शराब घोटाला, पूर्व मंत्री लखमा को सामान-मिठाई से मिले 64 करोड़; EOW का चौथा चालान पेश
रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय (EOW) ने मंगलवार को रायपुर की स्पेशल कोर्ट में करीब 1100 पन्नों का चौथा पूरक चालान पेश किया । इस चालान में पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा के घोटाले में शामिल होने के पुख्ता सबूत पेश किए गए हैं। चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि लखमा को 'सामान' और मिठाई जैसे कोडवर्ड के जरिए 64 करोड़ रुपये का कमीशन मिला। EOW की चार्जशीट के मुताबिक, कवासी लखमा के बंगले पर हर महीने 2 करोड़ रुपये कैश पहुंचते थे, जिसे आबकारी विभाग के कर्मचारी रोजमर्रा के सामान और शराब के साथ पैसों के बैग में सरकारी गाड़ियों से सीधे बंगले के अंदर पहुंचाते थे।
बंगले तक कैसे पहुंचता था कमीशन का खेल? EOW ने खोले राज
चार्जशीट में EOW ने विस्तार से बताया है कि मंत्री बंगले तक यह काला धन कैसे पहुंचता था। यह खेल दो मुख्य हिस्सों में बंटा हुआ था:
पार्ट 1: नकली होलोग्राम से 50 लाख महीना
शराब दुकानों में सिंडिकेट 'डुप्लीकेट होलोग्राम' वाली शराब बेचता था, जिसे सिंडिकेट के सदस्यों ने 'बी पार्ट शराब' नाम दिया था। इस 'बी पार्ट' शराब की बिक्री पर CSMCL को प्रति पेटी 150 रुपये मिलते थे। इस पैसे के एवज में, तत्कालीन आबकारी मंत्री कवासी लखमा को हर महीने 50 लाख रुपये दिए जाते थे। यह पैसा एमडी अरुण पति त्रिपाठी के निर्देश पर आबकारी अधिकारी जनार्दन कौरव और इकबाल खान एजेंटों की मदद से इकट्ठा कराते थे। पैसा आबकारी सब इंस्पेक्टर कन्हैया लाल कुर्रे के माध्यम से ओएसडी जयंत देवांगन को दिया जाता था, जो फिर इसे मंत्री तक पहुंचाते थे।
पार्ट 2: अनवर ढेबर भेजता था डेढ़ करोड़ महीना
चार्जशीट के दूसरे हिस्से में बताया गया है कि शासकीय शराब दुकानों से बेची गई पार्ट बी शराब में हर महीने अनवर ढेबर डेढ़ करोड़ रुपये आबकारी मंत्री को भेजता था। यह पैसा सिंडिकेट के मुख्य कर्ताधर्ता अरविंद सिंह और विकास अग्रवाल द्वारा अमित सिंह को दिया जाता था। अमित सिंह यह पैसा प्रकाश शर्मा उर्फ छोटू की मदद से महिंद्रा बस सर्विसेज के मालिक इंदरदीप सिंह गिल उर्फ इनू और कमलेश नाहटा की बताई गई जगहों पर पहुंचाता था। यह रकम हर महीने डेढ़ करोड़ रुपये थी, जो सीधे ओएसडी जयंत देवांगन को मंत्री बंगले में लाकर छोड़ी जाती थी।
पैसा पहुंचने के बाद होता था 'वॉट्सऐप' पर कन्फर्मेशन
ईडी की चार्जशीट के अनुसार, जो भी व्यक्ति ओएसडी जयंत देवांगन के पास पैसा लेकर जाता था, वह पैसों के बंडल की जांच कराने के बाद वॉट्सऐप कॉल के माध्यम से उसका कन्फर्मेशन देता था। यह कन्फर्मेशन शेख सकात (कवासी लखमा के सुरक्षा अधिकारी) के मोबाइल के माध्यम से होती थी और इसकी पुष्टि खुद लखमा करते थे।
अवैध कमाई को ऐसे लगाया ठिकाने: करोड़ों की जमीन, मकान, और निवेश
EOW अधिकारियों ने लखमा के 27 करीबियों से बयान लेकर इस बात का साक्ष्य जुटाया है कि तत्कालीन मंत्री ने इस रकम को जमीन, मकान और भरोसेमंद लोगों के ऊपर इन्वेस्ट करके ठिकाने लगाया। चार्जशीट के मुताबिक, लखमा ने अपने बेटे के लिए 1.4 करोड़ रुपये और खुद के लिए 2.24 करोड़ रुपये में मकान बनाया। बहू बेटियों समेत कई कारोबारियों के नाम पर 18 करोड़ रुपये का निवेश किया गया। EOW की चार्जशीट में यह भी खुलासा हुआ है कि कवासी लखमा ने हवाई यात्राओं पर 48 लाख रुपये से ज्यादा खर्च किए। 2023 में 41 लाख 94 हजार 211 रुपये की बुकिंग की गई, जिसमें से 28 लाख 30 हजार 140 रुपये का नकद भुगतान किया गया।
कैसे हुआ था 2000 करोड़ का घोटाला?
छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में ईडी जांच कर रही है। ईडी ने एसीबी में एफआईआर दर्ज कराई है, जिसमें 2 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा के घोटाले की बात कही गई है। ईडी ने अपनी जांच में पाया कि तत्कालीन भूपेश सरकार के कार्यकाल में आईएएस अफसर अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के एमडी एपी त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर के सिंडिकेट के जरिए इस घोटाले को अंजाम दिया गया था। घोटाले को ए, बी और सी कैटेगरी में बांटकर अंजाम दिया गया:
ए: डिस्टलरी संचालकों से कमीशन: 2019 में डिस्टलरी संचालकों से प्रति पेटी 75 रुपये और बाद के सालों में 100 रुपये कमीशन लिया जाता था
बी: नकली होलोग्राम वाली शराब: डिस्टलरी मालिकों से ज्यादा शराब बनवाई जाती थी। नकली होलोग्राम लगाकर सरकारी दुकानों से इसकी बिक्री करवाई जाती थी।
सी: अवैध बिक्री से मुनाफा: सिंडिकेट ने दुकान कर्मचारियों और आबकारी अधिकारियों की मिलीभगत से 40 लाख पेटी से अधिक अवैध शराब बेची, जिससे भारी मुनाफा कमाया गया।
इस मामले में 2024 में आईटीएस अधिकारी अरुणपति त्रिपाठी, बीएसपी कर्मी अरविंद सिंह, कारोबारी अनवर ढेबर, त्रिलोक सिंह ढिल्लन, अनुराग द्विवेदी, अमित सिंह, दीपक दुआरी, दिलीप पांडेय, रिटायर आईएएस अनिल टुटेजा, सुनील दत्त जैसे कई बड़े नामों को गिरफ्तार किया गया था। 2025 में तत्कालीन आबकारी मंत्री कवासी लखमा और कारोबारी विजय भाटिया को गिरफ्तार किया गया है। कोर्ट में सुनवाई के दौरान कवासी लखमा ने जज से भावुक होकर कहा था कि "मैं पाकिस्तान का नहीं, भारतीय हूं।" अब देखना होगा कि इस नए चालान के बाद यह घोटाला और कितने बड़े नामों का खुलासा करता है। मामले में आगे की जांच जारी है।
