NJV SPECIAL: कागजों में करंट, जमीन पर 'पावर कट'! बिजली कंपनी का e-KYC अभियान फेल; अन्य विभाग पास, 65 लाख उपभोक्ताओं का डेटा अब भी रामभरोसे

NJV SPECIAL: कागजों में करंट, जमीन पर 'पावर कट'! बिजली कंपनी का e-KYC अभियान फेल; अन्य विभाग पास, 65 लाख उपभोक्ताओं का डेटा अब भी रामभरोसे

रायपुर। छत्तीसगढ़ में एक तरफ जहां राशन कार्ड, महतारी वंदन योजना और पीएम किसान सम्मान निधि जैसी जनहितैषी योजनाओं में ई-केवाईसी (e-KYC) ने हजारों 'मुर्दों' और अपात्र हितग्राहियों को जिंदा कर सिस्टम से बाहर का रास्ता दिखा दिया है, वहीं प्रदेश की बिजली कंपनी (CSPDCL) अभी भी 'तकनीकी खामियों' का रोना रोकर बैठी है। बिजली चोरी और फर्जी कनेक्शनों पर नकेल कसने के लिए 1 अप्रैल से शुरू होने वाला ई-केवाईसी अभियान दो महीने से ज्यादा का समय बीत जाने के बाद भी 'फाइलों के डस्टबिन' में पड़ा है। प्रदेश के 65 लाख से अधिक उपभोक्ताओं का डिजिटल सत्यापन अब तक शुरू नहीं हो सका है, जिससे कंपनी की कार्यप्रणाली और दावों पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

हवा-हवाई साबित हुए 40 दिन के दावे

मार्च के महीने में बिजली कंपनी के आला अधिकारियों ने बड़े-बड़े दावे किए थे कि होली के तुरंत बाद मीटर रीडर घर-घर जाकर ई-केवाईसी का काम शुरू कर देंगे। इतना ही नहीं, यह भी दावा किया गया था कि अभियान शुरू होने के महज 40 दिनों के भीतर पूरे प्रदेश का लक्ष्य हासिल कर लिया जाएगा। लेकिन अब जून का महीना शुरू हो चुका है और उपभोक्ताओं के दरवाजे पर कोई मीटर रीडर सत्यापन के लिए नहीं पहुंचा है।

चिप्स और यूआईडीएआई के बीच अटका कनेक्शन

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आखिर इस भारी-भरकम देरी की वजह क्या है? इस पर कंपनी के आईटी महकमे का अपना एक रटा-रटाया सरकारी जवाब है। कार्यपालन निदेशक (आईटी) एम. परियल के मुताबिक, ई-केवाईसी कराने के लिए चिप्स (CHiPS) के साथ अनुबंध तो हो चुका है, लेकिन यूआईडीएआई (UIDAI) और डेटा इंटीग्रेशन से जुड़ी कुछ अहम तकनीकी प्रक्रियाएं अभी भी अधर में लटकी हुई हैं। सवाल यह है कि जब प्रदेश के अन्य विभागों ने यह जटिल प्रक्रिया महीनों पहले पूरी कर ली, तो बिजली कंपनी का सिस्टम इतना सुस्त क्यों है?

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इन 65.60 लाख उपभोक्ताओं का अटका है काम:

  •  घरेलू उपभोक्ता: 51.62 लाख
  •  कृषि उपभोक्ता: 8.33 लाख
  •  गैर-घरेलू उपभोक्ता:4.62 लाख
  •  औद्योगिक उपभोक्ता: लगभग 42 हजार

 

क्या है इस सुस्ती का असली नुकसान?

इस योजना का मुख्य उद्देश्य सिर्फ उपभोक्ताओं का डेटाबेस अपडेट करना नहीं है, बल्कि सिस्टम में सेंध लगाकर बिजली चोरी करने वालों और फर्जी कनेक्शनों की पहचान करना है। इसके अलावा, सरकारी सब्सिडी का लाभ केवल वास्तविक और पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाना इसका अहम लक्ष्य है। ई-केवाईसी पूरी होने के बाद उपभोक्ताओं को व्हाट्सएप और मोबाइल के माध्यम से बिल, भुगतान और शिकायत निवारण जैसी स्मार्ट डिजिटल सुविधाएं मिलनी हैं, जो फिलहाल अटकी हुई हैं।

बड़ा खुलासा होने का डर?

जानकारों का मानना है कि यदि बिजली विभाग की ई-केवाईसी को भी सख्ती और पारदर्शिता के साथ लागू किया जाए, तो राजस्व संरक्षण की दिशा में यह एक बड़ा कदम साबित होगा और हजारों फर्जी मामलों का खुलासा हो सकता है। लेकिन फिलहाल, 65 लाख उपभोक्ताओं का यह महत्वाकांक्षी अभियान एसी कमरों की बैठकों और सरकारी फाइलों की धूल फांकता ही नजर आ रहा है।

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