NJV EXCLUSIVE | बस्तर में कोसारटेड़ा घोटाला': 42 लाख के मेडिकल घोटाले वाले दागी इंजीनियर ने डैम पर शुरू किया 'प्राइवेट टोल नाका', 4 करोड़ के रिसॉर्ट का भी खेला!
जगदलपुर। छत्तीसगढ़ का बस्तर अपनी बेमिसाल प्राकृतिक सुंदरता के लिए देश-दुनिया में जाना जाता है। लेकिन, जल संसाधन विभाग के कुछ दागी अफसरों ने अब इस प्राकृतिक धरोहर को अपनी अवैध कमाई का एटीएम और निजी जागीर बना लिया है। यह ताजा और बेहद चौंकाने वाला मामला बस्तर ब्लॉक के ग्राम सालेमेटा स्थित कोसारटेड़ा जलाशय का है।
यहां टीडीपीपी (TDPP) संभाग जल संसाधन विभाग, जगदलपुर द्वारा पर्यटकों से सरेआम अवैध 'टोल टैक्स' वसूला जा रहा है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस कार्यपालन अभियंता (EE) की सर्विस बुक 42 लाख के फर्जी मेडिकल बिल घोटाले में EOW और ACB जैसी एजेंसियां जब्त कर चुकी हैं, उसे बस्तर में इतनी बड़ी 'समांतर सरकार' चलाने की हिम्मत आखिर कहां से मिल रही है?
पर्यटन के नाम पर सुविधा जीरो, फिर भी वसूली चालू
इन दिनों बस्तर में मौसम और वादियों का लुत्फ उठाने पर्यटकों की भारी भीड़ उमड़ रही है। स्थानीय लोग भी सप्ताहांत में कोसारटेड़ा जलाशय के दीदार के लिए सपरिवार पहुंच रहे हैं। लेकिन वहां पहुंचने पर उन्हें सुकून की जगह विभाग की 'अवैध वसूली' का सामना करना पड़ रहा है।
जलाशय पर पर्यटन सुविधा के नाम पर एक तिनका तक नहीं है। न तो नौकायन (Boating) की कोई व्यवस्था शुरू की गई है और न ही बच्चों के खेलने या समय बिताने के लिए कोई अन्य साधन मौजूद है। लोग बस दूर से पानी देखकर मायूस लौट रहे हैं। इसके बावजूद, गेट पर बेखौफ होकर एंट्री के नाम पर शुल्क (टैक्स) वसूला जा रहा है। लोगों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि जब तक सुविधाओं का विस्तार नहीं हो जाता, तब तक यह वसूली क्यों की जा रही है?
हरा-भरा पार्क उजाड़कर 4 करोड़ का 'अवैध' रिसॉर्ट निर्माण
भ्रष्टाचार और मनमानी का यह खेल सिर्फ गेट पर पर्ची काटने तक सीमित नहीं है। सूत्रों के मुताबिक, कोसारटेड़ा जलाशय के पास पहले से मौजूद एक सुंदर पार्क था, जहां लोग परिवार के साथ बैठकर मनोरंजन करते थे। उस पार्क को रातों-रात पूरी तरह उजाड़ दिया गया। अब उसी जगह पर लगभग 3.5 से 4 करोड़ रुपये खर्च कर एक नया पार्क और एक शानदार 'रिसॉर्ट' का निर्माण किया जा रहा है।
सबसे बड़ा रहस्य यह है कि सौंदर्यीकरण और रिसॉर्ट निर्माण के इस करोड़ों के प्रोजेक्ट की क्या कोई प्रशासकीय स्वीकृति ली गई है? यह राशि किस मद से खर्च की जा रही है, इसका जवाब किसी के पास नहीं है।
दागी अफसर का 'सिंडिकेट' और सिस्टम पर उठे सवाल
यह पूरा गोरखधंधा टीडीपीपी संभाग, जल संसाधन विभाग जगदलपुर के संरक्षण में चल रहा है। इस संभाग के कार्यपालन अभियंता (EE) का ट्रैक रिकॉर्ड ही अपने आप में एक बड़ा घोटाला है। हाल ही में इनके 42 लाख से अधिक के फर्जी मेडिकल बिलों का भंडाफोड़ हुआ था, जिसके बाद राज्य की शीर्ष जांच एजेंसियों ने छापे मारकर इनकी सर्विस बुक तक अपने कब्जे में ले ली है। ऐसे गंभीर वित्तीय भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे अधिकारी के राज में अब 4 करोड़ का बिना स्वीकृति वाला निर्माण और अवैध टोल वसूली कई बड़े सवाल खड़े करती है।
सुशासन पर NJV के सीधे प्रश्न...
वसूली का आदेश किसका? क्या राज्य शासन ने कोसारटेड़ा में ऐसा कोई शुल्क वसूलने का निर्णय लिया है? यदि कोई ऐसा 'टोल टैक्स' लगाया गया है, तो बाकायदा उसका राजपत्र (Gazette) में प्रकाशन क्यों नहीं हुआ?
पैसा किस खाते में जा रहा है? पर्यटकों से जो लाखों रुपये वसूले जा रहे हैं, वह सरकारी खजाने में जमा हो रहा है या किसी अफसर की निजी तिजोरी में?करोड़ों की स्वीकृति किसने दी?
4 करोड़ के इस रिसॉर्ट और पार्क निर्माण की योजना की स्वीकृति किसने दी? प्रमुख अभियंता ने? मुख्य अभियंता ने? अधीक्षण अभियंता ने? या फिर खुद उसी दागी ईई ने अपनी मर्जी से यह खेल रच दिया?
माननीय मुख्यमंत्री जी, संज्ञान लें!
यह मामला केवल एक अवैध वसूली का नहीं है, बल्कि यह राज्य सरकार की छवि, नियम-कानून और वित्तीय अनुशासन को दी जा रही खुली चुनौती है। चूंकि जल संसाधन विभाग स्वयं माननीय मुख्यमंत्री जी के अधीन आता है, इसलिए यह आवश्यक हो जाता है कि वे स्वयं इस कोसारटेड़ा सिंडिकेट' का संज्ञान लें। इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए, अवैध वसूली तत्काल रोकी जानी चाहिए और बिना स्वीकृति के बहाए जा रहे 4 करोड़ रुपयों के टेंडर की फाइलें तलब की जानी चाहिए।
