ईरान का बड़ा सैन्य जवाब: दुबई-दोहा समेत खाड़ी देशों पर मिसाइल और ड्रोन हमले, अमेरिकी ठिकाने बने मुख्य निशाना
नई दिल्ली। मध्य-पूर्व में तनाव अब खुली सैन्य टकराव की स्थिति में पहुंचता नजर आ रहा है। ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए खाड़ी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर मिसाइल और ड्रोन हमले शुरू कर दिए हैं। ताजा हमलों में अमेरिका के सहयोगी देशों संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और कतर को निशाना बनाया गया, जिससे पूरे क्षेत्र में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है।
दुबई और दोहा में गूंजे धमाके
रिपोर्ट्स के मुताबिक दुबई, अबूधाबी और कतर की राजधानी दोहा में कई जोरदार धमाकों की आवाजें सुनी गईं। ईरान द्वारा दागी गई मिसाइलों और ड्रोन को खाड़ी देशों की एयर डिफेंस सिस्टम ने बड़े स्तर पर इंटरसेप्ट किया, हालांकि कुछ स्थानों पर मलबा गिरने से आग और नुकसान की घटनाएं सामने आई हैं। दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट, जेबेल अली पोर्ट और पाम जुमेराह क्षेत्र के आसपास मामूली क्षति और घायल होने की खबरें भी सामने आई हैं।
अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर केंद्रित हमला
ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ने दावा किया है कि कार्रवाई का मुख्य लक्ष्य खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकाने थे। कतर और कुवैत स्थित अमेरिकी बेसों पर बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन हमले किए गए। ईरान ने इसे “प्रतिशोधात्मक सैन्य अभियान” बताते हुए कहा कि अमेरिका और उसके सहयोगियों को क्षेत्रीय संघर्ष में शामिल होने की कीमत चुकानी होगी।
क्षेत्रीय हवाई यातायात प्रभावित
हमलों के बाद UAE, कतर और आसपास के कई देशों ने एहतियातन एयरस्पेस आंशिक रूप से बंद कर दिया। कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द या डायवर्ट की गईं, जबकि एयरपोर्ट और रणनीतिक प्रतिष्ठानों पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
खाड़ी देशों और दुनिया की प्रतिक्रिया
सऊदी अरब सहित कई खाड़ी देशों ने ईरान की कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए इसे क्षेत्रीय स्थिरता के लिए गंभीर खतरा बताया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने भी स्थिति को बेहद संवेदनशील बताते हुए तत्काल तनाव कम करने की अपील की है।
युद्ध के व्यापक होने का खतरा
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ता टकराव अब पूरे मध्य-पूर्व को बड़े सैन्य संघर्ष की ओर धकेल सकता है। लगातार हो रहे मिसाइल और ड्रोन हमलों ने खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा, तेल बाजार और वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। फिलहाल, दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या यह टकराव सीमित जवाबी कार्रवाई तक रहेगा या पूर्ण क्षेत्रीय युद्ध में बदल सकता है।
