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अंबिकापुर हाउसिंग बोर्ड में बिल पास करने की कीमत 60 हजार, इंजीनियर और बाबू रिश्वत लेते गिरफ्तार
अंबिकापुर में सरकारी सिस्टम की पोल एक बार फिर खुल गई है जहां काम के बदले दाम मांगना अधिकारियों को भारी पड़ गया। एंटी करप्शन ब्यूरो ने बुधवार को छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल के उपायुक्त पूनम चंद अग्रवाल और उनके खास सीनियर असिस्टेंट अनिल सिन्हा को 60 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया। ठेकेदार का लाखों का बिल अटकाकर ये अफसर मलाई खाने की फिराक में थे लेकिन एसीबी ने इनका खेल बिगाड़ दिया। ठेकेदार ने शिकायत की थी कि काम पूरा होने के बाद भी फाइल आगे बढ़ाने के लिए उससे कमीशन मांगा जा रहा है।
साहब ने एक लाख मांगे थे बाबू ने अपना रेट अलग से जोड़ लिया
ठेकेदार रवि कुमार ने एसीबी को बताया कि उसने साल 2023 में बलरामपुर जिले में तहसील भवन और लुण्ड्रा में कस्तूरबा गांधी स्कूल में कमरे बनाने का काम किया था। काम पूरा होने के बाद भी उसका करीब 35 लाख रुपए का भुगतान लटका हुआ था। इसी भुगतान की फाइल पर हस्ताक्षर करने और भौतिक सत्यापन के एवज में उपायुक्त पूनम चंद अग्रवाल ने सीधे एक लाख रुपए की मांग रख दी। ठेकेदार की मजबूरी का फायदा उठाते हुए बाद में सौदा 60 हजार रुपए में तय हुआ। एसीबी की टीम ने जाल बिछाया और रवि को पैसे लेकर भेजा।
साठ हजार लेते ही टीम ने दोनों को दबोचा
हैरानी की बात यह है कि उपायुक्त ने खुद पैसे न लेकर ठेकेदार को अपने बाबू अनिल सिन्हा के पास भेज दिया। यहां बाबू की नीयत भी डोल गई और उसने तय रकम से ज्यादा की मांग कर दी। उसने कहा कि 60 नहीं बल्कि 70 हजार रुपए लगेंगे। काफी बातचीत के बाद मामला 65 हजार पर टिका लेकिन आखिरकार जैसे ही 60 हजार रुपए का लेनदेन हुआ एसीबी ने दोनों को मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया। यह कार्रवाई बताती है कि सरकारी दफ्तरों में बिना सेवा पानी के फाइलें एक इंच भी नहीं सरकतीं। ठेकेदार काम पूरा करके भी अपने ही पैसे लेने के लिए दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
लेखक के विषय में
मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।
