कोरबा मेडिकल कॉलेज में 2 करोड़ के डाइट टेंडर पर बवाल, चहेते ठेकेदार को फायदा पहुंचाने के आरोप

कोरबा मेडिकल कॉलेज में 2 करोड़ के डाइट टेंडर पर बवाल, चहेते ठेकेदार को फायदा पहुंचाने के आरोप

कोरबा। शासकीय मेडिकल कॉलेज अस्पताल में मरीजों के खाने-पीने के इंतजाम से जुड़ा करीब 2 करोड़ रुपये का टेंडर विवादों में फंस गया है। आरोप लग रहे हैं कि जेम पोर्टल के जरिए होने वाली इस टेंडर प्रक्रिया को सिर्फ दिखावा बनाकर एक मनपसंद ठेकेदार को काम सौंपने की तैयारी कर ली गई है। इस पूरे खेल में नियमों को ताक पर रखकर पारदर्शिता की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।

ऐन वक्त पर दी मीटिंग की सूचना

मामले में सबसे ज्यादा सवाल टेंडर प्रक्रिया की टाइमिंग को लेकर उठ रहे हैं। जानकारी के मुताबिक इस काम के लिए आधिकारिक बैठक का नोटिस 12 जनवरी की शाम 5 बजकर 29 मिनट पर जारी किया गया। जबकि सूत्रों का कहना है कि इस टेंडर को लेकर एक गुप्त मीटिंग 8 जनवरी को ही निपटा ली गई थी। इतनी देरी से सूचना देने की वजह से दूसरी एजेंसियां इस प्रक्रिया में शामिल ही नहीं हो पाईं और मुकाबला खत्म हो गया।

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नोडल अधिकारी पर लग रहे गंभीर आरोप

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अस्पताल के ही एक चर्चित नोडल अधिकारी इस समय चर्चा के केंद्र में हैं। उन पर आरोप है कि उन्होंने टेंडर की शर्तों में जानबूझकर ऐसे बदलाव किए हैं जिससे केवल एक खास ठेकेदार ही रेस में बचा रहे। बताया जा रहा है कि यह काम पिछले दो साल से एक्सटेंशन के भरोसे चल रहा था। अब जब नया टेंडर निकाला गया तो उसमें पारदर्शिता बरतने के बजाय सिस्टम को ही उलझा दिया गया।

पुराने टेंडरों में भी रहा है विवादों का नाता

मेडिकल कॉलेज अस्पताल में यह कोई पहली गड़बड़ी नहीं है। इससे पहले सफाई और सुरक्षा से जुड़े टेंडर भी लंबे समय तक एक्सटेंशन पर चलाए जाते रहे। उन मामलों में भी भ्रष्टाचार और मनमानी की शिकायतें शासन तक पहुंची थीं। अब डाइट टेंडर में भी वही पुराना पैटर्न दोहराया जा रहा है जिससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उंगलियां उठ रही हैं।

मरीजों की सेहत और सरकारी खजाने का सवाल

जिस जेम पोर्टल को सरकार ने भ्रष्टाचार रोकने के लिए बनाया था, अब उसी का इस्तेमाल गलत तरीके से टेंडर सेटिंग के लिए होने के आरोप लग रहे हैं। करीब 2 करोड़ रुपये के इस बड़े टेंडर में हो रही जल्दबाजी ने कई संदेह पैदा कर दिए हैं। स्थानीय लोगों और अन्य ठेकेदारों ने अब स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है ताकि सरकारी पैसे का बंदरबांट रोका जा सके।

 

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