रायगढ़ में पेलमा खदान की जनसुनवाई पर भारी विवाद कोरबा के बाउंसरों के पहरे में ग्रामीणों की आवाज दबाने का आरोप

रायगढ़ में पेलमा खदान की जनसुनवाई पर भारी विवाद कोरबा के बाउंसरों के पहरे में ग्रामीणों की आवाज दबाने का आरोप

रायगढ़। रायगढ़ जिले के तमनार में एसईसीएल के पेलमा खदान प्रोजेक्ट के लिए हुई पर्यावरण जनसुनवाई बड़े विवादों में घिर गई है। कागजों पर यह कार्यक्रम भारत सरकार की कंपनी एसईसीएल का था। लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि वहां पूरा नियंत्रण एक निजी कॉरपोरेट कंपनी के हाथ में था। किसानों और ग्रामीणों की आवाज सुनने के बजाय यह जनसुनवाई एक तय नाटक की तरह नजर आई जहां बाउंसरों के शोर में असली प्रभावित लोगों की आवाज दब गई।

पुलिस रही दूर बाउंसरों ने संभाला पंडाल

जनसुनवाई में सुरक्षा के नाम पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। प्रशासन ने पहले ही गांव वालों को हिदायत दी थी कि बाहरी लोगों को प्रवेश नहीं मिलेगा। लेकिन मौके पर नजारा बिल्कुल अलग था। पंडाल के अंदर और बाहर की सुरक्षा का जिम्मा पुलिस के बजाय कोरबा से बुलाए गए बाउंसरों के हाथ में था।

Read More 20 लाख के कर्ज ने बनाया कातिल, पैसे देने से किया इनकार, तो टीचर और बेटे को उतरा मौत के घाट

वहां महिला और पुरुष बाउंसर बड़ी संख्या में तैनात थे। हालत यह थी कि अगर कोई ग्रामीण या महिला अपने मोबाइल से वहां का वीडियो बनाने की कोशिश करती तो बाउंसर तुरंत उसे घेर लेते थे। पुलिस वहां सिर्फ खड़े होकर सब कुछ चुपचाप देखती रही। किसानों के समर्थकों को बाहरी बताकर रोक दिया गया लेकिन निजी कंपनी के बाउंसरों को पूरी छूट मिली हुई थी।

Read More अमृतसर से चिट्टा लाकर बिलासपुर में ग्राहक तलाश रहा था तस्कर, पहुंच गई पुलिस

छह घंटे की सुनवाई में चार घंटे तक अपनों का भाषण

इस जनसुनवाई के तरीके पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। करीब छह घंटे तक चले इस कार्यक्रम में शुरू के चार घंटे सिर्फ छह से सात लोगों ने ही ले लिए। ये लोग माइक पकड़कर एक से दो घंटे तक भाषण देते रहे।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह एक सोची समझी रणनीति थी। ऐसा इसलिए किया गया ताकि समय खत्म हो जाए और खदान से जिनका असल में नुकसान होने वाला है उन किसानों को बोलने का मौका ही न मिले। पंडाल में भीड़ दिखाने के लिए जिन लोगों को बैठाया गया था उनमें से ज्यादातर लोग दूसरे प्लांट से लाए गए कर्मचारी और मजदूर थे।

प्रशासन के रवैये पर उठे सवाल

इस पूरे घटनाक्रम के बाद प्रशासन के काम करने के तरीके पर लोग सवाल उठा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कुछ समय पहले जब एक बड़े फिल्म एक्टर अपनी फिल्म की शूटिंग के लिए रायगढ़ की खदानों में आए थे तो प्रशासन ने उनके लिए सारे नियम किनारे कर दिए थे। उनके लिए खदानों के दरवाजे खोल दिए गए थे।

लेकिन आज जब तमनार के आदिवासी और किसान अपनी जमीन और जंगल बचाने की गुहार लगाने जनसुनवाई में पहुंचे तो उन्हें बाहरी बताकर बाउंसरों के धक्के खाने के लिए छोड़ दिया गया। कुल मिलाकर यह जनसुनवाई एक खानापूर्ति बनकर रह गई है जिससे इलाके के किसानों में भारी नाराजगी है।

Tags:

Latest News

एक साल में करीब 47 अपचारी बालक फरार, अब दीवारों पर कंटीले तारों की घेराबंदी, खिड़की, दरवाजे और रोशनदान भी किए जा रहे मजबूत एक साल में करीब 47 अपचारी बालक फरार, अब दीवारों पर कंटीले तारों की घेराबंदी, खिड़की, दरवाजे और रोशनदान भी किए जा रहे मजबूत
दीपावली पर नहीं चलेगी बाजारों में मनमानी, सड़क पर टेंट-सामान लगाया तो बढ़ेगी मुश्किलें  
शिक्षिका से छेड़खानी में दोषी शिक्षक बर्खास्त, कोर्ट की सजा के बाद विभाग ने की कार्रवाई
छत्तीसगढ़ में वन विभाग में बड़ा फेरबदल, 102 वनक्षेत्रपालों के तबादले
निर्माण कार्यों में तेजी लाने PWD ने किए 91 उप अभियंताओं के तबादले
शिक्षकों के डेटा पर किसकी नजर? साइबर ठगों के निशाने पर पूरा शिक्षक वर्ग
बिलासा एयरपोर्ट पर खड़ा रहेगा अलायंस एयर का विमान, दिल्ली से आएगी इंजीनियरों की टीम
धान बेचने जा रहे किसानों के लिए जरूरी खबर, अब OTP से नहीं होगा सत्यापन
पिकअप के गुप्त चेंबर में छिपे थे 4 करोड़ रुपये, आधी रात पुलिस की कार्रवाई से मचा हड़कंप
अमृतसर से चिट्टा लाकर बिलासपुर में ग्राहक तलाश रहा था तस्कर, पहुंच गई पुलिस
बिरयानी की चाह में युवक की हत्या, 24 घंटे में पुलिस ने सुलझाई गुत्थी, चाकू और बाइक जब्त
सत्ता की मलाई का संग्राम, प्रभारी मंत्री के खिलाफ अपनों ने ही खोला मोर्चा!