छत्तीसगढ़ से कोलकाता तक फैला ऑनलाइन सट्टा नेटवर्क, ‘डायमंड 7777’ का मास्टरमाइंड पुलिस की पकड़ से क्यों दूर ?

छत्तीसगढ़ से कोलकाता तक फैला ऑनलाइन सट्टा नेटवर्क, ‘डायमंड 7777’ का मास्टरमाइंड पुलिस की पकड़ से क्यों दूर ?

दुर्ग/रायपुर। छत्तीसगढ़ में अवैध सट्टेबाजी का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। रायपुर और दुर्ग से जुड़े एक बड़े ऑनलाइन बेटिंग रैकेट का खुलासा हुआ है, जिसमें ‘डायमंड 7777’ नाम का प्लेटफॉर्म चर्चा में है। पुलिस जांच में दुर्ग के रवि सोनकर को इस नेटवर्क का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है, जो फिलहाल फरार है और राज्य से बाहर बैठकर पूरे सिस्टम को संचालित करने की आशंका है। रायपुर में दर्जनों सट्टा पैनल एक्टिव होने की बात सामने आने के बाद पुलिस ने जांच तेज कर दी है।

2500 से 8000 रुपये में मिल रहा सट्टा पैनल
जानकारी के अनुसार ऑनलाइन Satta चलाने के लिए अलग-अलग कीमतों पर पैनल बेचे जा रहे हैं। करीब 2500 से 8 हजार रुपये में मिलने वाले इन पैनलों के जरिए क्रिकेट, फुटबॉल, ऑनलाइन कैसिनो और लूडो जैसे Games पर दांव लगवाया जाता है। पैनल खरीदने वाले व्यक्ति को वर्चुअल कॉइन या क्रेडिट दिए जाते हैं, जिनके माध्यम से वह अपने स्तर पर खिलाड़ियों को जोड़कर सट्टा चला सकता है।image

रायपुर में 25 से ज्यादा पैनल एक्टिव होने की आशंका
हाल ही में रायपुर पुलिस ने ऑनलाइन सट्टेबाजी से जुड़े एक पैनल को पकड़कर जांच शुरू की थी। पूछताछ में सामने आया कि यह पैनल दुर्ग निवासी रवि सोनकर के नेटवर्क से जुड़ा हुआ था। जांच एजेंसियों को शक है कि सिर्फ रायपुर में ही 25 से अधिक पैनल सक्रिय हो सकते हैं। इसके अलावा दुर्ग, भिलाई और आसपास के जिलों में भी यह नेटवर्क फैल चुका है।

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कोलकाता से ऑपरेट हो रहा नेटवर्क
पुलिस सूत्रों का कहना है कि रवि सोनकर फिलहाल राज्य से बाहर रहकर अपने नेटवर्क को संचालित कर रहा है। शुरुआती जानकारी के अनुसार वह कोलकाता में छिपकर ऑनलाइन सट्टे के पूरे सिस्टम को कंट्रोल कर रहा है। उसकी तलाश में रायपुर और दुर्ग पुलिस की संयुक्त टीमें लगातार दबिश दे रही हैं।04_02_2025-online_satta_news_4_feb

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सोशल मीडिया और व्हाट्सएप से जोड़े जाते हैं खिलाड़ी
ऑनलाइन सट्टे के इस नए मॉडल में सबसे पहले एक डिजिटल एप या वेबसाइट बनाई जाती है। इसके बाद अलग-अलग शहरों में एजेंटों को पैनल उपलब्ध कराए जाते हैं। पैनल ऑपरेटर सोशल मीडिया, टेलीग्राम और व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए खिलाड़ियों को जोड़ते हैं। खिलाड़ी अलग-अलग गेम्स पर दांव लगाते हैं और हर ट्रांजैक्शन पर पैनल ऑपरेटर को कमीशन मिलता है।

रोजाना लाखों का कारोबार
पुलिस के मुताबिक रवि सोनकर पहले पारंपरिक तरीके से सट्टा चलाता था, लेकिन समय के साथ उसने अपना नेटवर्क ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर शिफ्ट कर लिया। अनुमान है कि उसके नेटवर्क से हर दिन 10 से 15 लाख रुपये तक का लेनदेन हो रहा है। स्थानीय स्तर पर एक युवक हर्ष इस पूरे सिस्टम के संचालन में अहम भूमिका निभा रहा है और सटोरियों के संपर्क में रहता है।orig_online-casinos-1467291729835x547_1606948325

म्यूल बैंक खातों से हो रहा ट्रांजैक्शन
ऑनलाइन सट्टे में सीधे बैंक खाते का इस्तेमाल कम किया जाता है। इसके लिए तथाकथित ‘म्यूल अकाउंट’ यानी किराए के बैंक खातों का सहारा लिया जाता है।सूत्रों के मुताबिक कई युवक कमीशन लेकर ऐसे खाते उपलब्ध करा रहे हैं, जिनके जरिए सट्टे की रकम ट्रांसफर की जाती है। इससे असली संचालकों तक पहुंचना जांच एजेंसियों के लिए चुनौती बन जाता है।

महादेव एप के बाद नए प्लेटफॉर्म सक्रिय
महादेव सट्टा एप पर देशभर में कार्रवाई होने के बाद कई नए प्लेटफॉर्म सामने आए हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि महादेव एप से जुड़े कुछ ऑपरेटरों ने अपने कारोबार का बड़ा हिस्सा विदेशों में शिफ्ट कर दिया है। बताया जा रहा है कि नेटवर्क के कुछ हिस्से अब श्रीलंका से संचालित किए जा रहे हैं।orig_12-1_1772839234

पुलिस का दावा- जल्द होगी गिरफ्तारी
रायपुर के सहायक पुलिस आयुक्त संजय सिंह के अनुसार ऑनलाइन सट्टे की जांच में रवि सोनकर का नाम प्रमुख रूप से सामने आया है। पुलिस के मुताबिक पहले पकड़े गए सटोरियों से पूछताछ में भी यही जानकारी मिली है कि कई पैनल उसी के माध्यम से उपलब्ध कराए गए थे। पुलिस टीम उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार प्रयास कर रही है।

पहले भी हो चुका है बड़ा खुलासा
राजनांदगांव पुलिस ने जुलाई 2025 में पहली बार शिवाय बुक से जुड़े एक बड़े नेटवर्क का खुलासा किया था। उस कार्रवाई में करीब 20 करोड़ रुपये के लेनदेन का मामला सामने आया था। जांच में पता चला था कि इस नेटवर्क का संचालन दुर्ग जिले के अंडा क्षेत्र से किया जा रहा था। बाद में आरोपी ऐप का नाम बदलकर नए पैनलों के जरिए ऑनलाइन जुआ संचालित करने लगे।

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