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कांकेर का सिपाही राजनांदगांव में दे रहा था विशेष सेवा, सट्टेबाजों से यारी पड़ गई भारी अब निलंबित.....
रायपुर। कांकेर में पदस्थ प्रधान आरक्षक विजय पांडे को सट्टेबाजों के साथ सांठगांठ और उनकी लग्जरी मेहमाननवाजी का लुत्फ उठाने के आरोप में सस्पेंड कर दिया गया है। इंटेलिजेंस चीफ अमित कुमार ने इस मामले में प्रशासनिक डंडा चलाते हुए न केवल निलंबन की कार्रवाई की, बल्कि संबंधित बड़े अधिकारियों को भी जमकर क्लास लगाई।
मामला प्रकाश में तब आया जब प्रधान आरक्षक की सट्टेबाजों से साथ दुबई टूर की तस्वीरें और वहां की ऐय्याशी की खबरें चर्चा में आई । गौर करने वाली बात यह है कि एक मामूली सिपाही बड़े अफसरों की नाक के नीचे लंबे समय से यह गैर-कानूनी नेटवर्क चला रहा था और जिम्मेदार अधिकारियों ने जानबूझकर आंखें मूंद रखी थीं।
सट्टेबाजों का खास सिपाही आखिर किसका था खास....
इस पूरे घटनाक्रम ने पुलिस महकमे की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। चर्चा है कि विजय पांडे राजनांदगांव में नए आईजी के पदभार संभालते ही वहां पहले दिन से सक्रिय हो गया था। कायदे से उसकी ड्यूटी कांकेर में थी, लेकिन वह मौखिक आदेशों के दम पर राजनांदगांव में अपनी सेवाएं दे रहा था। सूत्रों के मुताबिक, विभाग के कुछ रसूखदार अधिकारी इस सिपाही का इस्तेमाल सट्टा सिंडिकेट से वसूली और महीना बांधने के लिए कर रहे थे। अब सवाल यह है कि क्या बिना बड़े संरक्षण के एक प्रधान आरक्षक अंतरराष्ट्रीय सट्टेबाजों के साथ दुबई में छुट्टियां मना सकता है?
इंटेलिजेंस चीफ के तेवर से महकमे में मचा हड़कंप
ये मामला जब इंटेलिजेंस चीफ अमित कुमार तक पहुंचा, तो उन्होंने इसे अनुशासनहीनता की हद माना। बताया जा रहा है कि अमित कुमार ने तत्काल कड़ा रुख अपनाते हुए संबंधित अधिकारियों को तलब किया और फोन पर ही उनकी क्लास लगा दी। उन्होंने नाराजगी जताते हुए पूछा कि आखिर एक सिपाही उनकी जानकारी के बिना दूसरे जिले में रहकर गलत कार्य कैसे कर रहा था। इंटेलिजेंस चीफ अमित कुमार अपनी सख्त छवि के लिए जाने जाते हैं और उन्होंने साफ कहा है कि पुलिस की छवि खराब करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
ट्रांसफर गिरोह और मलाईदार पोस्टिंग का पुराना खेल अब भी जारी...
यह मामला सिर्फ एक सिपाही तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने प्रशासनिक ढांचे में फैले कुशासन की पोल खोल दी है। चर्चा है कि आज भी पोस्टिंग और ट्रांसफर के पीछे मोटी रकम और रसूख का खेल चल रहा है। यही कारण है कि कुछ खास अधिकारी बार-बार एसपी, एसएसपी और आईजी जैसे मलाईदार पदों पर कब्जा जमाए बैठे हैं। वहीं, दूसरी तरफ सैकड़ों ईमानदार अफसर सालों से मुख्यालय की धूल फांक रहे हैं। जब रसूख के दम पर नियुक्तियां होंगी, तो विजय पांडे जैसे प्यादे सट्टेबाजों के साथ ही नजर आएंगे।
कागजों पर सुशासन और हकीकत में मलाई का चक्कर
आईएएस और आईपीएस लॉबी में भी यह भेदभाव साफ दिखता है। जो एक बार मलाईदार कुर्सी पर बैठ गया, वह वहीं चिपका रहता है। शासन के ऊंचे पदों पर बैठे लोग ही तय कर रहे हैं कि किसे फील्ड में रखना है और किसे नेपथ्य में। कागजों पर सुशासन की बातें तो बहुत होती हैं, लेकिन जमीन पर यह पूरी तरह कुशासन में बदल चुका है। जब जिले के कप्तान ही अनैतिक कामों के लिए मातहतों का इस्तेमाल करेंगे, तो जनता का भरोसा टूटना तय है।
राष्ट्रीय जगत विजन ने खोली पोल, अब बड़े चेहरों पर नजर
इस पूरे मामले को राष्ट्रीय जगत विजन ने प्रमुखता से उठाया, जिसके बाद विभाग को यह बड़ी कार्रवाई करनी पड़ी। आम जनता का भरोसा सिस्टम से उठता जा रहा है क्योंकि रक्षक ही अब भक्षकों के साथ मजे उड़ा रहे हैं। अब देखना यह होगा कि क्या जांच सिर्फ एक छोटे कर्मचारी पर रुक जाएगी या उन बड़े चेहरों को भी बेनकाब किया जाएगा जो इस सट्टा सिंडिकेट के असली खिलाड़ी हैं। क्या सरकार इस सेटिंग बाज स्थानांतरण गिरोह पर लगाम लगाएगी या फिर मलाईदार पोस्टिंग का यह खेल यूं ही चलता रहेगा?
डिस्क्लेमर: यह समाचार रिपोर्टिंग केवल प्राप्त जानकारी, 'राष्ट्रीय जगत विजन' की रिपोर्ट और प्रशासनिक सूत्रों से मिली चर्चाओं पर आधारित है। इसका उद्देश्य किसी व्यक्ति की छवि खराब करना नहीं बल्कि प्रशासनिक विसंगतियों को उजागर करना है।
लेखक के विषय में
मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।
