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विधानसभा में गूंजा ड्रग्स सिंडिकेट का मामला, फिर चर्चा में ‘ड्रग्स क्वीन’ नव्या मलिक: 320 हाईप्रोफाइल नामों की फाइल तैयार, लेकिन VVIP तक नहीं पहुंची जांच की आंच
रायपुर। राजधानी रायपुर से जुड़े हाईप्रोफाइल ड्रग्स सिंडिकेट का मामला एक बार फिर राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का केंद्र बन गया है। विधानसभा में पूर्व मुख्यमंत्री Bhupesh Baghel द्वारा उठाए गए सवाल के बाद पूरे केस की परतें दोबारा खुलने लगी हैं। हालांकि, पुलिस जांच और चार्जशीट में बड़े खुलासों के बावजूद कई अहम सवाल अब भी अनुत्तरित हैं, खासतौर पर उन वीवीआईपी नामों को लेकर, जिन तक जांच की आंच अब तक नहीं पहुंची है।
टेक्नो पार्टी से अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क तक
पुलिस जांच के अनुसार कथित ‘ड्रग्स क्वीन’ नव्या मलिक और उसकी सहयोगी विधि अग्रवाल पर दिल्ली-हरियाणा नेटवर्क से मादक पदार्थ मंगाकर रायपुर में हाईप्रोफाइल टेक्नो पार्टियों के जरिए सप्लाई करने का आरोप है। फार्महाउस, रिसॉर्ट और निजी क्लबों में आयोजित इन पार्टियों में चुनिंदा लोगों को ही एंट्री दी जाती थी और ऑर्डर के आधार पर ड्रग्स उपलब्ध कराए जाते थे।
चार्जशीट में विदेशी कनेक्शन, संदिग्ध ट्रांजेक्शन और विदेश यात्राओं का भी उल्लेख किया गया है। जांच एजेंसियों ने नव्या की तुर्की, दुबई सहित कई देशों की यात्राओं की जानकारी विदेश मंत्रालय के माध्यम से जुटाई है।
गिरफ्तारी की पूरी कहानी
23 अगस्त को हरियाणा निवासी मोनू विश्नोई ट्रेन से ड्रग्स लेकर रायपुर पहुंचा था। पुलिस पहले से इनपुट पर निगरानी कर रही थी। एक्सप्रेस-वे के पास ट्रैप लगाकर मोनू विश्नोई, हर्ष आहूजा और दीप धनोरिया को गिरफ्तार किया गया था। कार्रवाई के बाद मुख्य आरोपी नव्या मलिक मुंबई फरार हो गई थी, जिसे बाद में उसके मंगेतर अयान परवेज के जरिए लोकेशन ट्रेस कर गिरफ्तार किया गया। इसके बाद 4 सितंबर को विधि अग्रवाल की गिरफ्तारी हुई और पूरे नेटवर्क में कार्रवाई करते हुए कुल 43 आरोपियों को पकड़ा गया। पुलिस ने एक करोड़ रुपए से अधिक कीमत का ड्रग्स जब्त करने का दावा किया।
320 संदिग्धों की सूची, लेकिन पूछताछ ठंडे बस्ते में
जांच के दौरान चैट, कॉल डिटेल और वित्तीय लेनदेन के आधार पर करीब 320 बड़े-छोटे लोगों की सूची तैयार की गई थी। इनमें प्रभावशाली कारोबारी परिवारों, नेताओं और वरिष्ठ अधिकारियों से जुड़े युवाओं के नाम शामिल बताए गए। पुलिस की योजना इन सभी को बुलाकर काउंसिलिंग और पूछताछ करने की थी, लेकिन अब तक न तो व्यापक पूछताछ हुई और न ही किसी वीवीआईपी चेहरे पर कार्रवाई दिखाई दी। सूत्रों के मुताबिक, यही वजह है कि मामला लगातार सवालों के घेरे में बना हुआ है।
विधानसभा में उठा सवाल, जवाब में नाम गायब
विधानसभा में जब इस पूरे ड्रग्स नेटवर्क को लेकर सवाल उठाया गया, तब सरकार की ओर से लिखित जवाब प्रस्तुत किया गया, लेकिन उसमें मुख्य आरोपी नव्या मलिक का नाम तक शामिल नहीं था। इसी तथ्य ने जांच की दिशा और पारदर्शिता पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
VVIP तक क्यों नहीं पहुंची जांच?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब जांच एजेंसियों के पास हाईप्रोफाइल संपर्कों, विदेश यात्राओं और नियमित ड्रग्स खरीद के प्रमाण मौजूद बताए जा रहे हैं, तो फिर अब तक उन वीवीआईपी लोगों से न पूछताछ हुई और न ही जांच की आंच उनके दरवाजे तक पहुंची। मामले में सामने आया है कि कुछ कथित उपभोक्ता हर महीने 10 से 20 लाख रुपए तक नशे पर खर्च कर रहे थे, फिर भी कार्रवाई सीमित दायरे में ही सिमटकर रह गई है।
लेखक के विषय में
मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।
