NJV Exclusive: बिलासपुर में कोल माफियाओं का सिंडिकेट, ACB के 'हवलदार' की धौंस पर खनिज विभाग ने नियमों को ताक पर रख दिया अवैध एक्सटेंशन

NJV Exclusive: बिलासपुर में कोल माफियाओं का सिंडिकेट, ACB के 'हवलदार' की धौंस पर खनिज विभाग ने नियमों को ताक पर रख दिया अवैध एक्सटेंशन

  Highlights....

 

बिलासपुरके 5 बड़े कोल डिपो का लाइसेंस फरवरी 2026 में हो चुका है समाप्त।

 उच्च स्तरीय अनुमति के बजाय स्थानीय खनिज विभाग ने ही दे दिया 5 माह का गैरकानूनी एक्सटेंशन।

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 MT वर्कशॉप से ACB में पहुंचे एक हवलदार के दबाव में खेला जा रहा है पूरा खेल।

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 छत्तीसगढ़ के 'एयर डिस्टेंस' नियमों की खुलेआम उड़ रही धज्जियां, कोयला चोरी का खेल जारी।

 

बिलासपुर (NJV): न्यायधानी बिलासपुर में कोल माफियाओं और विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत का एक बड़ा और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जिले के कई कोल डिपो बिना वैध लाइसेंस और पर्यावरणीय नियमों को ताक पर रखकर धड़ल्ले से संचालित हो रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि जिन कोल डिपो का लाइसेंस फरवरी 2026 में ही समाप्त हो चुका है, उन्हें बंद कराने के बजाय खनिज विभाग (Mining Department) ने मेहरबानी दिखाते हुए 5 महीने का अवैध एक्सटेंशन दे दिया है। आरोप है कि यह पूरा खेल एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) में पदस्थ एक हवलदार के भारी दबाव में खेला जा रहा है, और क्षेत्र में कोयला चोरी व अवैध परिवहन का काला कारोबार बेरोकटोक जारी है।

 

इन 5 कोल डिपो पर मेहरबान है खनिज विभाग

जानकारी के अनुसार, बिलासपुर जिले के पांच प्रमुख कोल डिपो का लाइसेंस फरवरी 2026 में ही खत्म हो चुका है। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:

 1. कश्यप कोल डिपो, बेलतरा

 2. मां तारा कोल डिपो, रतनपुर

 3. मौर्य कोल डिपो, मोहतराई

 4. जगदंबे कोल डिपो, पेंड्रवा

 5. मंगलम इंटरप्राइजेज, गतौरी

नियमानुसार, लाइसेंस अवधि समाप्ति के बाद इन डिपो का संचालन तत्काल प्रभाव से बंद होना चाहिए था। यदि एक्सटेंशन या नवीनीकरण दिया भी जाना था, तो यह प्रक्रिया शासन या उच्च विभागीय स्तर पर होनी चाहिए थी। लेकिन स्थानीय खनिज विभाग के अधिकारियों ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर, नियमों को दरकिनार करते हुए इन डिपो को 5 महीने का अवैध एक्सटेंशन थमा दिया।

ACB के हवलदार का रसूख और खौफ

इस पूरे गोरखधंदे में एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाला एंगल सामने आया है। बताया जा रहा है कि खनिज विभाग के अधिकारियों पर यह अवैध एक्सटेंशन देने के लिए भारी दबाव बनाया गया था। सूत्रों के मुताबिक, पूर्व में MT (मोटर ट्रांसपोर्ट) वर्कशॉप में कार्यरत एक हवलदार, जो अब एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) में सेवाएं दे रहा है, वह कोल माफियाओं के लिए मुख्य ढाल बन गया है।

इस हवलदार ने ACB के नाम और रसूख का खौफ दिखाकर खनिज विभाग के अधिकारियों पर दबाव बनाया। बताया जाता है कि भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने वाली एजेंसी के इसी कर्मी की धौंस और मिलीभगत के चलते, बिना किसी नियम-कायदे को देखे एक बड़े कोल माफिया को एक्सटेंशन दे दिया गया।

 

हवा में उड़ रहे छत्तीसगढ़ के 'एयर डिस्टेंस' नियम

इन डिपो के संचालन में सबसे बड़ी अनदेखी छत्तीसगढ़ शासन के 'एयर डिस्टेंस' (Air Distance Rule) नियमों की हो रही है।

क्या है एयर डिस्टेंस नियम?

छत्तीसगढ़ खनिज (भंडारण) और पर्यावरण विभाग के नियमों के अनुसार, किसी भी कोल डिपो, क्रशर या खनिज भंडारण केंद्र की स्थापना के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्य मार्ग, घनी आबादी वाले क्षेत्रों (बस्तियों), स्कूल, अस्पताल और जल स्रोतों से एक निश्चित हवाई दूरी (Air Distance) बनाए रखना अनिवार्य है। आमतौर पर यह दूरी न्यूनतम 100 से 500 मीटर (श्रेणी के अनुसार) तय की गई है ताकि कोयले की डस्ट से होने वाले प्रदूषण और हादसों को रोका जा सके।

लेकिन बेलतरा, रतनपुर, मोहतराई और गतौरी क्षेत्र में संचालित ये डिपो एयर डिस्टेंस नियमों का खुला उल्लंघन कर रहे हैं। ये डिपो न सिर्फ आबादी और सड़कों के बेहद करीब हैं, बल्कि उड़ती कोल डस्ट से स्थानीय लोगों का जीना मुहाल हो गया है। खनिज विभाग की आंखों के सामने यह सब हो रहा है, लेकिन अधिकारी जानबूझकर आंखें मूंदे बैठे हैं।

सिंडिकेट चला रहा कोयला चोरी का खेल

इस अवैध एक्सटेंशन की आड़ में इन क्षेत्रों में कोयला चोरी और हेराफेरी का सिंडिकेट एक बार फिर सक्रिय हो गया है। बिना वैध रॉयल्टी और नियमों के डंप किए जा रहे कोयले को बेखौफ खपाया जा रहा है। ACB जैसी संस्था से जुड़े एक कर्मचारी का नाम इस पूरे स्कैंडल में सामने आने से यह मामला और भी संगीन हो जाता है। 

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