रायपुर में गरीबों के निवाले पर अफसरों की मेहरबानी: दो दुकानों से गायब हुआ 54 लाख का राशन, सालभर बाद भी एफआईआर नहीं

रायपुर में गरीबों के निवाले पर अफसरों की मेहरबानी: दो दुकानों से गायब हुआ 54 लाख का राशन, सालभर बाद भी एफआईआर नहीं

रायपुर जिले के जोरा और छेरीखेड़ी इलाके की दो सरकारी राशन दुकानों से करीब 54 लाख रुपए का चावल और शक्कर गायब हो गया है लेकिन खाद्य विभाग के अफसर हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। पिछले एक साल से यह मामला दबा हुआ है पर आज तक जिम्मेदार दुकान संचालकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं कराई गई है। आलम यह है कि शहर से लेकर ब्लॉक तक 13 से ज्यादा ऐसे राशन दुकानदार हैं जिन्होंने सरकारी स्टॉक में हेराफेरी की लेकिन उन पर पुलिस कार्रवाई करने के बजाय विभाग रिकवरी का कागजी खेल खेल रहा है।

गरीब का पेट खाली और अफसरों की फाइलें भरी

रायपुर जिले में राशन घोटाले का यह खेल नया नहीं है। साल 2022 से लेकर 2024 के बीच कई दुकानों से भारी मात्रा में शक्कर, नमक और चावल कम पाए गए। कायदे से इन दुकानदारों का लाइसेंस रद्द कर जुर्माना वसूला जाना था और कानूनी कार्रवाई होनी थी लेकिन विभाग इसमें कोई रुचि नहीं ले रहा है। आंकड़ों की मानें तो विभाग को अभी कुल 42 सौ क्विंटल चावल की रिकवरी करनी है। इसमें से 24 सौ क्विंटल तो पिछले दो-तीन सालों का पुराना बकाया है। सबसे ज्यादा गड़बड़ी रायपुर शहर और धरसीवां इलाके में सामने आई है जहां के डीलर डंके की चोट पर राशन की हेराफेरी कर रहे हैं।

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मशीन पर अंगूठा नहीं लगा तो वृद्ध और बच्चे परेशान

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एक तरफ जहां राशन की चोरी हो रही है वहीं दूसरी तरफ असली हकदार राशन कार्ड लेकर भटक रहे हैं। राशन दुकानों में लगी पीओएस मशीन में कई लोगों के फिंगरप्रिंट मैच नहीं हो रहे हैं जिससे उन्हें राशन नहीं मिल पा रहा है। रोज दर्जनों लोग जिला कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं। इनमें सबसे ज्यादा संख्या बुजुर्गों और बच्चों की है। मेहनत-मजदूरी करने वाले लोगों के हाथों की लकीरें घिस जाने के कारण मशीन उनका अंगूठा स्वीकार नहीं करती। हालांकि विभाग अब चेहरा प्रमाणीकरण की बात कह रहा है लेकिन इसके बावजूद हितग्राहियों को समय पर चावल नहीं मिल पा रहा है।

तीन लाख से ज्यादा लोगों का केवाईसी अब भी अटका

जिले में राशन कार्डों के ई-केवाईसी का काम कछुआ चाल से चल रहा है। कुल 22 लाख से ज्यादा सदस्यों में से करीब 3 लाख 36 हजार लोगों का केवाईसी अभी भी बाकी है। इनमें हजारों ऐसे लोग हैं जिनका बायोमेट्रिक काम नहीं करने से प्रक्रिया अधूरी है। दिव्यांग और वृद्ध लोग दुकानों के चक्कर काट-काटकर थक चुके हैं। सरकार की सख्ती के बाद भी जमीनी स्तर पर राशन वितरण प्रणाली में भ्रष्टाचार और तकनीकी खामियों का अंबार लगा हुआ है।खाद्य विभाग के नियंत्रक भूपेंद्र मिश्रा ने बताया कि जिन दुकानों में राशन की गड़बड़ी मिली है वहां लगातार रिकवरी का काम किया जा रहा है।

डिस्क्लेमर: यह समाचार रिपोर्टिंग उपलब्ध विभागीय आंकड़ों और जनशिकायतों पर आधारित है। इसका उद्देश्य व्यवस्था की खामियों को उजागर करना है।

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