कागजों पर खुली कंपनियों से 61 हजार करोड़ की लूट छतीसगढ़ बना काले धन का नया अड्डा

कागजों पर खुली कंपनियों से 61 हजार करोड़ की लूट छतीसगढ़ बना काले धन का नया अड्डा

रायपुर। छत्तीसगढ़ समेत पूरे भारत में एक ऐसा  कारोबार चल रहा है जहां न कोई फैक्ट्री है न ही कोई कर्मचारी काम करता है। यहां तक कि गोदाम में कोई माल भी नहीं होता। इसके बाद भी करोड़ों का टर्नओवर हो रहा है। यह सब सिर्फ कागजों और कंप्यूटर स्क्रीन पर चल रहा है। आयकर विभाग जीएसटी और ईडी की लगातार कार्रवाई से देश में चल रहे काले धन के इस बड़े खेल का पर्दाफाश हुआ है। जांच में पता चला है कि देश भर में 22 हजार से ज्यादा फर्जी कंपनियां चल रही थीं। इन कंपनियों ने सरकारी खजाने से 61 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम लूट ली है।

आंकड़े बताते हैं कि केवल वित्तीय वर्ष 2024 और 2025 में ही 25 हजार से ज्यादा नई फर्जी कंपनियों की पहचान की गई है। इन कंपनियों का एक ही काम था। ये सिर्फ फर्जी बिल बनाती थीं और सरकार से टैक्स रिफंड वसूलती थीं। इसी तरीके से देश भर में बड़े पैमाने पर काले धन को सफेद किया जा रहा था।

छतीसगढ़ में सामने आए चौकाने वाले मामले

छत्तीसगढ़ को हमेशा खनिजों और हरे भरे जंगलों के लिए जाना जाता था। लेकिन अब यह राज्य फर्जी कंपनियों और काले धन को सफेद करने का एक बड़ा गढ़ बनता जा रहा है। केंद्रीय और राज्य की जांच एजेंसियों की रिपोर्ट में यह बात सामने आई है। जांच में पता चला है कि छत्तीसगढ़ के अंदर 170 से ज्यादा फर्जी कंपनियों का बड़ा जाल फैला हुआ था। इन कंपनियों ने 100 करोड़ रुपये से ज्यादा का टैक्स चोरी किया है। साल 2026 में एजेंसियों ने अपनी जांच बहुत तेज कर दी है। इसके चलते अब तक 25 से ज्यादा बड़े मामलों में छापे मारे गए हैं और कई गिरफ्तारियां भी हुई हैं।

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तीन बड़े घोटाले जिनमें फर्जी कंपनियों का हुआ इस्तेमाल
 महादेव सट्टा एप: भिलाई शहर से शुरू हुए इस 20 हजार करोड़ रुपये के सट्टा नेटवर्क में फर्जी कंपनियों का सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया गया। हवाला के जरिए दुबई तक पैसा पहुंचाने के लिए हजारों बेनामी बैंक खाते और फर्जी कंपनियां खोली गईं। आम लोगों का पैसा इन्ही कंपनियों के जरिए सफेद करके सिस्टम में लाया गया।
 शराब घोटाला: 2800 करोड़ रुपये के इस शराब घोटाले में भी ऐसा ही खेल हुआ। अवैध रूप से कमाए गए पैसे को ठिकाने लगाने के लिए 200 से ज्यादा बैंक खातों का एक बड़ा जाल तैयार किया गया। फर्जी कंपनियों के जरिए इस पैसे को जमीन जायदाद और दूसरे व्यापार में लगा दिया गया।
 मेडिकल घोटाला: स्वास्थ्य विभाग से जुड़े इस मामले में एजेंसियों की जांच में शशांक चोपड़ा और उनके करीबियों की 85 फर्जी कंपनियों का खुलासा हुआ। इन कंपनियों ने अस्पतालों में बिना कोई दवाई या मशीन सप्लाई किए ही करीब 28 करोड़ रुपये का टैक्स रिफंड सरकार से हड़प लिया।
मजदूरों के नाम पर खुलती हैं कंपनियां

आखिर यह खेल कैसे होता है। जांच एजेंसियों का कहना है कि ये कंपनियां सिर्फ कागजों पर दर्ज होती हैं। असल जिंदगी में इनका कोई ऑफिस नहीं होता। शातिर अपराधी इन कंपनियों को झुग्गी झोपड़ी में रहने वाले गरीबों और मजदूरों के नाम पर खोलते हैं। इसके बाद एक कंपनी दूसरी कंपनी को बिना कोई सामान भेजे करोड़ों रुपये का बिल दे देती है। इसी फर्जी बिल पर सरकार से टैक्स रिफंड ले लिया जाता है।

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इसके बाद इस पैसे को कई अलग अलग कंपनियों के खातों में बार बार घुमाया जाता है। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि जांच एजेंसियां असली मालिक तक न पहुंच सकें। अंत में यह पैसा लीगल प्रॉफिट बताकर निकाल लिया जाता है। अब सरकार भी डिजिटल तकनीक का पूरा इस्तेमाल कर रही है। एजेंसियां आधुनिक सॉफ्टवेयर और डेटा की मदद से इस काले खेल को खत्म करने में लगी हैं। लेकिन जिस तेजी से ये फर्जी कंपनियां बन रही हैं वह देश की अर्थव्यवस्था के लिए बहुत बड़ा खतरा है।

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