धूल के गुबार और ठेकेदार की मनमानी से फूटा जनता का गुस्सा, मझवानी में आक्रोशित ग्रामीणों ने किया चक्का जाम
बिलासपुर (NJV न्यूज़) बिलासपुर से गौरेला-पेंड्रा को जोड़ने वाले निर्माणाधीन नेशनल हाईवे पर ठेकेदार की भारी लापरवाही और उड़ती धूल ने आखिरकार जनता के सब्र का बांध तोड़ दिया है। आज सुबह धूल से परेशान मझवानी ग्राम के आक्रोशित ग्रामीणों ने सड़क पर उतरकर जोरदार चक्का जाम कर दिया। सड़क निर्माण के दौरान पानी का छिड़काव न किए जाने से उड़ रहे धूल के गुबार ने लोगों का सांस लेना मुहाल कर दिया है, जिसके विरोध में सड़क पर उतरे ग्रामीणों ने दोनों ओर से वाहनों की रफ्तार थाम दी और जमकर नारेबाजी की।
सांसों में घुल रही धूल, ठेकेदार और प्रशासन बेपरवाह

रतनपुर-मझवानी-केंदा-कारीआम मार्ग का निर्माण कार्य लंबे समय से कछुआ चाल से चल रहा है। जगह-जगह सड़क को बेतरतीब ढंग से खोदकर लावारिस हालत में छोड़ दिया गया है। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि नियम के मुताबिक निर्माण के दौरान धूल को उड़ने से रोकने के लिए नियमित पानी का छिड़काव किया जाना चाहिए, लेकिन ठेकेदार पूरी तरह से मनमानी पर उतारू है। हर गुजरते वाहन के साथ उठने वाला धूल का बवंडर सीधे ग्रामीणों के घरों, दुकानों और फेफड़ों में घुस रहा है। इसी तानाशाही और लापरवाही के खिलाफ आज सुबह मझवानी के लोगों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने बीच सड़क पर बैठकर आवागमन ठप कर दिया।
साढ़े तीन घंटे का नरक बन चुका है सफर
नेशनल हाईवे के रूप में तब्दील हो रही इस महत्वपूर्ण सड़क की बदहाली का आलम यह है कि बिलासपुर से पेंड्रारोड तक का सफर अब यात्रियों के लिए साढ़े तीन घंटे से अधिक का खौफनाक और थकाऊ अनुभव बन गया है। विशेषकर रतनपुर से केंदा और घाट वाले हिस्सों में सफर करना जान हथेली पर लेकर चलने जैसा जोखिम भरा हो गया है। हैरानी की बात यह है कि पूरी सड़क पर न तो निर्माण कार्य में लगी मशीनें दिखाई देती हैं और न ही मजदूर। ऐसा प्रतीत होता है जैसे काम पूरी तरह से बंद कर दिया गया है।
गर्भवती महिलाओं और गंभीर मरीजों के लिए जानलेवा
रेलवे की लेटलतीफी और अचानकमार मार्ग के बंद होने के कारण आम जनता के पास इसी खस्ताहाल और अधूरी सड़क से गुजरने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है। गड्ढों और धूल से पटी यह सड़क गंभीर मरीजों और गर्भवती महिलाओं के लिए बेहद खतरनाक साबित हो रही है। इस जानलेवा सफर से लोगों की शारीरिक और मानसिक मुश्किलें कई गुना बढ़ गई हैं। वाहनों को भी भारी नुकसान पहुंच रहा है।
