NJV एक्सक्लूसिव:PWD में 13 करोड़ का बड़ा टेंडर घोटाला, ब्लैकलिस्टेड कंपनी ने झूठे शपथपत्र पर हथियाए काम, अब 7 दिन का अल्टीमेटम

NJV एक्सक्लूसिव:PWD में 13 करोड़ का बड़ा टेंडर घोटाला, ब्लैकलिस्टेड कंपनी ने झूठे शपथपत्र पर हथियाए काम, अब 7 दिन का अल्टीमेटम

रायपुर:छत्तीसगढ़ के लोक निर्माण विभाग (PWD) की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जिस ठेका कंपनी को बिलासपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड ने 'दागी' मानकर ब्लैकलिस्ट कर दिया था, उसी कंपनी ने PWD की आंखों में धूल झोंककर 13 करोड़ रुपये के सरकारी ठेके हथिया लिए। दस्तावेजों के इस बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा होने के बाद अब विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। PWD ने अपनी साख बचाते हुए मेसर्स श्री कृष्णा इंफ्रा डेवलपर को कारण बताओ नोटिस थमाया है और 7 दिन के भीतर जवाब तलब किया है।

कैसे खेला गया फर्जीवाड़े का खेल?

बिलासपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड ने साल 2023 में गंभीर अनियमितताओं के चलते मेसर्स श्री कृष्णा इंफ्रा डेवलपर को पांच साल के लिए ब्लैकलिस्ट किया था। नियमानुसार, प्रतिबंधित होने के बाद कंपनी किसी भी सरकारी निविदा प्रक्रिया (टेंडर) का हिस्सा नहीं बन सकती।

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लेकिन कंपनी ने PWD के विद्युत एवं यांत्रिकी (E&M) शाखा में निविदा भरते समय एक झूठा शपथपत्र पेश किया। इस शपथपत्र में कंपनी ने खुद को 'गैर-प्रतिबंधित' बताया। सबसे बड़ा सवाल यह है कि 13 करोड़ जैसे बड़े बजट के टेंडर अलॉट करते समय PWD के जिम्मेदार अधिकारियों ने दस्तावेजों का क्रॉस वेरिफिकेशन क्यों नहीं किया? बिना जांच-पड़ताल के ही ठेके रेवड़ियों की तरह बांट दिए गए।

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इन बड़े शहरों में बिछाया था जाल

फर्जी दस्तावेजों और झूठे शपथपत्र के सहारे इस कंपनी ने प्रदेश के कई प्रमुख शहरों में काम ले लिया। इनमें मुख्य रूप से:

  •  रायपुर और नवा रायपुर
  •  बिलासपुर
  •  धमतरी और कुरूद
  •  महासमुंद

इन इलाकों में कंपनी को बिजली लाइन शिफ्टिंग, विद्युतीकरण, फ्लड लाइट लगाने और अन्य महत्वपूर्ण विद्युत कार्यों के ठेके दिए गए थे। मीडिया में मामला उछलने के बाद अब जाकर विभागीय अफसर नींद से जागे हैं।

क्या कहते हैं अधिकारी?

मामले के तूल पकड़ने के बाद विभाग अब एक्शन मोड में आ गया है। PWD यांत्रिकी शाखा के अधीक्षण अभियंता (SE) सुरेश धुप्पल ने मामले की पुष्टि करते हुए कहा, शिकायत और पुख्ता दस्तावेजों के मिलने के बाद हमने कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है। अगर जांच में यह साबित हो जाता है कि कंपनी द्वारा दिया गया शपथपत्र झूठा था, तो टेंडर रद्द करने और दंडात्मक कार्रवाई के लिए मामला तत्काल उच्च अधिकारियों को भेजा जाएगा।

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