारियों ने लापरवाही बरतते हुए या जानबूझकर इन अहम फाइलों को नष्ट किया है, उनके खिलाफ तत्काल विभागीय और आपराधिक कार्रवाई शुरू की जाए।

 

 3.रिकॉर्ड का पुनर्निर्माण: नष्ट की गई फाइलों और अभिलेखों को जहां तक संभव हो फिर से तैयार (Reconstruct) किया जाए ताकि लंबित मामलों की जांच पूरी हो सके।

 

 4.संस्थागत सुधार:भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए कड़े संस्थागत कदम उठाए जाएं।

 

बढ़ सकती हैं आरिफ की मुश्किलें

 

छत्तीसगढ़ में सत्ता परिवर्तन के बाद से ही पिछली सरकार के चहेते अफसर लगातार जांच एजेंसियों के निशाने पर हैं। अब मुख्य सचिव के पास सीधे तौर पर पहुंची इस शिकायत ने तत्कालीन एसीबी चीफ की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है। मंत्रालय सूत्रों की मानें तो यदि मुख्य सचिव विकास शील इस मामले में जांच के आदेश देते हैं, तो आईपीएस आरिफ समेत कई तत्कालीन अधिकारियों की मुश्किलें बढ़नी तय हैं। ब्यूरोक्रेसी की नजरें अब महानदी भवन के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।

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