CG BJP कोर ग्रुप: दिग्गजों की विदाई के बीच ओपी, अमर और बांधी का जलवा; बांधी का रुतबा बरकरार, प्रदेश संगठन में रुतबा कायम है
रायपुर। छत्तीसगढ़ भाजपा के भीतर सत्ता और संगठन का नया समीकरण सेट हो गया है। पार्टी के सबसे शक्तिशाली फोरम 'कोर ग्रुप' में एक बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक की गई है। पुन्नुलाल मोहले, बृजमोहन अग्रवाल और रामविचार नेताम जैसे दिग्गजों को इस सर्वोच्च समिति से बाहर कर दिया गया है। लेकिन इस भारी फेरबदल के बीच पूरी राजनीतिक पिक्चर में तीन नेताओं— ओपी चौधरी, अमर अग्रवाल और डॉ. कृष्णमूर्ति बांधी— का कद सबसे ज्यादा उभर कर सामने आया है। हाईकमान ने इन तीनों को कोर ग्रुप में जगह देकर 2026 के नए सियासी एजेंडे का साफ संकेत दे दिया है।
कोर ग्रुप में इन तीनों नेताओं की एंट्री के क्या हैं राजनीतिक मायने, आइए समझते हैं:
1. ओपी चौधरी: शाह का विजन, अब संगठन में भी 'सुप्रीम'
साय कैबिनेट में वित्त मंत्रालय जैसा भारी-भरकम विभाग संभालने वाले ओपी चौधरी अब संगठन के मामलों में भी सीधे दखल रखेंगे। दिग्गज आदिवासी नेता रामविचार नेताम को बाहर कर ओपी चौधरी को कोर ग्रुप में लाना एक बहुत बड़ा राजनीतिक संदेश है। विधानसभा चुनाव के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रायगढ़ में ओपी की पीठ थपथपाते हुए कहा था कि पार्टी युवा पीढ़ी को आगे बढ़ाएगी। कोर ग्रुप में ओपी की यह एंट्री उसी वादे का परिणाम है। अब सरकार की नीतियों के साथ-साथ संगठन के बड़े फैसलों में भी इस 'युवा और डायनमिक' चेहरे की मुहर लगेगी।
2. अमर अग्रवाल: कैबिनेट से दूरी, लेकिन संगठन में मिली 'कमान'
साय कैबिनेट गठन के समय जब बिलासपुर से लगातार चुनाव जीतने वाले अमर अग्रवाल को मंत्री नहीं बनाया गया था, तो कई तरह के कयास लग रहे थे। लेकिन अब कोर ग्रुप में उनकी शानदार वापसी ने सारे समीकरण साफ कर दिए हैं। राज्य निर्माण के पहले और बाद में भाजपा को सींचने वाले लखीराम अग्रवाल के परिवार के अमर अग्रवाल के पास रमन सरकार के समय का लंबा प्रशासनिक अनुभव है। डिप्टी सीएम अरुण साव के कोर ग्रुप में होने के बावजूद, अमर अग्रवाल को जगह देकर पार्टी ने बिलासपुर संभाग में अपना पावर बैलेंस और मजबूत कर लिया है।
3. डॉ. बांधी: हार के बाद भी बांधी का रुतबा बरकरार, प्रदेश संगठन में रुतबा कायम है
इस नई कोर कमेटी में अगर किसी नाम ने सबसे ज्यादा चौंकाया है, तो वह हैं पूर्व विधायक डॉ. कृष्णमूर्ति बांधी। विधानसभा चुनाव हारने के बावजूद कोर ग्रुप जैसे सर्वोच्च फोरम में जगह मिलना यह साबित करता है कि बांधी का रुतबा बरकरार है और प्रदेश संगठन में रुतबा कायम है। चुनावी हार-जीत से इतर, पार्टी हाईकमान और प्रदेश संगठन को उनकी रणनीतिक समझ और मैदानी पकड़ पर गहरा भरोसा है। इसी भरोसे के चलते उन्हें सीधे कोर ग्रुप में प्रमोट कर दिया गया है। उनके साथ पूर्व मंत्री लता उसेंडी का भी संगठन में दबदबा कायम दिखा है।
दिग्गजों की छुट्टी का संदेश दूसरी ओर, राज्य गठन के बाद से हमेशा कोर ग्रुप के सदस्य रहे बृजमोहन अग्रवाल को बैठक की सूचना तक नहीं देना, गौरीशंकर अग्रवाल, पुन्नुलाल मोहले, विक्रम उसेंडी और रेणुका सिंह को बाहर का रास्ता दिखाना यह बताता है कि भाजपा अब पूरी तरह से 'जेनरेशन शिफ्ट' के मोड में है।
