सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर बिलासपुर पहुंची CBI की टीम की जांच तेज: 6 लीटर महुआ शराब के आरोप में हुई मौत के राज से उठेगा पर्दा, सेंट्रल जेल में 3 घंटे तक हुई सघन पूछताछ
बिलासपुर।महज 6 लीटर कच्ची महुआ शराब की जब्ती... और कस्टडी में व्यक्ति की मौत हो जाना ! ऊपर से देखने में यह भले ही किसी थाने का सामान्य और मामूली केस लगे, लेकिन इस घटना की गूंज अब देश की सर्वोच्च अदालत से होते हुए सबसे बड़ी जांच एजेंसी सीबीआई (CBI) के दफ्तर तक पहुंच चुकी है। बिलासपुर सेंट्रल जेल में हुई श्रवण सूर्यवंशी की संदिग्ध मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख के बाद सीबीआई ने जांच का जिम्मा उठाया है। बीते शुक्रवार को सीबीआई की विशेष टीम के बिलासपुर पहुंचते ही पुलिस और जेल महकमे में हड़कंप मच गया है।
सीबीआई का एक्शन
शुक्रवार सुबह सीबीआई की तीन सदस्यीय टीम पूरे एक्शन मोड में बिलासपुर पहुंची। इस हाई-प्रोफाइल जांच टीम का नेतृत्व डीएसपी (DSP) रैंक के एक तेजतर्रार अधिकारी कर रहे थे, जिनके साथ दो अन्य सहयोगी स्टाफ भी मौजूद थे। टीम ने किसी भी तरह की देरी किए बिना सीधा सिविल लाइन थाना प्रभारी से सुबह 11 बजे संपर्क साधा। यहां मामले से जुड़ी प्रारंभिक जानकारी, एफआईआर (FIR) की कॉपी और अहम दस्तावेजों को सीबीआई ने अपनी सुरक्षा में ले लिया, ताकि सबूतों से छेड़छाड़ की कोई गुंजाइश ना बचे।
इसके बाद, जांच की आंच बिलासपुर के केंद्रीय जेल (सेंट्रल जेल) तक जा पहुंची। सीबीआई की टीम ने जेल परिसर में करीब तीन घंटे तक मामले के तफ़सीस की
इस तीन घंटों के जांच में जेल बढ़े छोटे सभी अधिकारी-कर्मचारियों से पूछताछ हुई, जो घटना के समय ड्यूटी पर तैनात थे। टीम ने जेल के एंट्री रजिस्टर, बैरक की जानकारी, मेडिकल रिकॉर्ड और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेजों को भी बारीकी से खंगाला।
फ्लैशबैक: 6 लीटर शराब से मौत तक का वो सफर
यह पूरा घटनाक्रम स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा सवालिया निशान लगाता है। घटना 18 जनवरी 2024 की है सीपत थाने के हेड कांस्टेबल उमाशंकर राठौर ने रूटीन चेकिंग के दौरान श्रवण सूर्यवंशी को रोका था। पुलिस के दावों के मुताबिक, तलाशी में उसके पास से तीन बोतलों में भरी कुल 6 लीटर कच्ची महुआ शराब बरामद की गई थी। आबकारी एक्ट के तहत पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की और श्रवण को गिरफ्तार कर लिया। रिमांड की औपचारिकताएं पूरी करने के बाद पुलिस ने श्रवण को बिलासपुर केंद्रीय जेल भेजा।
संदिग्ध मौत और अनसुलझे सवाल
गिरफ्तारी के समय सामान्य दिखने वाला श्रवण जब जेल पहुंचा, तो महज तीन दिन बाद ही यानी 21 जनवरी 2024 को अचानक उसकी तबीयत बिगड़ने की खबर आई। आनन-फानन में जेल प्रशासन ने उसे सिम्स (CIMS) अस्पताल में भर्ती कराया। लेकिन, अगले ही दिन 22 जनवरी को इलाज के दौरान श्रवण ने दम तोड़ दिया। एक स्वस्थ व्यक्ति का जेल जाने के तीन दिन बाद अचानक इस तरह मर जाना कई संदेह पैदा करता है।
क्यों पड़ी CBI जांच की जरूरत?
हिरासत में मौत (Custodial Death) के मामले हमेशा से गंभीर रहे हैं। लोकल पुलिस या जेल प्रशासन की विभागीय जांच पर अक्सर लीपापोती के आरोप लगते हैं। यही कारण है कि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की गंभीरता को समझते हुए सीधे सीबीआई जांच के आदेश दिए हैं। मामूली शराब जब्ती के मामले में आरोपी की मौत ने पुलिसिया कार्रवाई को कटघरे में खड़ा कर दिया है। क्या जेल के भीतर उसके साथ कोई ज्यादती हुई? या मेडिकल सुविधा मिलने में जानबूझकर देरी की गई?
