गांजा और शराब माफिया की बौखलाहट नशे के खिलाफ सख्त टीआई को बदनाम करने में जुटा सिंडिकेट जिले में सात निरीक्षकों का तबादला
बिलासपुर। पुलिस महकमे में प्रशासनिक कसावट लाने के उद्देश्य से वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह ने जिले के सात निरीक्षकों का तत्काल प्रभाव से तबादला कर दिया है। कानून व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए उठाए गए इस कदम के साथ ही जिले में एक नई और गंभीर चर्चा भी छिड़ गई है। यह चर्चा इस बात को लेकर है कि आखिर कैसे अवैध नशे के कारोबारियों पर नकेल कसने वाले थाना प्रभारियों को तस्करों का सिंडिकेट सुनियोजित तरीके से बदनाम करने की साजिश रच रहा है। गांजा और शराब के अवैध व्यापार पर चोट करने का खामियाजा अब पुलिस अधिकारियों को झूठी शिकायतों के रूप में भुगतना पड़ रहा है।
सबसे पहले पुलिस महकमे में हुए इस बड़े फेरबदल की बात करें तो एसएसपी ने जिले की पुलिसिंग को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए कई अहम बदलाव किए हैं। जारी आदेश के अनुसार तखतपुर थाना प्रभारी विवेक पांडेय को कोनी थाना भेजा गया है जबकि कोनी थाना प्रभारी राजश्री दामू कोसले को कोतवाली सीएसपी कार्यालय में अटैच किया गया है। अजाक थाने में पदस्थ उमेश साहू को सकरी थाना और विजय चौधरी को समंस वारंट एवं शिकायत शाखा की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। पुलिस लाइन में पदस्थ टीआई अवनीश पासवान को तखतपुर थाना प्रभारी बनाया गया है। वहीं पुलिस लाइन में पदस्थ उत्तम कुमार साहू को अजाक थाने का प्रभारी नियुक्त किया गया है। इसके अलावा दो दिन पहले ही प्रशिक्षु डीएसपी आकाश चौधरी को कोटा थाने का पूर्ण प्रभार सौंपा गया है और पूर्व थाना प्रभारी नरेश चौहान को एसडीओपी कार्यालय में अटैच किया गया है।
इन प्रशासनिक कसावटों के बीच पचपेड़ी थाना क्षेत्र का मामला पुलिस महकमे के लिए एक बड़ा उदाहरण बन गया है। दरअसल गांजा तस्करों और अवैध शराब के कोचियों के खिलाफ लगातार की जा रही सख्त कार्रवाई पचपेड़ी थाना प्रभारी को भारी पड़ रही है। इलाके में लंबे समय से सक्रिय तस्करों का एक मजबूत सिंडिकेट पुलिस की इस ताबड़तोड़ कार्रवाई से पूरी तरह बौखला गया है। अपने अवैध साम्राज्य को ढहते देख यह सिंडिकेट अब थाना प्रभारी की छवि धूमिल करने और उन्हें बदनाम करने के लिए तरह तरह के हथकंडे अपना रहा है।
इस पूरी साजिश का पर्दाफाश हाल ही में जलसो गांव में हुई एक पुलिस कार्रवाई के बाद हुआ। पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर त्वरित कार्रवाई करते हुए 41 पाव अवैध शराब के साथ कथित कोचिया समीर कुर्रे को रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। जब पुलिस ने इस अवैध शराब तस्कर को पकड़ लिया तो उसे छुड़ाने के लिए थाना प्रभारी पर राजनीतिक और सामाजिक रसूख का भारी दबाव बनाया गया। जब थाना प्रभारी ने कानून का पालन करते हुए किसी भी तरह के दबाव में आने से स्पष्ट इनकार कर दिया और तस्कर को बिना कानूनी कार्रवाई के छोड़ने से मना कर दिया तो उनके खिलाफ झूठी शिकायतों का षड्यंत्र रच दिया गया।
तस्करों के इस शातिर सिंडिकेट ने कुछ स्थानीय सरपंचों को अपना मोहरा बनाया और उनके माध्यम से एसएसपी कार्यालय में यह झूठी शिकायत दर्ज करा दी कि थाना प्रभारी ने उनके साथ अभद्र व्यवहार और गाली गलौज की है। यह पूरा घटनाक्रम इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि जब कोई निडर पुलिस अधिकारी अवैध गांजा और शराब माफिया के खिलाफ कड़ा रुख अपनाता है तो उसे किस तरह से मानसिक दबाव और मनगढ़ंत आरोपों का सामना करना पड़ता है। तस्करों का यह सिंडिकेट सरपंच संघ के लेटरपैड का खुला दुरुपयोग कर रहा है ताकि पुलिस के मनोबल को तोड़ा जा सके और इलाके में उनका नशे का अवैध कारोबार बिना किसी रुकावट के निर्बाध रूप से चलता रहे। पुलिस महकमे को अब ऐसे सिंडिकेट की पहचान कर उनके खिलाफ और भी कठोर कार्रवाई करने की आवश्यकता है ताकि जिले में कानून का राज स्थापित रहे और पुलिस बेखौफ होकर अपना काम कर सके।
